किसान सहायता एवं समस्या निवारण — गन्ना पर्ची, सर्वे व भुगतान सहायता | CaneUp

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गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
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व्हाट्सएप पर सहायता मैसेज भेजें🚨 उत्तर प्रदेश गन्ना किसान शिकायत व समस्या निवारण — संपूर्ण मार्गदर्शिका (2026-27)
मुख्य बिंदु (Quick Ground Summary): उत्तर प्रदेश के 50 लाख से अधिक गन्ना किसानों के लिए पेराई सत्र 2026-27 की औपचारिक शुरुआत से पूर्व सट्टा प्रदर्शन, जीपीएस सर्वे रकबा मिलान, 12 पखवाड़े का पर्ची कैलेंडर और 14 दिन के भीतर गन्ना भुगतान सबसे निर्णायक बिंदु हैं। यदि आपके सट्टे में नाम, बैंक खाता या सर्वे रकबे में कोई त्रुटि रह जाती है, तो पूरे पेराई सत्र के दौरान आपकी पर्चियां रुक सकती हैं अथवा चीनी मिल द्वारा तौल का पैसा गलत खाते में जा सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, बुलंदशहर) से लेकर तराई बेल्ट (लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, हरदोई, गोंडा, बस्ती) के गन्ना किसानों को प्रतिवर्ष सहकारी गन्ना विकास समितियों और चीनी मिलों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए CaneUp किसान सहायता सेवा के माध्यम से हमने प्रत्येक जिले और चीनी मिल के स्तर पर किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु यह एकीकृत डिजिटल मार्गदर्शिका तैयार की है।
1. उत्तर प्रदेश गन्ना किसान सहायता प्रणाली — धरातल की वास्तविक स्थिति
उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 और गन्ना विकास विभाग के प्रावधानों के तहत प्रत्येक पंजीकृत किसान को पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना चीनी मिलों व गन्ना समितियों का वैधानिक दायित्व है। धरातल पर किसानों को मुख्य रूप से 5 प्रकार की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है:
- सट्टा एवं सर्वे रकबा विसंगति: जीपीएस सर्वे के दौरान खेत का रकबा कम दर्ज होना या पेड़ी (Ratoon) की जगह पौधा (Plant) दर्ज हो जाना।
- बेसिक कोटा (Basic Quota) में कटौती: पिछले 3 वर्षों के औसत में कटौती करके कंप्यूटर कैलेंडर में पर्चियों की कुल संख्या घटा देना।
- ई-गन्ना ऐप (eGanna App v6.2) व पोर्टल लॉगिन विफलता: पासवर्ड भूल जाना, मोबाइल नंबर पर ओटीपी (OTP) न आना अथवा यूजीसी कोड (UGC Code) अमान्य दिखाना।
- कांटों पर घटतौली और पर्ची का वजन अस्वीकार होना: क्रय केंद्रों पर तय मानक वजन (CRT, TRL, TRK) से मिलान न होने पर तौल कंप्यूटर द्वारा पर्ची का ब्लॉक हो जाना।
- गन्ना मूल्य भुगतान में 14 दिनों से अधिक का विलंब: चीनी मिलों द्वारा तय समय सीमा में बैंक खातों में डीबीटी (DBT) ट्रांसफर न करना।
2. 15 सितंबर सट्टा प्रदर्शन व आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि — 4 बड़े सुधार
गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रदेश की सभी 168 गन्ना विकास समितियों में सट्टा प्रदर्शन (Satta Display Campaign) संचालित किया जा रहा है। 15 सितंबर 2026 आपत्ति दर्ज कराने की आधिकारिक अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। यदि आपके रिकॉर्ड में नीचे दिए गए 4 विवरणों में कोई कमी है, तो उसे तुरंत ठीक कराएं:
| सुधार का प्रकार | आवश्यक दस्तावेज | समाधान प्रक्रिया |
|---|---|---|
| खतौनी व नाम सुधार | नई डिजिटल खतौनी + आधार कार्ड | गन्ना समिति में सचिव के नाम प्रार्थना पत्र देकर राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार नाम सही कराएं। |
| बैंक खाता व IFSC कोड | बैंक पासबुक की फोटोकॉपी + कैंसिल चेक | सट्टे में दर्ज बैंक खाता आधार से एनपीसीआई (NPCI) लिंक होना अनिवार्य है, अन्यथा डीबीटी फेल हो जाएगी। |
| वरासत / सट्टा ट्रांसफर | मृत्यु प्रमाण पत्र + वारिसान शपथ पत्र | मूल खातेदार की मृत्यु की दशा में कानूनी वारिस के नाम सट्टा अंतरित (Transfer) कराने की पत्रावली जमा करें। |
| सर्वे रकबा व प्रजाति सुधार | सर्वे पर्ची + सुपरवाइजर संयुक्त रिपोर्ट | यदि खेत में Co-0118 या Co-15023 है और सर्वे में सामान्य किस्म चढ़ी है, तो तुरंत आपत्ति लगाएं। |
⚠️ विशेष चेतावनी: 15 सितंबर की समय सीमा समाप्त होने के बाद कंप्यूटर सट्टा डेटाबेस को फ्रीज कर दिया जाता है। एक बार डेटा लॉक होने के बाद पेराई सत्र के बीच में नाम या खाता बदलना बेहद कठिन हो जाता है। इसलिए संबंधित गन्ना पर्यवेक्षक (Cane Supervisor) से तुरंत संपर्क करें।
3. 12 पखवाड़े का सट्टा कैलेंडर व बेसिक कोटा विसंगतियों का समाधान
गन्ना पर्ची कैलेंडर समझने के लिए विभाग द्वारा निर्धारित 12 पखवाड़े (12 Fortnights) और कॉलम 1 से 15 के गणित को समझना अनिवार्य है। राज्य की चीनी मिलें 180 दिनों के पेराई सत्र को 15-15 दिनों के 12 समान भागों में बांटती हैं:
- पखवाड़ा 1 से 4 (नवंबर-दिसंबर): इसमें पेड़ी गन्ने (Ratoon Crop) को प्राथमिकता दी जाती है ताकि किसान अपने खेतों को खाली करके समय पर रबी गेहूं की बुवाई कर सकें। कुल बेसिक कोटे का लगभग 60% हिस्सा इन्हीं शुरुआती पखवाड़ों में कटता है।
- पखवाड़ा 5 से 9 (जनवरी-मार्च): इसमें अगेती और सामान्य पौधा गन्ना (Plant Sugarcane) की पर्चियां निर्गत की जाती हैं।
- पखवाड़ा 10 से 12 (अप्रैल-मई): अवशेष गन्ना, अतिरिक्त सट्टा और टेल-एंड सप्लाई की पर्चियां दी जाती हैं।
बेसिक कोटा निर्धारण का कानूनी 85% नियम:
किसी भी पुराने किसान का बेसिक कोटा उसके द्वारा पिछले 3 पेराई सत्रों में मिल को की गई वास्तविक आपूर्ति का औसत निकाल कर उसका 85% तय किया जाता है:
$$\text{बेसिक कोटा} = \frac{\text{वर्ष 1 की आपूर्ति} + \text{वर्ष 2 की आपूर्ति} + \text{वर्ष 3 की आपूर्ति}}{3} \times 85%$$
यदि आपकी पर्चियों की संख्या आपके रकबे के अनुपात में बहुत कम आ रही है, तो आप अपनी समिति में अतिरिक्त सट्टे (Additional Quota) हेतु फॉर्म-ग (Form-C) भरकर अतिरिक्त पर्चियों की मांग कर सकते हैं।
4. 14 दिन गन्ना भुगतान नियम एवं 15% ब्याज की कानूनी वसूली
उत्तर प्रदेश गन्ना पूर्ति एवं खरीद विनियमन अधिनियम 1953 की धारा 17 के अंतर्गत यह वैधानिक रूप से अनिवार्य है कि चीनी मिल द्वारा गन्ना तौल की तारीख से 14 दिनों के भीतर किसान के बैंक खाते में पूरी राशि का भुगतान कर दिया जाए:
- 14 दिनों के बाद 15% वार्षिक ब्याज: यदि कोई चीनी मिल 14 दिनों की निर्धारित अवधि के बाद भुगतान करती है, तो उसे नियमानुसार 15 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज (Interest) सहित भुगतान करना होता है।
- आरसी (RC - Recovery Certificate) जारी होना: भुगतान में निरंतर डिफॉल्ट करने वाली मिलों पर जिला प्रशासन द्वारा भू-राजस्व की भांति आरसी जारी करके चीनी और शीरे के स्टॉक को सील कर नीलामी कराई जाती है।
- शिकायत दर्ज कराने का तरीका: यदि आपकी मिल ने 14 दिन से अधिक समय से भुगतान रोक रखा है, तो आप ऊपर दिए गए हमारे फॉर्म में अपनी मिल और बकाया पर्ची की जानकारी दर्ज करें। हमारी टीम आपकी शिकायत को राज्य गन्ना आयुक्त और जिला गन्ना अधिकारी (DCO) के संज्ञान में लाने में पूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करती है।
5. 800 क्रय केंद्रों पर डिजिटल कांटों की सीलिंग और घटतौली रोकथाम अधिकार
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्र के गन्ना क्रय केंद्रों (Out-station Purchase Centers) पर घटतौली की शिकायतों के मद्देनजर विभाग ने सख्त दिशा-निर्देश लागू किए हैं:
- डिजिटल कांटों पर बारकोड सील: प्रदेश के 800 से अधिक संवेदनशील कांटों पर विधिक माप विज्ञान विभाग (Weights and Measures) द्वारा छेड़छाड़-रोधी बारकोड सील लगाई गई है।
- किसान सतर्कता समिति (Farmer Vigilance Committee): प्रत्येक क्रय केंद्र पर 5 स्थानीय किसानों की एक कमेटी गठित होती है, जिसे कांटा शुरू होने से पहले 1 क्विंटल के मानक बांट (Standard Weight) से कांटा चेक करने का कानूनी अधिकार है।
- वजन पर्ची का तत्काल मिलान: तौल के तुरंत बाद कंप्यूटर रसीद पर दर्ज सकल वजन (Gross), खाली गाड़ी का वजन (Tare) और शुद्ध गन्ने का वजन (Net) की जांच मौके पर ही करें।
6. eGanna App v6.2 व enquiry.caneup.in पर तकनीकी समाधान
किसानों द्वारा मोबाइल ऐप पर आ रही सामान्य समस्याओं के लिए निम्नलिखित तकनीकी उपाय अपनाएं:
- UGC कोड से सीधा लॉगिन: यदि पासवर्ड काम नहीं कर रहा है, तो लॉगिन स्क्रीन पर “UGC द्वारा खोजें” विकल्प चुनें। अपना 12-अंकीय किसान कोड डालें।
- सर्वे डेटा नहीं दिख रहा: यदि eGanna App में पुराना सत्र 2025-26 दिख रहा है, तो ऐप की सेटिंग्स में जाकर “Clear Cache” (कैश साफ़ करें) करें और प्ले स्टोर से v6.2 पर अपडेट करें।
- सप्लाई टिकट एसएमएस (SMS) न आना: अपने मोबाइल नेटवर्क पर डीएनडी (DND) जांचें और सुनिश्चित करें कि समिति में दर्ज मोबाइल नंबर सक्रिय है।
7. आधिकारिक हेल्पलाइन एवं सहायता संपर्क सूत्र
यदि ऑनलाइन माध्यम से आपकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो किसान भाई सीधे इन सरकारी टोल-फ्री नंबरों पर कॉल करके अपनी शिकायत की रसीद संख्या (Complaint Docket Number) प्राप्त कर सकते हैं:
- 📞 गन्ना विभाग उत्तर प्रदेश मुख्यालय टोल-फ्री:
1800-121-3203(सुबह 9:00 से शाम 6:00 बजे) - 📞 किसान कॉल सेंटर (Kisan Call Center):
1551(24x7 निःशुल्क सेवा) - 🌐 आधिकारिक गन्ना किसान पोर्टल: enquiry.caneup.in
- 🏢 गन्ना आयुक्त कार्यालय, लखनऊ: 0522-2209355 / 2209356
- 💬 CaneUp व्हाट्सएप किसान सहायता:
+91-7017208945
8. अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: गन्ना पर्ची न आने पर किसान को सबसे पहले क्या कदम उठाना चाहिए?
उत्तर: सबसे पहले eGanna App या enquiry.caneup.in पर अपना 12 पखवाड़े का सट्टा कैलेंडर खोलें। जांचें कि वर्तमान पखवाड़े और आज के कॉलम में कोई पर्ची निर्धारित है या नहीं। यदि कैलेंडर में पर्ची दर्ज है किंतु जारी नहीं हुई है, तो तुरंत अपनी चीनी मिल के गन्ना प्रबंधक (Cane Manager) या समिति सचिव से संपर्क करें। आप हमारे फॉर्म पर भी विवरण भेज सकते हैं।
प्रश्न 2: क्या 15 सितंबर के बाद सट्टे में बैंक खाता या रकबा बदला जा सकता है?
उत्तर: 15 सितंबर सट्टा प्रदर्शन की सामान्य अंतिम तिथि है। इसके पश्चात केवल विशेष परिस्थितियों में (जैसे खातेदार की आकस्मिक मृत्यु या बैंक मर्जर) जिला गन्ना अधिकारी (DCO) की संस्तुति पर ही विशेष अनुमति से संशोधन संभव होता है। अतः 15 सितंबर से पूर्व ही अपनी आपत्ति समिति में दर्ज कराना सुरक्षित है।
प्रश्न 3: क्या CaneUp पर अपनी चीनी मिल चुनकर व्हाट्सएप अपडेट्स पाना सुरक्षित है?
उत्तर: हाँ, CaneUp का किसान सहायता सिस्टम 100% सुरक्षित और निःशुल्क है। हम किसानों की सहमति के आधार पर केवल उनकी चीनी मिल के इंडेंट, पर्ची कैलेंडर, तौल केंद्र शुरू होने की तिथियों और भुगतान से जुड़े प्रामाणिक समाचार ही व्हाट्सएप पर साझा करते हैं। कोई अनचाहा विज्ञापन या स्पैम नहीं भेजा जाता।
प्रश्न 4: यदि चीनी मिल 14 दिन में भुगतान न करे तो किसान को क्या ब्याज मिलता है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश गन्ना पूर्ति एवं खरीद विनियमन अधिनियम 1953 की धारा 17 के अनुसार, तौल के 14 दिन के भीतर भुगतान न होने पर मिल प्रबंधन किसान को 15 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से विलंबित अवधि का ब्याज देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। किसान इसके लिए डीएम अथवा गन्ना आयुक्त कार्यालय में औपचारिक दावा प्रस्तुत कर सकते हैं।
प्रश्न 5: CaneUp किसान समस्या निवारण फॉर्म पर दर्ज शिकायत का निस्तारण कैसे होता है?
उत्तर: जब आप ऊपर दिए गए फॉर्म पर अपनी समस्या दर्ज करते हैं, तो आपकी जानकारी सीधे हमारे डेटाबेस में सुरक्षित होती है और हमारे व्हाट्सएप हेल्पलाइन पर स्थानांतरित हो जाती है। हमारी कृषि नीति और गन्ना विशेषज्ञ टीम आपकी समस्या का अध्ययन करके 24 से 48 घंटे के भीतर संबंधित नियम, प्रार्थना पत्र का प्रारूप और सही प्रशासनिक अधिकारी से संपर्क करने का पूरा मार्गदर्शन प्रदान करती है।
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