गन्ने के साथ सरसों की ट्रेंच बुवाई — पश्चिमी UP के किसानों के लिए 90 दिन में ₹40,000 अतिरिक्त कमाई का वैज्ञानिक फॉर्मूला!

मुख्य बिंदु (Quick Summary): शरदकालीन गन्ना बुवाई में यदि किसान 4.5 फीट की दूरी पर ट्रेंच विधि से गन्ना बोएं और मेड़ों पर पूसा-31 सरसों लगाएं, तो मुख्य गन्ना तैयार होने से पहले मात्र 90 से 100 दिनों में प्रति एकड़ ₹40,000 का अतिरिक्त शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं। इससे गन्ने की खाद और जुताई की पूरी लागत सरसों से ही निकल जाती है।
मुजफ्फरनगर / मेरठ / बिजनौर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए 15 सितंबर से शुरू हो रहा शरदकालीन बुवाई का मौसम अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने का सबसे सुनहरा अवसर लेकर आया है। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) मुजफ्फरनगर और यूपी गन्ना शोध परिषद ने किसानों को पारंपरिक बुवाई छोड़कर ‘ट्रेंच विधि से गन्ना + पूसा-31 सरसों सह-फसली मॉडल’ अपनाने की सलाह दी है।
कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार, शरद ऋतु में गन्ने का जमाव होने के बाद शुरुआती 3 महीने तक पौधे की बढ़वार धीमी रहती है। इस दौरान 4.5 फीट की खाली जमीन पर कम समय में पकने वाली सरसों लगाकर किसान प्रति एकड़ 8 से 10 क्विंटल सरसों की पैदावार लेकर ₹40,000 से ₹45,000 का शुद्ध नकद लाभ कमा सकते हैं।
ट्रेंच सह-फसली खेती का वैज्ञानिक गणित और लागत-लाभ विश्लेषण
| मद / विवरण | पारंपरिक केवल गन्ना खेती | ट्रेंच गन्ना + सरसों सह-फसली खेती |
|---|---|---|
| कतार से कतार की दूरी | 2.5 फीट (75 सेमी) | 4.5 फीट (135 सेमी) |
| गन्ने की पैदावार | 380 - 420 क्विंटल/एकड़ | 480 - 520 क्विंटल/एकड़ (+25%) |
| सह-फसल पैदावार | शून्य | 8 - 10 क्विंटल सरसों/एकड़ |
| सरसों से अतिरिक्त आय | ₹0 | ₹40,000 - ₹45,000 (बाजार भाव ₹5,200/कुंतल) |
| सिंचाई जल की बचत | मानक खपत | 45% पानी की सीधी बचत |
| शुद्ध प्रति एकड़ लाभ | ₹1.10 लाख | ₹1.65 लाख (डबल मुनाफा) |
बुवाई के 4 प्रमुख व्यावहारिक नियम
- ट्रेंच ओपनर से 30 सेमी गहरी नाली बनाएं: दो नालियों के बीच की दूरी 135 सेमी रखें।
- नाली में गन्ना, मेड़ पर सरसों: गन्ने के दो आंख वाले उपचारित टुकड़ों को नाली की तली में 2 इंच मिट्टी से ढकें। ऊंची उठी हुई मेड़ों (Beds) पर 1.5 किग्रा प्रति एकड़ की दर से पूसा मस्टर्ड-31 या आरएच-749 सरसों बोएं।
- सिंचाई प्रबंधन: पानी केवल नाली में लगाएं। नाली में नमी भरने से मेड़ पर लगी सरसों को स्वतः सीपेज मिल जाती है, जिससे सरसों के तने नहीं गलते।
- सरसों कटाई के बाद हरी खाद: 90 दिन बाद जनवरी में सरसों काटने के बाद उसकी बची हुई पत्तियां नाली में डालकर गन्ने की जड़ों पर मिट्टी चढ़ा दें, जिससे जैविक कार्बन स्वतः बढ़ जाता है।
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