इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: चीनी मिलों को स्थापित क्षमता के अनुसार मिलेगा गन्ना, भुगतान विवाद पर कोटा कटौती पर रोक — किसानों को निर्बाध तौल की गारंटी

प्रयागराज / लखनऊ (CaneUp विशेष ब्यूरो — 13 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) से एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कानूनी व्यवस्था सामने आई है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट और दो टूक शब्दों में फैसला दिया है कि चीनी मिलों को उनकी स्थापित पेराई क्षमता (Installed Crushing Capacity) के अनुसार ही गन्ने का आवंटन व आरक्षण किया जाना अनिवार्य है। भुगतान में विलंब या पिछले विवादों के आधार पर गन्ना आयुक्त (Cane Commissioner) द्वारा चीनी मिलों के गन्ने के कोटे या क्रय केंद्रों (Purchase Centers) में मनमानी कटौती करना कानूनी रूप से अनुचित है।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि — “चीनी उद्योग राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि मिलों को उनकी क्षमता से कम गन्ना मिलेगा तो मिलें घाटे में जाकर बंद हो जाएंगी, जिसका सीधा और सबसे घातक असर उन लाखों किसानों पर पड़ेगा जो अपनी साल भर की मेहनत की उपज बेचने के लिए इन्हीं मिलों पर निर्भर हैं।”
⚖️ क्या था मामला? (यदु शुगर मिल बनाम उत्तर प्रदेश सरकार)
यह मामला बदायूं जिले की बीसौली स्थित यदु शुगर मिल्स लिमिटेड (Yadu Sugar Mill) व अन्य चीनी मिलों द्वारा गन्ना आयुक्त के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर आया:
- गन्ना आयुक्त की कार्रवाई: पिछले सत्र में गन्ना मूल्य भुगतान में देरी और रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) के विवाद को लेकर गन्ना विभाग ने मिल के पारंपरिक गन्ना आरक्षित क्षेत्र और कई क्रय केंद्रों को काटकर दूसरी दूरदराज की मिलों को आवंटित कर दिया था।
- चीनी मिल का पक्ष: मिल प्रबंधन ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उनकी दैनिक पेराई क्षमता 5,000 से 7,500 TCD है। गन्ना क्षेत्र छीन लिए जाने से मिल को पेराई के लिए पर्याप्त कच्चा माल (Sugarcane) नहीं मिल पा रहा था, जिससे मिल को बीच सीजन में पेराई बंद करनी पड़ रही थी और कर्मचारियों व प्लांट के मेंटेनेंस का भारी नुकसान हो रहा था।
- हाईकोर्ट का निष्कर्ष: न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुनाया कि गन्ना आपूर्ति एवं खरीद (विनियमन) अधिनियम, 1953 का मूल उद्देश्य चीनी मिलों को पर्याप्त गन्ना उपलब्ध कराना और किसानों को समय पर तौल व भुगतान सुनिश्चित करना है, न कि मिलों को कच्चा माल कम देकर उन्हें रुग्ण (Sick) बनाना।
📌 हाईकोर्ट के फैसले की 5 सबसे बड़ी मुख्य बातें
| क्र. सं. | विषय | हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश |
|---|---|---|
| 1. | क्षमतानुसार आवंटन | प्रत्येक चीनी मिल को उसकी अधिकृत व स्थापित पेराई क्षमता (Installed Crushing Capacity) के अनुपात में पूरा गन्ना आरक्षित किया जाए। |
| 2. | भुगतान विवाद पर कटौती नहीं | भुगतान में देरी को आधार बनाकर गन्ने के कोटे में कटौती नहीं की जा सकती। बकाए की वसूली के लिए कानून में अलग सख्त प्रावधान (RC, स्टॉक जब्ती) मौजूद हैं। |
| 3. | नुकसान की वास्तविक भरपाई | सिर्फ कागजी औपचारिकताएं पूरी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यदि गलत आवंटन से मिल या किसानों को वित्तीय क्षति हुई है तो उसकी भरपाई सुनिश्चित हो। |
| 4. | क्रय केंद्रों की स्थिरता | किसानों के नजदीकी क्रय केंद्रों को अचानक एक मिल से दूसरी दूर की मिल में न बदला जाए, जिससे किसानों को ढुलाई (Cartage) में अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। |
| 5. | सत्र 2026-27 के लिए बाध्यकारी | गन्ना आयुक्त आगामी पेराई सत्र 2026-27 की गन्ना आरक्षण नीति (Cane Reservation Order) बनाते समय इस न्यायिक व्यवस्था का कड़ाई से पालन करें। |
🚜 किसानों को इस फैसले से क्या सीधा लाभ मिलेगा?
उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के मन में अक्सर यह संशय रहता है कि मिलों और विभाग के बीच के विवाद से उन्हें क्या नफा-नुकसान होगा। इस फैसले से किसानों को निम्नलिखित 4 प्रत्यक्ष फायदे मिलेंगे:
1. नजदीकी क्रय केंद्र छिनने का खतरा खत्म
पहले विभाग भुगतान में पिछड़ने वाली मिलों के सेंटर काटकर 30 से 40 किलोमीटर दूर स्थित मिलों को दे देता था। इससे किसानों को अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली से दूर जाना पड़ता था या सड़क पर घंटों जाम झेलना पड़ता था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद किसानों का गन्ना उनके पारंपरिक नजदीकी क्रय केंद्र पर ही तौला जाएगा।
2. मिलें बीच सत्र में ‘नो केन’ (No Cane) होकर बंद नहीं होंगी
जब मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिलता तो वे पेराई के चरम दिनों (दिसंबर-जनवरी) में ‘नो केन’ का बोर्ड लगाकर पेराई रोक देती थीं। इससे किसानों की पर्चियां लैप्स हो जाती थीं और खेतों में गन्ना खड़ा रह जाता था। अब पूरी क्षमता का गन्ना मिलने से मिलें लगातार 24 घंटे फुल स्पीड में चलेंगी।
3. गेहूं की समय पर बुवाई संभव होगी
पश्चिमी और मध्य यूपी में किसान गन्ने की पेड़ी (Ratoon) की कटाई करके समय पर रबी गेहूं की बुवाई करते हैं। मिलों के सुचारू संचालन से किसानों को 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच समय पर पर्चियां मिलेंगी और खेत समय पर खाली हो सकेंगे।
4. कोल्हू-क्रशर पर औने-पौने दाम में बेचने की मजबूरी नहीं
जब मिलों का कोटा कट जाता था तो अतिरिक्त गन्ना किसान मजबूरी में स्थानीय कोल्हू और खांडसारी इकाइयों को ₹220 से ₹250 प्रति क्विंटल की घाटे की दर पर बेचते थे। अब पूरा गन्ना वैध सरकारी SAP दर (₹370-₹400 संभावित) पर मिल को जाएगा।
💰 ₹1,936 करोड़ के बकाया भुगतान पर भी कोर्ट का रुख सख्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जहां एक तरफ मिलों को उनके अधिकार के तहत पूरा गन्ना आवंटित करने का आदेश दिया, वहीं दूसरी तरफ किसानों के बकाया गन्ना भुगतान को लेकर भी गन्ना आयुक्त को कड़ी चेतावनी दी है:
- प्रदेश में विभिन्न निजी चीनी मिलों पर अभी भी लगभग ₹1,936 करोड़ का बकाया लंबित है।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मिलों को गन्ना मिलना चाहिए, लेकिन मिल मालिकों को 14 दिन के अंदर किसानों के खातों में भुगतान भेजना होगा।
- यदि कोई मिल समय पर भुगतान नहीं करती है तो जिला प्रशासन और गन्ना विभाग उसके चीनी, शीरा और एथेनॉल के एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) के 85% हिस्से से सीधे किसानों के बैंक खातों में आरटीजीएस (RTGS) कराने की वैधानिक कार्रवाई करे।
📋 नया पेराई सत्र 2026-27: गन्ना आयुक्त कार्यालय की आगामी तैयारी
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद लखनऊ स्थित गन्ना आयुक्त मुख्यालय में बैठकों का दौर तेज हो गया है:
- 15 सितंबर 2026 तक सभी जनपदों में सट्टा प्रदर्शन व सर्वे आपत्ति निस्तारण का काम पूरा किया जा रहा है।
- इसके तुरंत बाद 20 सितंबर से प्रत्येक चीनी मिल के क्रय केंद्रों और आरक्षित ग्रामों का अंतिम ‘केन रिजर्वेशन ऑर्डर’ (Cane Reservation Order 2026-27) जारी किया जाएगा।
- गन्ना आयुक्त द्वारा सभी उप गन्ना आयुक्तों (Dy Cane Commissioners) और जिला गन्ना अधिकारियों (DCOs) को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत किसी भी मिल की स्थापित पेराई क्षमता की अनदेखी न की जाए।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्र. 1: क्या इस फैसले से डिफाल्टर मिलों पर कोई ढिलाई होगी?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बकाए की वसूली चीनी स्टॉक जब्त करके या आरसी जारी करके की जानी चाहिए, न कि मिल की पेराई क्षमता का गन्ना काटकर। इससे मिल चालू रहेगी और किसान का भुगतान भी सुनिश्चित होगा।
प्र. 2: हमारे गांव का गन्ना क्रय केंद्र किस मिल को मिलेगा, यह कैसे पता चलेगा?
उत्तर: गन्ना विभाग द्वारा 25 सितंबर तक सभी समितियों में ‘आरक्षण आदेश’ (Reservation Order) चस्पा किया जाएगा। इसके अलावा किसान भाई caneup.in पोर्टल या अपने eGanna App पर अपना किसान कोड डालकर आवंटित मिल और क्रय केंद्र की स्थिति लाइव देख सकते हैं।
प्र. 3: यदि हमारे क्षेत्र का क्रय केंद्र बदल दिया गया है तो आपत्ति कैसे दर्ज करें?
उत्तर: 15 सितंबर 2026 तक किसान अपनी संबंधित सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव या जिला गन्ना अधिकारी (DCO) कार्यालय में लिखित प्रत्यावेदन दे सकते हैं।
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