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इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त आदेश — ₹1,936 करोड़ गन्ना बकाए की वसूली तेज करें सभी DM, 15 अक्टूबर तक रिपोर्ट तलब

Randhir Patil Randhir Patil Sep 4, 2026 3 min read
इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त आदेश — ₹1,936 करोड़ गन्ना बकाए की वसूली तेज करें सभी DM, 15 अक्टूबर तक रिपोर्ट तलब
अंतिम अपडेट: September 4, 2026 9:15 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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प्रयागराज / लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश की निजी और सहकारी चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर बेहद सख्त और कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने राज्य के विभिन्न जिलों में चीनी मिलों के खिलाफ जारी वसूली प्रमाण पत्रों (Recovery Certificates - RC) के तहत लंबित ₹1,936 करोड़ के गन्ना मूल्य की वसूली प्रक्रिया में अत्यधिक ढिलाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने प्रदेश के सभी संबंधित जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे चीनी गोदामों की कुर्की और चीनी-शीरे की नीलामी कर बकाए की वसूली में तेजी लाएं और आगामी 15 अक्टूबर 2026 तक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Affidavit) अदालत में पेश करें।

अदालत किसान मजदूर संगठन और अन्य गन्ना उत्पादक किसानों द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई कर रही थी। याचियों के वरिष्ठ अधिवक्ता ने पीठ को अवगत कराया कि जिला प्रशासन द्वारा चीनी मिलों के खिलाफ कागजों में तो आरसी जारी कर दी जाती है, लेकिन वास्तविक धरातल पर चीनी मिल प्रबंधनों के साथ मिलीभगत के चलते न तो गोदाम सील किए जाते हैं और न ही चीनी की नीलामी होती है। इसके परिणामस्वरूप कई वर्षों से किसानों का हजारों करोड़ रुपया फंसा हुआ है और किसान कर्ज के जाल में फंसकर आत्महत्या करने को विवश हो रहे हैं।

14 दिन के नियम और 15% ब्याज की अनदेखी पर फटकार

उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 की धारा 17 का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि किसान द्वारा गन्ना आपूर्ति किए जाने के 14 दिनों के भीतर उसका शत-प्रतिशत भुगतान अनिवार्य रूप से हो जाना चाहिए। यदि मिल 14 दिन के भीतर भुगतान करने में विफल रहती है, तो उसे विलंब अवधि के लिए 15 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा। अदालत ने टिप्पणी की कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी मूलधन की वसूली नहीं हो पा रही है, ब्याज मिलना तो दूर की कौड़ी बना हुआ है।

न्यायालय ने राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (गन्ना) को अदालत के आदेश से तत्काल अवगत कराएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि 15 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान यदि किसी जिले में वसूली की प्रगति असंतोषजनक पाई गई, तो संबंधित जिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।

शामली, हापुड़, बिजनौर और लखीमपुर के डीएम रडार पर

अदालत में पेश की गई बकाएदारों की सूची के अनुसार, सर्वाधिक बकाया शामली (अपर दोआब व बजाज थानाभवन), हापुड़ (सिंभावली व बृजनाथपुर), बिजनौर (बरकातपुर व दयाल मिल) और लखीमपुर खीरी (बजाज पलिया व खंभारखेड़ा) जिलों की मिलों पर केंद्रित है।

हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद राज्य के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। गन्ना आयुक्त ने आज सुबह सभी जिला गन्ना अधिकारियों के साथ आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर मिल-वार चीनी स्टॉक और एस्क्रो खाते में जमा दैनिक धनराशि का पूरा ब्योरा तलब किया है ताकि 15 अक्टूबर से पहले कोर्ट में संतोषजनक हलफनामा दाखिल किया जा सके।

किसानों के विधिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प

किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कोर्ट के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह लाखों किसानों की न्याय की लड़ाई की बड़ी जीत है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन करते हुए डिफाल्टर मिलों के चीनी गोदामों की तत्काल नीलामी कराई जाए ताकि नए पेराई सत्र से पहले किसानों का एक-एक पैसा चुकता हो सके।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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