यूपी की सभी 120 चीनी मिलों में रूफटॉप सोलर लगाना अनिवार्य — गैर-पेराई सत्र में सौर ऊर्जा से चलेंगे संयंत्र

लखनऊ (CaneUp पर्यावरण व ऊर्जा रिपोर्ट — 8 सितंबर, सुबह 8:05 बजे): उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के चीनी उद्योग को पर्यावरण-अनुकूल और कार्बन-न्यूट्रल बनाने की दिशा में युगांतकारी नीतिगत फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UPNEDA) और गन्ना विकास विभाग ने संयुक्त शासनादेश जारी करते हुए प्रदेश की सभी 120 चीनी मिलों के लिए अपने चीनी गोदामों, कार्यशालाओं और प्रशासनिक भवनों की छतों पर रूफटॉप सोलर पावर प्लांट (Rooftop Solar Power Plant) स्थापित करना अनिवार्य कर दिया है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रत्येक मिल को अपनी कुल गैर-पेराई सत्र (Off-season) बिजली खपत का कम से कम 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा करना होगा।
☀️ बगास को-जेनरेशन + सोलर हाइब्रिड मॉडल की खासियतें
पेराई सत्र के दौरान चीनी मिलें गन्ने की खोई (Bagasse) जलाकर पहले से ही हजारों मेगावाट हरित बिजली बनाती हैं और राज्य ग्रिड को बेचती हैं। परंतु मई से अक्टूबर के बीच गैर-पेराई सत्र में मिलों को मेंटेनेंस और वर्कशॉप चलाने के लिए ग्रिड से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती थी:
| पैरामीटर | पारंपरिक व्यवस्था | नया सोलर हाइब्रिड मॉडल | मिल व राज्य को लाभ |
|---|---|---|---|
| ऑफ-सीजन बिजली स्रोत | राज्य ग्रिड से महंगी बिजली (₹9.50/यूनिट) | छतों पर लगे सोलर पैनल (लागत ₹2.20/यूनिट) | बिजली बिल में सालाना ₹1.5 से ₹2 करोड़ की शुद्ध बचत |
| ग्रीन एनर्जी नेट मीटरिंग | सीमित | अतिरिक्त सौर ऊर्जा ग्रिड को एक्सपोर्ट | अतिरिक्त राजस्व अर्जन |
| कार्बन क्रेडिट लाभ | न्यूनतम | प्रति मिल 5,000 टन कार्बन क्रेडिट | अंतरराष्ट्रीय बाजार में ग्रीन शुगर की ऊंची कीमत |
🏭 15 मार्च 2027 तक का मिला समय
शासनादेश के अनुसार चीनी मिलों को इस परियोजना को 3 चरणों में पूरा करने की समय-सीमा दी गई है:
- प्रथम चरण (दिसंबर 2026 तक): विस्तृत फिजिबिलिटी रिपोर्ट और ग्रिड कनेक्टिविटी स्वीकृति।
- द्वितीय चरण (जनवरी 2027 तक): कम से कम 500 किलोवाट (KW) क्षमता के सोलर पैनलों की स्थापना।
- तृतीय चरण (मार्च 2027 तक): पूर्ण कमीशनिंग और राज्य लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC) से ऑनलाइन सिंक्रोनाइजेशन।
इस पहल से उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा जहां चीनी का उत्पादन पूरी तरह 100% नवीकरणीय ऊर्जा (बगास + सोलर) के समन्वय से होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मिलों की परिचालन लागत में भी भारी कमी आएगी।
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