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₹600 भाव नहीं मिला तो 25 अक्टूबर को गन्ना जलाएंगे किसान: अमरोहा महापंचायत का अल्टीमेटम, सरकार पर दबाव बढ़ा

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 5, 2026 • 6 min read
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₹600 भाव नहीं मिला तो 25 अक्टूबर को गन्ना जलाएंगे किसान: अमरोहा महापंचायत का अल्टीमेटम, सरकार पर दबाव बढ़ा
अंतिम अपडेट: October 5, 2026 12:15 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पेराई सीजन शुरू होने से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों ने सरकार को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है — या तो गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल घोषित करो, या फिर आंदोलन के लिए तैयार रहो। अमरोहा में हुई भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत में संगठन ने 20 अक्टूबर तक गन्ना मूल्य घोषित करने की डेडलाइन दी है, और साफ कहा है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो 25 अक्टूबर को किसान गन्ना जलाकर विरोध जताएंगे। पश्चिमी यूपी में मिलों के 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी के बीच यह चेतावनी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

अमरोहा महापंचायत: 20 अक्टूबर की डेडलाइन, 25 को गन्ना जलाओ

भारतीय किसान यूनियन (चौधरी कर्तार सिंह गुट) की ओर से अमरोहा में अटारसी पुल के नीचे नेशनल हाईवे पर हुई महापंचायत में गन्ना मूल्य ही सबसे बड़ा मुद्दा रहा। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी महावीर सिंह ने मंच से कहा कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल तय होना चाहिए और यह घोषणा मिलें चलने से पहले ही हो जानी चाहिए। उनकी चेतावनी सीधी थी — अगर 20 अक्टूबर तक भाव घोषित नहीं हुआ तो 25 अक्टूबर को किसान गन्ना जलाकर आंदोलन करेंगे।

पंचायत की अध्यक्षता चौधरी पतराम सिंह ने की और संचालन युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी जगदीश सिंह ने किया। शाम चार बजे तक चली इस महापंचायत में जिला गन्ना अधिकारी समेत कई विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं के जल्द समाधान का आश्वासन तो दिया, लेकिन भाव को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

महापंचायत में गन्ने के अलावा महा कॉरिडोर परियोजना रद्द करने, गंगा एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित जमीन का बाजार भाव का चार गुना मुआवजा और दूध उत्पादकों के भाव बढ़ाने की मांग भी उठी। किसान नेताओं ने साफ कहा कि तय समय में मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

बुलंदशहर और मुजफ्फरनगर: हर मोर्चे पर एक ही मांग — 600 रुपये

अमरोहा अकेला नहीं है। बुलंदशहर के औरंगाबाद में 1 अक्टूबर को हुई भाकियू टिकैत की पंचायत में भी प्रदेश मुख्य महासचिव गुड्डू प्रधान ने गन्ना मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल और 20 अक्टूबर तक गन्ना सत्र शुरू करने की मांग रखी। किसानों ने आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा और समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

उधर मुजफ्फरनगर में हुई किसान-मजदूर महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने भी ₹600 प्रति क्विंटल की मांग दोहराई और कहा कि मिलों का नया पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही भाव घोषित होना चाहिए, ताकि किसानों में असमंजस न रहे।

यानी तस्वीर साफ है — अमरोहा, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, हापुड़ — हर जिले में किसान संगठन एक सुर में ₹600 प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं और सबकी शर्त एक ही है: भाव की घोषणा पेराई शुरू होने से पहले हो।

2026-27 का SAP अभी घोषित क्यों नहीं हुआ? जानिए FRP और SAP का अंतर

यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सीजन के लिए गन्ने का एफआरपी — उचित और लाभकारी मूल्य — ₹365 प्रति क्विंटल तय कर दिया है (मई 2026 में कैबिनेट समिति का फैसला, बुनियादी रिकवरी 10.25 प्रतिशत)। रिकवरी इससे ज्यादा होने पर ₹3.56 प्रति क्विंटल प्रीमियम मिलेगा, और 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी पर भी न्यूनतम ₹338.3 मिलेगा।

लेकिन एफआरपी न्यूनतम भाव है, जो पूरे देश में लागू होता है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्य इसके ऊपर अपना राज्य सलाहकार मूल्य — SAP — घोषित करते हैं। यूपी में पिछले सीजन (2025-26) में SAP अगेती किस्म के लिए ₹400, सामान्य के लिए ₹390 और अनुपयुक्त किस्म के लिए ₹355 प्रति क्विंटल था। 2026-27 सीजन का SAP अभी घोषित नहीं हुआ है — और किसान संगठनों की सारी लड़ाई इसी घोषणा को लेकर है। यही वजह है कि हर पंचायत में “पेराई से पहले भाव घोषित करो” की मांग गूंज रही है।

किसानों का गणित: लागत ₹392, मांग ₹600

किसानों का कहना है कि ₹600 की मांग हवा में नहीं है, इसके पीछे ठोस गणित है। राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने शाहजहांपुर स्थित उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि गन्ना उत्पादन की लागत करीब ₹392 प्रति क्विंटल पहुंच गई है। डीजल, बीज, उर्वरक, कीटनाशक और मजदूरी — हर मद में खर्च बढ़ा है। ऐसे में पुराने भाव पर गन्ना बेचना किसानों को घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

दूसरी तरफ चीनी के भाव आसमान छू रहे हैं — थोक भाव करीब ₹4,800 और खुदरा ₹5,400 प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका है। एथनॉल और सह-उत्पादों से मिलों की कमाई भी बढ़ी है। किसानों का तर्क है कि इस कमाई का हिस्सा उन्हें भी मिलना चाहिए।

आगे क्या: 20 और 25 अक्टूबर की तारीखें अहम

अब सबकी नजर दो तारीखों पर है। पश्चिमी यूपी की चीनी मिलें करीब 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं — पिछले साल से करीब 10 दिन पहले। सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के मुताबिक यूपी में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से 71 से ज्यादा पश्चिमी यूपी में हैं। मिलों में बॉयलर पूजन और स्टीम ट्रायल का काम अक्टूबर के पहले हफ्ते तक पूरा करने का लक्ष्य है।

लेकिन भाव की घोषणा न हुई तो 20 अक्टूबर की डेडलाइन और 25 अक्टूबर के आंदोलन की चेतावनी पेराई की शुरुआत पर भारी पड़ सकती है। 2027 में विधानसभा चुनाव भी है, ऐसे में सरकार पर किसानों की मांग मानने का सियासी दबाव भी है।

किसानों के लिए जरूरी काम: पेराई से पहले यह जांच जरूर करें

भाव की लड़ाई अपनी जगह, लेकिन पेराई शुरू होने से पहले हर गन्ना किसान को कुछ जरूरी काम निपटा लेने चाहिए, ताकि भुगतान में देरी न हो। गन्ना विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने गन्ना सर्वेक्षण रिकॉर्ड — रकबा और किस्म का ब्योरा — सत्यापित कर लें। बैंक खाता सक्रिय होना चाहिए और उसमें जरूरी पहचान दस्तावेज जुड़े होने चाहिए, वरना भुगतान अटक सकता है।

इसके अलावा, जिन किसानों ने गन्ना समिति की सदस्यता नहीं ली है या उपज बढ़ोतरी का आवेदन नहीं किया है, उनके लिए अंतिम तारीख 10 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। 30 सितंबर की पुरानी डेडलाइन से चूकने वाले किसान अब भी सदस्य बनकर इस सीजन में मिलों को गन्ना आपूर्ति कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: गन्ने का ₹600 भाव किसने मांगा है? उत्तर: अमरोहा महापंचायत में भाकियू (चौधरी कर्तार सिंह गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी महावीर सिंह, मुजफ्फरनगर में चौधरी नरेश टिकैत और बुलंदशहर में भाकियू टिकैत के नेताओं ने ₹600 प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग रखी है।

प्रश्न: 20 अक्टूबर और 25 अक्टूबर की तारीखों का क्या मतलब है? उत्तर: किसान संगठनों ने 20 अक्टूबर तक गन्ना मूल्य घोषित करने की डेडलाइन दी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 25 अक्टूबर को किसान गन्ना जलाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

प्रश्न: 2026-27 सीजन का SAP घोषित हुआ है क्या? उत्तर: नहीं। केंद्र ने एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय कर दिया है, लेकिन यूपी सरकार ने 2026-27 का SAP अभी घोषित नहीं किया है। पिछले सीजन में SAP अगेती के लिए ₹400 प्रति क्विंटल था।

प्रश्न: गन्ना समिति की सदस्यता की आखिरी तारीख क्या है? उत्तर: पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना समिति की सदस्यता और उपज बढ़ोतरी आवेदन की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।

स्रोत: चीनीमंडी (हिंदुस्तान), लाइव हिंदुस्तान, द टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिंदू, बिजनेस स्टैंडर्ड

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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