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15 नवंबर से अंबेडकरनगर में पहली बार मशीन से कटेगा गन्ना, 7 दिन में भुगतान का वादा — पर्ची एक हफ्ते पहले मिलेगी

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 1, 2026 • 6 min read
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15 नवंबर से अंबेडकरनगर में पहली बार मशीन से कटेगा गन्ना, 7 दिन में भुगतान का वादा — पर्ची एक हफ्ते पहले मिलेगी
अंतिम अपडेट: November 1, 2026 11:46 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

अंबेडकरनगर जिले के गन्ना किसानों के लिए इस बार का पेराई सत्र कुछ अलग होने वाला है। अकबरपुर चीनी मिल मिझौड़ा में 15 नवंबर 2026 से गन्ने की पेराई शुरू होगी, और इसी सत्र में जिले में पहली बार केन हार्वेस्टर मशीन से गन्ने की कटाई कराई जाएगी। मिल प्रबंधन ने पेराई से लगभग एक हफ्ते पहले पर्ची देने और गन्ना आपूर्ति के एक सप्ताह के भीतर भुगतान करने का दावा भी किया है। दीपावली के बाद किसानों का गन्ना मिल तक पहुंचना शुरू हो जाएगा, इसलिए पर्ची, कटाई और ढुलाई की तैयारी का यही सही समय है। इस लेख में पेराई की तारीख, हार्वेस्टर की बुकिंग, पर्ची की व्यवस्था, भुगतान के दावे की हकीकत और किसानों की मांगें साफ-साफ दी गई हैं।

15 नवंबर से शुरू होगा पेराई सत्र

अकबरपुर चीनी मिल मिझौड़ा के सहायक महाप्रबंधक कैलाश चौधरी के अनुसार, मिल में 15 नवंबर से पेराई कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए मिल परिसर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। पेराई शुरू होने से पहले किसानों को गन्ना आपूर्ति की पर्चियां जारी की जाएंगी, ताकि मिल में गन्ने की नियमित आपूर्ति बनी रहे और किसानों को अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े। सर्वे और सट्टा के अभिलेखों के आधार पर पर्ची दी जाएगी, इसलिए किसानों को अपने अभिलेख और पंजीकृत मोबाइल नंबर अभी से जांच लेना चाहिए। पर्ची मिलने के बाद ही कटाई करें।

पर्ची एक हफ्ते पहले, मोबाइल और डाक से सूचना

पर्ची वितरण इस सत्र की सबसे अहम व्यवस्था है। मिल प्रबंधन के अनुसार, पेराई शुरू होने से लगभग एक सप्ताह पहले किसानों को पर्चियां उपलब्ध कराई जाएंगी। किसानों को पर्चियां उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर संदेश के माध्यम से तथा डाक से भेजने की व्यवस्था बताई गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि जिस किसान का मोबाइल नंबर समिति के अभिलेख में गलत या बंद है, उसे पर्ची की सूचना देर से मिल सकती है। इसलिए पर्ची का इंतजार करने से पहले गन्ना समिति में जाकर अपना नंबर, सट्टा विवरण और गांव का अभिलेख पुष्टि करा लें।

जिले में पहली बार केन हार्वेस्टर से कटाई

इस पेराई सत्र की सबसे बड़ी खबर केन हार्वेस्टर है। जिला गन्ना अधिकारी साहब लाल यादव के अनुसार, गन्ना समिति की ओर से एक केन हार्वेस्टर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा, और किसान बुकिंग के आधार पर इसका उपयोग कर सकेंगे। जिले में यह मशीन पहली बार लाई जा रही है। परंपरागत तरीके से गन्ने की कटाई में अधिक समय और श्रम लगता है, खासकर बड़े खेतों में मजदूरों की व्यवस्था करना हर साल की चुनौती बन जाती है। हार्वेस्टर से कई एकड़ गन्ने की कटाई कुछ ही घंटों में होने की उम्मीद जताई गई है, जिससे समय और मजदूरी दोनों की बचत हो सकती है।

हार्वेस्टर की बुकिंग में क्या ध्यान रखें

हार्वेस्टर की सबसे बड़ी सीमा यह है कि शुरुआत में केवल एक मशीन उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि जिले में गन्ने की खेती हजारों हेक्टेयर में फैली है। इसलिए बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के हिसाब से भर सकती है। इच्छुक किसान गन्ना समिति से अभी से बुकिंग की प्रक्रिया, शुल्क, तारीख और खेत की शर्तें पूछ लें। मशीन की वास्तविक कार्यक्षमता खेत की स्थिति, गन्ने की किस्म और जमीन की बनावट पर निर्भर करेगी। गीले, ऊबड़-खाबड़ या बहुत छोटे टुकड़ों वाले खेत में मशीन हर जगह नहीं चल पाएगी।

29,572 हेक्टेयर में गन्ना, 3,000 से अधिक किसान

अंबेडकरनगर जिले में गन्ना एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में करीब 29,572 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है, जिससे 3,000 से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिलता है। समय पर पेराई शुरू होने से किसानों को फसल बेचने की योजना बनाने में आसानी होगी, खासकर उन किसानों के लिए जिन्हें गन्ने की कटाई के बाद खेत खाली करके दूसरी फसल की बुवाई करनी है। पेराई में देरी का मतलब है रबी बुवाई में देरी, इसलिए 15 नवंबर की तारीख जिले के किसानों के लिए राहत की खबर है।

7 दिन में भुगतान का दावा — वादा और हकीकत में फर्क समझें

मिझौड़ा चीनी मिल के सहायक महाप्रबंधक कैलाश चौधरी ने बताया है कि किसानों को गन्ना आपूर्ति के एक सप्ताह के भीतर भुगतान किए जाने की योजना है। यदि यह व्यवस्था निर्धारित समय पर लागू होती है, तो किसानों को खाद, बीज और घरेलू खर्च के लिए तुरंत पैसा मिल सकेगा। लेकिन एक बात साफ समझ लें: सात दिन में भुगतान की बात फिलहाल मिल प्रबंधन का आश्वासन है, पेराई शुरू होने के बाद ही वास्तविक भुगतान की स्थिति स्पष्ट होगी। भुगतान में देरी हो तो तौल रसीद संभालकर रखें और गन्ना समिति तथा जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। सत्यापित हेल्पलाइन: टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129, एसएमएस शॉर्टकोड 51969। पर्ची, बैंक खाता या ओटीपी किसी अनजान नंबर पर साझा न करें।

गन्ना भाव को लेकर अभी क्या स्थिति है

पेराई की तारीख तय हो गई है, लेकिन 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती का मूल्य 400 रुपये और पछेती का 390 रुपये प्रति क्विंटल था — ये पिछले सत्र के आंकड़े हैं, इस सत्र के नहीं। सरकार की अधिसूचना आने तक किसी अटकल को पक्का भाव न मानें, और तौल रसीद पर भाव तथा वजन दोनों की जांच करें।

किसानों की मांग: पर्ची व्यवस्था और जाम से राहत

पेराई से पहले किसानों ने पर्ची वितरण की व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग भी उठाई है। भीटी क्षेत्र के काही गांव निवासी किसान वीरेंद्र यादव ने बताया कि मिझौड़ा चीनी मिल से किसानों को काफी सहूलियत मिलती है, लेकिन पर्चियां समय पर मिलने से गन्ने की बिक्री और अधिक आसान हो सकती है। उन्होंने कहा कि पर्ची व्यवस्था अच्छी होने पर किसान गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित होंगे। वहीं, चंदौका के किसान विजय दुबे ने दिसंबर और जनवरी में पर्चियों की समस्या तथा सड़कों पर लगने वाले जाम की ओर ध्यान दिलाया।

आपके सवाल

प्रश्न: अंबेडकरनगर की अकबरपुर मिल में पेराई कब शुरू होगी? उत्तर: अकबरपुर चीनी मिल मिझौड़ा में 15 नवंबर 2026 से पेराई शुरू होगी। दीपावली के बाद किसानों का गन्ना मिल तक पहुंचना शुरू हो जाएगा।

प्रश्न: केन हार्वेस्टर से कटाई कैसे होगी? उत्तर: जिले में पहली बार गन्ना समिति एक केन हार्वेस्टर उपलब्ध कराएगी। किसान बुकिंग के आधार पर इसका उपयोग कर सकेंगे। कई एकड़ गन्ने की कटाई कुछ ही घंटों में होने की उम्मीद है।

प्रश्न: गन्ने की पर्ची कब और कैसे मिलेगी? उत्तर: पेराई से लगभग एक सप्ताह पहले पर्ची दी जाएगी। पर्ची पंजीकृत मोबाइल नंबर पर संदेश से और डाक के माध्यम से भेजने की व्यवस्था बताई गई है। सर्वे और सट्टा के अनुसार पर्ची मिलेगी।

प्रश्न: गन्ने का भुगतान कितने दिन में होगा? उत्तर: मिल प्रबंधन ने एक सप्ताह के भीतर भुगतान का दावा किया है। यह अभी आश्वासन है, वास्तविक स्थिति पेराई शुरू होने के बाद स्पष्ट होगी। देरी हो तो समिति और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें।

प्रश्न: 2026-27 का गन्ना एसएपी घोषित हो गया है क्या? उत्तर: नहीं, 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र का भाव अगेती के लिए 400 रुपये और पछेती के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था। इसे इस सत्र का भाव न मानें।

स्रोत: दैनिक जागरण (31 अक्टूबर 2026), जनता सेरिश्ता

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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