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शरद बुवाई में सह-फसली खेती से डबल मुनाफा — सरसों और आलू के साथ गन्ने की वैज्ञानिक बुवाई गाइड

Randhir Patil Randhir Patil Sep 4, 2026 3 min read
शरद बुवाई में सह-फसली खेती से डबल मुनाफा — सरसों और आलू के साथ गन्ने की वैज्ञानिक बुवाई गाइड
अंतिम अपडेट: September 4, 2026 9:15 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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शाहजहांपुर / मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश में 15 सितंबर 2026 से शुरू होने जा रही व्यापक शरदकालीन गन्ना बुवाई सीजन के मद्देनजर यूपी गन्ना शोध परिषद (UPCSR), शाहजहांपुर ने प्रदेश के किसानों की प्रति एकड़ आय को दोगुना करने के लिए ‘गन्ना सह-फसली खेती वैज्ञानिक प्रबंधन गाइडलाइन’ जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि पारंपरिक 2.5 फीट की दूरी पर केवल गन्ना बोने के बजाय यदि किसान ट्रेंच विधि से 4.5 से 5 फीट की दूरी पर गन्ने की बुवाई करें और दो कतारों के बीच की खाली जमीन पर सरसों, आलू, मटर या लहसुन की अंतःफसली खेती करें, तो मुख्य गन्ना तैयार होने से पहले ही मात्र 90 से 100 दिनों में किसान को ₹40,000 से ₹50,000 प्रति एकड़ की अतिरिक्त नकद आमदनी प्राप्त हो सकती है।

गन्ना शोध परिषद के निदेशक ने बताया कि शरद ऋतु में गन्ने के जमाव के बाद शुरुआती 90 दिनों तक पौधे की बढ़वार धीमी रहती है। इस अवधि में खाली पड़ी जमीन में खरपतवार उगने के बजाय यदि कम अवधि वाली सह-फसलें ली जाएं, तो खेत की उर्वरा शक्ति और पानी की उपयोग दक्षता में 40% तक का सुधार होता है।

गन्ने के साथ सरसों और आलू की वैज्ञानिक बुवाई का मॉडल

शोध परिषद द्वारा अनुशंसित प्रमुख सह-फसली मॉडलों का विवरण निम्नलिखित है:

मुख्य सह-फसलअनुशंसित प्रजातियांबुवाई का सही समयपकने की अवधिप्रति एकड़ अतिरिक्त शुद्ध लाभ
सरसों (Mustard)पूसा बोल्ड, पूसा मस्टर्ड-31, आरएच-74920 सितंबर से 15 अक्टूबर100 - 110 दिन₹35,000 - ₹42,000
आलू (Potato)कुफरी पुखराज, कुफरी ख्याति, चिपसोना-11 अक्टूबर से 25 अक्टूबर80 - 90 दिन₹45,000 - ₹55,000
मटर (Field Pea)काशी नंदिनी, पूसा प्रभात, जीएस-1025 सितंबर से 20 अक्टूबर65 - 75 दिन (हरी फली)₹30,000 - ₹38,000
लहसुन/प्याजयमुना सफेद (जी-50), पूसा रेड15 अक्टूबर से 5 नवंबर120 - 130 दिन₹50,000 - ₹65,000

ट्रेंच बुवाई के 4 सुनहरे वैज्ञानिक नियम

  1. कतार से कतार की दूरी 4.5 फीट: ट्रेंच ओपनर की मदद से कतारों की दूरी कम से कम 135 सेमी रखें और नाली की गहराई 30 सेमी रखें।
  2. नाली में गन्ना, मेड़ पर सह-फसल: गन्ने के दो-दो आंख वाले टुकड़ों को नाली की तली में 2 इंच मिट्टी से ढककर बोएं, जबकि ऊंची उठी हुई मेड़ों (Beds) पर सरसों या आलू की बुवाई करें।
  3. खाद का पृथक प्रबंधन: गन्ने की बेसल खाद नाली में दें और सह-फसल के लिए आवश्यक फास्फोरस व पोटाश मेड़ की मिट्टी में मिलाएं।
  4. पानी की 50% बचत: सिंचाई केवल नाली में करें। नाली में पानी भरने से मेड़ पर लगी सह-फसल को स्वतः सीपेज (नमी) मिल जाती है, जिससे अतिरिक्त पानी नहीं लगाना पड़ता।

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि सरसों और मटर जैसी दलहनी फसलों की जड़ें हवा से नाइट्रोजन सोखकर मिट्टी में स्थिर करती हैं, जिससे मुख्य गन्ने की फसल को प्राकृतिक खाद मिलती है और पैदावार में 15% की वृद्धि दर्ज की जाती है।

बीज शोधन का कड़ाई से पालन

शोध परिषद ने चेतावनी दी है कि गन्ने के टुकड़ों को बाविस्टिन (कार्बेंडाजिम) 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल में 15 मिनट तक डुबोकर ही बोएं। सह-फसलों के बीज को भी थीरम या कैप्टन से उपचारित करना अनिवार्य है ताकि मिट्टी जनित फंगस का कोई खतरा न रहे।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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