2025–26 में गन्ना किसान सबसे ज्यादा नुकसान में, पैदावार सबसे कम

अमरोहा | मुरादाबाद | बिजनौर | मेरठ | संभल | मुज़फ्फरनगर | लखीमपुर:
2025–26 का सीजन गन्ना किसानों के लिए अब तक का सबसे मुश्किल साल साबित हो रहा है।
हमने उत्तर प्रदेश के कई गन्ना बेल्ट जिलों में जाकर किसानों से सीधे बातचीत की।
मैदान से जो तस्वीर सामने आई, वह चिंता बढ़ाने वाली है।

लगभग हर जिले में किसानों ने एक जैसी बात कही –
“इस साल गन्ने में न तो पहले जैसी पैदावार हुई और न ही खेती में उतना फायदा बचा।”

📍 ग्राउंड हकीकत:
अमरोहा, बिजनौर और मुरादाबाद से लेकर मेरठ, संभल और लखीमपुर तक
किसानों का कहना है कि इस साल गन्ना कमजोर रहा, पतला रहा और समय से पहले सूख गया।

📉 2025–26 में गन्ने की पैदावार क्यों गिरी?

किसानों के मुताबिक इस साल गन्ने की फसल पर एक साथ कई तरह की मार पड़ी:

  • 🌾 गन्ने में रोग बहुत ज्यादा फैला – लाल सड़न, जड़ सड़न और पत्तों के रोग आम हो गए।
  • ☀️ मौसम की मार और सूखा – समय पर बारिश नहीं हुई, जिससे गन्ना पूरी तरह बढ़ नहीं पाया।
  • 💧 सिंचाई का खर्च बढ़ा – डीजल महंगा होने से ट्यूबवेल चलाना भारी पड़ा।
  • 📉 गन्ना पतला और वजन कम – पैदावार पहले के मुकाबले साफ तौर पर घटी।

अमरोहा और बिजनौर के किसानों ने बताया:
“पहले एक बीघे में जितना गन्ना निकलता था, इस साल उससे काफी कम निकला।”

💸 ₹400 रेट के बावजूद किसान फायदे में क्यों नहीं?

हालांकि इस समय गन्ने का सरकारी रेट ₹400 प्रति क्विंटल है,
लेकिन किसानों का कहना है कि लागत इतनी बढ़ गई है कि यह रेट भी अब कम पड़ रहा है।

  • खाद, दवा और बीज महंगे हो गए
  • मजदूरी पहले से ज्यादा देनी पड़ रही है
  • रोग लगने से दोबारा दवा का खर्च बढ़ा

मेरठ और मुज़फ्फरनगर के किसानों ने साफ कहा:
“रेट बढ़ा है, लेकिन खर्च उससे कहीं ज्यादा बढ़ गया है।”

🌳 अब किसान गन्ना छोड़कर पॉपलर की खेती क्यों सोच रहे हैं?

ग्राउंड रिपोर्ट में एक बड़ा बदलाव यह भी सामने आया कि
अब कई किसान गन्ने की जगह पॉपलर (Poplar) के पेड़ लगाने की तैयारी कर रहे हैं।

किसानों की वजहें:

  • 🌲 पॉपलर में मेहनत कम
  • 💧 पानी की जरूरत कम
  • 🧾 हर साल खर्च नहीं
  • 🕒 5–6 साल बाद एकमुश्त पैसा

संभल और मुरादाबाद के किसानों का कहना है:
“गन्ना हर साल नुकसान दे रहा है, पॉपलर कम से कम सुरक्षित है।”

⚠️ अगर यही हाल रहा तो आगे क्या होगा?

अगर किसान इसी तरह गन्ने की खेती छोड़ते रहे, तो आने वाले समय में:

  • चीनी मिलों पर असर पड़ेगा
  • गन्ने का रकबा घटेगा
  • ग्रामीण रोजगार पर असर पड़ेगा

किसानों की साफ मांग है:

  • रोग-रोधी गन्ना वैरायटी
  • लागत के हिसाब से गन्ना रेट
  • समय पर पूरा भुगतान
  • खेती में तकनीकी मदद
🧠 निष्कर्ष (मैदान से सच्चाई):
2025–26 में गन्ना किसान सबसे ज्यादा नुकसान में है।
पैदावार कम है, खर्च ज्यादा है और किसान अब विकल्प खोजने को मजबूर हो चुका है।
यह रिपोर्ट आंकड़ों की नहीं, खेत से आई हकीकत है।

लेखक: Aamir Raza

आमिर रज़ा CaneUp.xyz के संस्थापक हैं और किसानों के बीच जाकर
ग्राउंड लेवल पर सच्ची रिपोर्टिंग करते हैं।

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