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15 अक्टूबर को राष्ट्रीय सम्मान: लखीमपुर के गन्ना किसान अचल मिश्रा को राज्यपाल देंगी पुरस्कार, 400 किसानों को जोड़ा

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 15, 2026 • 5 min read
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15 अक्टूबर को राष्ट्रीय सम्मान: लखीमपुर के गन्ना किसान अचल मिश्रा को राज्यपाल देंगी पुरस्कार, 400 किसानों को जोड़ा
अंतिम अपडेट: October 15, 2026 6:51 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

आज, 15 अक्टूबर को कानपुर में एक ऐसा समारोह हो रहा है जिसने लखीमपुर खीरी के किसानों का सीना चौड़ा कर दिया है। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई), कानपुर के 91वें स्थापना दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जिले के प्रगतिशील गन्ना किसान अचल मिश्रा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करेंगी। गन्ने की खेती में उनके उत्कृष्ट योगदान और कृषि के प्रति समर्पण के लिए मिल रही यह पहचान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि तराई क्षेत्र के हर उस किसान का सम्मान है जो खेत को कारोबार में बदलने का सपना देखता है।

समारोह में प्रदेश के शर्करा उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। स्थापना दिवस के साथ सीपीसीबी 2.0 चार्टर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी भी आयोजित होगी, जिसमें गन्ना और चीनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। यानी आज का दिन न सिर्फ सम्मान का होगा, बल्कि गन्ना उद्योग के भविष्य की दिशा तय करने वाली चर्चा का भी।

कौन हैं अचल मिश्रा

अचल मिश्रा लखीमपुर खीरी के बिजुआ ब्लॉक के मेड़ाईपुरवा गांव के रहने वाले हैं। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद पिता के निधन पर वे गांव लौट आए और खेती को ही अपना मिशन बना लिया। लाइव हिन्दुस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार, अचल ने सिर्फ अपनी खेती नहीं बदली, बल्कि एक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाकर करीब 400 किसानों को भी साथ जोड़ा। इस एफपीओ के जरिए किसान सह-फसली खेती के साथ बीज उत्पादन भी कर रहे हैं, जिससे हर जुड़े किसान को सीधा फायदा मिल रहा है।

उनके काम की पहचान पहले भी हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें ‘करोड़पति किसान’ के सम्मान से नवाजा जा चुका है और भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने उन्हें देश के प्रगतिशील और प्रेरणादायक किसानों की श्रेणी में शामिल किया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें राज्य में सबसे अधिक गन्ना उत्पादन करने वाले किसानों में से एक के रूप में सम्मानित किया था।

गन्ने की खेती में क्या किया अलग

अचल मिश्रा की कहानी सिर्फ मेहनत की नहीं, सोच बदलने की कहानी है। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जब आसपास के किसान रासायनिक खाद पर निर्भर थे, तब अचल ने जैविक खाद का रास्ता चुना। उन्होंने पारंपरिक बुवाई छोड़कर ट्रेंच ओपनर और ट्रेंच रिंग ओपनर तकनीक अपनाई, जिससे पानी की बचत के साथ पैदावार में बड़ा इजाफा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, इन नवाचारों से उनकी प्रति एकड़ उपज 700-800 क्विंटल से बढ़कर 1,800-2,000 क्विंटल तक पहुंच गई।

यही नहीं, उन्होंने अपने गन्ने के खेतों और एक पर्यटन केंद्र के जरिए इलाके के करीब 50 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी दिया। यानी खेती उनके लिए सिर्फ फसल नहीं, एक पूरा उद्यम बन चुकी है।

91वां स्थापना दिवस और सीपीसीबी 2.0 संगोष्ठी

कानपुर का राष्ट्रीय शर्करा संस्थान गन्ना और चीनी उद्योग के क्षेत्र में देश का अग्रणी संस्थान है। इसके 91वें स्थापना दिवस समारोह में इस बार सीपीसीबी 2.0 चार्टर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी होगा। इसमें गन्ने की रिकवरी, चीनी उत्पादन की गुणवत्ता और उद्योग से जुड़े पर्यावरण मानकों जैसे विषयों पर चर्चा होगी। ऐसे मंच पर एक प्रगतिशील किसान का सम्मानित होना इस बात का संकेत है कि अब नीति बनाने वाले भी खेत की नवाचारी सोच को गंभीरता से ले रहे हैं।

लखीमपुर खीरी गन्ना उत्पादन के प्रमुख जिलों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका गन्ने की खेती पर टिकी है। जिले के किसी किसान का राष्ट्रीय संस्थान के मंच पर सम्मानित होना पूरे कृषि समुदाय के लिए गौरव का क्षण है। यह दूसरे किसानों को भी नई तकनीक अपनाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित करेगा।

युवाओं के लिए बड़ी सीख

अचल मिश्रा की कहानी सबसे ज्यादा उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो खेती को कमजोर विकल्प मानते हैं। कानून की पढ़ाई के बाद गांव लौटकर उन्होंने साबित किया कि डिग्री के साथ खेत भी संभाला जा सकता है, और उसे फायदे का व्यवसाय बनाया जा सकता है। उन्होंने खुद को सिर्फ किसान तक सीमित नहीं रखा — उद्यमी, समाजसेवी और अब 400 किसानों के मार्गदर्शक बने।

किसान भाई इस सम्मान से एक बात और समझ सकते हैं: गन्ने की खेती में भविष्य उसी का है जो नई तकनीक और सामूहिक प्रयास को अपनाएगा। चाहे ट्रेंच विधि से बुवाई हो, जैविक खाद का संतुलित उपयोग हो, या एफपीओ जैसा संगठन — छोटे-छोटे बदलाव बड़े नतीजे देते हैं।

आज जब राज्यपाल के हाथों अचल मिश्रा सम्मान लेंगे, तो वह तस्वीर यूपी के 48 लाख गन्ना किसान परिवारों के लिए एक संदेश होगी: मेहनत और नवाचार की पहचान देर-सबेर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचती है।

जवाब जानिए

प्रश्न 1: अचल मिश्रा को कौन सा सम्मान मिल रहा है? राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर के 91वें स्थापना दिवस समारोह में गन्ना खेती में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान 15 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल प्रदान करेंगी।

प्रश्न 2: अचल मिश्रा कहां के रहने वाले हैं? वे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के बिजुआ ब्लॉक के मेड़ाईपुरवा गांव के किसान हैं। उन्होंने कानून की पढ़ाई की है और बाद में खेती को अपना व्यवसाय बनाया।

प्रश्न 3: उनकी खेती में क्या खास है? उन्होंने ट्रेंच ओपनर तकनीक से बुवाई, जैविक खाद का उपयोग और सह-फसली खेती अपनाई। रिपोर्टों के अनुसार उनकी प्रति एकड़ गन्ना उपज 1,800-2,000 क्विंटल तक पहुंची। उन्होंने करीब 400 किसानों को जोड़कर एक एफपीओ भी बनाया है।

प्रश्न 4: राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कहां है और आज वहां क्या हो रहा है? राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कानपुर में है। आज इसके 91वें स्थापना दिवस समारोह के साथ सीपीसीबी 2.0 चार्टर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी भी आयोजित हो रही है, जिसमें गन्ना और चीनी उद्योग के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

प्रश्न 5: क्या अचल मिश्रा को पहले भी सम्मान मिल चुका है? हां। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें ‘करोड़पति किसान’ सम्मान मिल चुका है, कृषि मंत्रालय ने उन्हें प्रेरणादायक किसानों की श्रेणी में शामिल किया है और मुख्यमंत्री ने भी राज्य में सर्वाधिक गन्ना उत्पादन के लिए उनका सम्मान किया था।

स्रोत: जागरण (14 अक्टूबर 2026), लाइव हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तान टाइम्स

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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