शरदकालीन गन्ने के साथ सरसों की सहफसली खेती — प्रति एकड़ ₹42,000 का अतिरिक्त मुनाफा, वैज्ञानिकों की गाइड

मेरठ / शाहजहांपुर (CaneUp एग्रो एडवाइजरी — 8 सितंबर, सुबह 7:30 बजे): सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SVPUAT), मेरठ और यूपी गन्ना अनुसंधान परिषद शाहजहांपुर के संयुक्त फसल अनुसंधान दल ने गन्ना किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए ‘शरदकालीन ट्रेंच गन्ना + सरसों सहफसली खेती मॉडल 2026’ का विस्तृत वैज्ञानिक पैकेज जारी किया है।
वैज्ञानिक परीक्षणों में सिद्ध हुआ है कि सितंबर-अक्टूबर में 4 से 5 फीट की दूरी पर ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करके दो लाइनों के बीच खाली बची जमीन में पीली या काली सरसों की बुवाई करने से गन्ने की पैदावार पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता, बल्कि किसान को मात्र 110 दिनों में प्रति एकड़ ₹38,000 से ₹42,000 का शुद्ध अतिरिक्त मुनाफा प्राप्त होता है।
🌾 सहफसली मॉडल का आर्थिक गणित (Cost vs Income Breakdown)
| मद | पारंपरिक केवल गन्ना (प्रति एकड़) | ट्रेंच गन्ना + सरसों सहफसल (प्रति एकड़) | शुद्ध लाभ अंतर |
|---|---|---|---|
| गन्ने की पैदावार | 420 क्विंटल | 480 क्विंटल (ट्रेंच से 15% अधिक) | +60 क्विंटल गन्ना |
| सरसों की पैदावार | शून्य | 6 से 7 क्विंटल (पूसा सरसों) | +6.5 क्विंटल सरसों |
| सरसों से सकल आय (MSP ₹5,650) | शून्य | ₹36,700 से ₹40,000 | सीधी नकद आमदनी |
| खरपतवार नियंत्रण बचत | ₹4,000 मजदूरी खर्च | सरसों की पत्तियों से खरपतवार खुद दब जाती है | ₹4,000 बचत |
| कुल शुद्ध अतिरिक्त आय | सामान्य | — | +₹42,000 प्रति एकड़ |
🧪 सफल सहफसली खेती के 4 वैज्ञानिक स्वर्णिम नियम
- उपयुक्त किस्मों का चयन: गन्ने के लिए Co-0118 या Co-15023 चुनें और सरसों के लिए कम फैलाव वाली व 105-115 दिनों में पकने वाली किस्में — पूसा जय किसान (Bio-902), पूसा तारक या गिरिराज का प्रयोग करें।
- लाइन से लाइन की दूरी: ट्रेंच बनाते समय दो नालियों के बीच कम से कम 4.5 फीट (135 सेमी) का फासला रखें। नाली में गन्ना बोएं और दोनों नालियों के बीच उठे हुए मेड़ (Bed) पर सरसों की 2 लाइनें 30 सेमी की दूरी पर बोएं।
- सिंचाई प्रबंधन: पहली सिंचाई गन्ने की नाली में दें। सरसों को अलग से पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती, वह गन्ने की नाली की नमी से ही तेजी से बढ़ जाती है।
- कीट-रोग मुक्त सुरक्षा: सरसों के पौधों पर एफिड (माहू) का प्रकोप रोकने के लिए 45 दिन बाद इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid) का हल्का छिड़काव करें। जनवरी के अंत तक सरसों कटकर खेत पूरी तरह खाली हो जाता है और फरवरी में गन्ने के कल्ले फूटने के लिए पूरी धूप मिलने लगती है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक न केवल गन्ने में लागत को शून्य कर देती है, बल्कि देश में खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में भी क्रांतिकारी भूमिका निभा रही है।
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