5 अक्टूबर की आंधी-ओलावृष्टि ने आजमगढ़ में गन्ना-धान तबाह किया: किसान बोले — गिरे गन्ने की तौल में छूट और तत्काल मुआवजा दो

5 अक्टूबर की दोपहर आजमगढ़ में जो आंधी आई, उसने कर्ज लेकर खड़ी की गई फसल को घंटों में तबाह कर दिया। बूढ़नपुर और अहरौला इलाकों में ओले गिरे, तेज हवाओं में पेड़ उखड़ गए, टिनशेड उड़ गए और कई क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति घंटों तक ठप रही। सबसे बड़ी मार खेतों पर पड़ी — पककर तैयार धान की फसल गिरकर जमीन पकड़ गई और कई जगह गन्ना भी खेत में गिर गया। एक हफ्ते बाद अब किसान संगठन मैदान में उतर आए हैं और सरकार से साफ मांग कर रहे हैं: गिरे गन्ने की तौल में छूट दो, फसल क्षति का तत्काल संयुक्त सर्वे कराओ और मुआवजा दिलाओ।
5-6 अक्टूबर को क्या-क्या हुआ
हिंदुस्तान की 5 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार अपराह्न करीब 3 बजे जिले में अचानक मौसम बदला। देखते ही देखते तेज आंधी के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। बूढ़नपुर और अहरौला इलाकों में ओले भी गिरे। करीब पौन घंटे चली इस तेज बारिश ने नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक जलजमाव कर दिया।
नुकसान का ब्योरा चौंकाने वाला रहा। रानी की सराय में पेड़ गिरने से हाईटेंशन लाइन का पोल क्षतिग्रस्त हुआ और क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप हो गई — सूचना के दो घंटे बाद भी बिजली कर्मचारी नहीं पहुंचे। पवई और बरदह में दर्जन भर लोगों की मड़ई और टीनशेड उड़ गए। मार्टीनगंज में कुशलगांव मार्ग पर पेड़ गिरने से आवागमन बाधित हुआ, जहानागंज में आजमगढ़-गाजीपुर मुख्य मार्ग पर समेंदा बाजार के पास पेड़ गिरा। लालगंज और सगड़ी तहसील क्षेत्रों में भी आंधी के साथ बारिश हुई, कई स्थानों पर मड़ई, छप्पर और टिनशेड उड़े।
गन्ने की फसल को सबसे गंभीर नुकसान
खबरों के अनुसार, कई जगहों पर तेज हवा से धान और गन्ने की फसल खेत में गिर गई। सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव और पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव ने कहा कि पहले हुई बारिश के बाद अब तेज आंधी और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
गन्ना किसानों के लिए यह नुकसान दोहरा है। तेज तूफान में गन्ना गिरकर जमीन पकड़ लेने से उसकी बढ़वार (ग्रोथ) और चीनी परता (रिकवरी) दोनों प्रभावित होती हैं — और पेराई शुरू होने पर मिलों में ऐसे गन्ने की घटतौली का खतरा भी बढ़ जाता है। यानी फसल गिरने के बाद किसान को भाव की मार अलग से झेलनी पड़ती है। धान के मामले में पककर तैयार अगेती फसल जमीन पकड़ गई, कई जगह ओले पड़ने से दाने झड़ गए। सब्जी की फसलें — लौकी, नेनुआ, भिंडी, बैगन, टमाटर — तो कई जगह पूरी तरह नष्ट हो गईं।
किसान संगठनों की 5 बड़ी मांगें
किसान नेताओं ने सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं:
- राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम से तत्काल फसल क्षति का सर्वे कराया जाए।
- सर्वे में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके।
- प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा राशि दी जाए।
- फसल बीमा का लाभ बिना किसी अड़चन के दिया जाए।
- गन्ना किसानों को खेत में गिरे गन्ने की तौल में आवश्यक छूट दी जाए।
किसान नेताओं ने चेतावनी भी दी है कि अगर समय रहते सर्वे और मुआवजे की कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो किसान संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
गिरे गन्ने की तौल में छूट की मांग क्यों अहम है
यह मांग पहली नजर में तकनीकी लग सकती है, लेकिन किसान की जेब से सीधे जुड़ी है। जब गन्ना आंधी में गिर जाता है, तो उसकी सफाई, छिलाई और बंधाई में अतिरिक्त मेहनत और खर्च आता है। गिरे गन्ने में कीचड़ और मिट्टी लगने से तौल में घटाव आता है, और चीनी मिलों के क्रय केंद्रों पर इस गन्ने की तौल में कटौती होती है। किसान संगठन चाहते हैं कि आपदा के कारण गिरे गन्ने पर यह कटौती न हो — क्योंकि इसमें किसान की कोई गलती नहीं है।
डिजिटल सर्वे की समय-सीमा और राहत प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस अक्टूबर में बारिश-बाढ़ से प्रभावित फसलों के लिए डिजिटल फसल क्षति सर्वे की व्यवस्था की है, जिसकी विस्तृत जानकारी हमारी 12 अक्टूबर की गाइड रिपोर्ट में दी गई है। राहत पोर्टल पर क्षति की फीडिंग होती है और जिला स्तर पर सत्यापन कराया जाता है।
आजमगढ़ के प्रभावित किसानों के लिए सबसे जरूरी कदम यही है — अपनी फसल क्षति का ब्योरा पटवारी और कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारियों तक पहुंचाएं, खेत की तस्वीरें और नुकसान का अनुमान तैयार रखें। सर्वे में किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे या नहीं, इस पर अभी फैसला बाकी है, लेकिन संगठन इसे अपनी मांग का अहम हिस्सा बना रहे हैं।
प्रभावित किसान अभी क्या करें
- खेत में गिरी फसल की तारीख-समय वाली तस्वीरें मोबाइल में सुरक्षित रखें — सर्वे और बीमा दावे में ये सबूत काम आएंगे।
- अपने पटवारी, गन्ना समिति और कृषि विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी को नुकसान की लिखित सूचना दें।
- फसल बीमा (प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना) में पंजीकृत किसान 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को नुकसान की सूचना देने का नियम याद रखें।
- गिरे गन्ने की कटाई-ढुलाई में मेहनत का हिसाब रखें — तौल में छूट की मांग उठी है, ऐसे में खर्च का रिकॉर्ड काम आएगा।
- राहत पोर्टल और डिजिटल सर्वे की प्रक्रिया पर नजर बनाए रखें; अफवाहों पर नहीं, आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आजमगढ़ में आंधी-ओलावृष्टि कब आई और कितना नुकसान हुआ? 5 अक्टूबर 2026 की दोपहर करीब 3 बजे आजमगढ़ में तेज आंधी के साथ बारिश हुई और बूढ़नपुर-अहरौला इलाकों में ओले गिरे। धान, गन्ना और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान हुआ। नुकसान का आधिकारिक आकलन अभी सर्वे के बाद ही स्पष्ट होगा।
गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या क्या है? तेज हवा में गिरे गन्ने की बढ़वार और चीनी परता प्रभावित होती है, और मिलों में घटतौली का खतरा बढ़ता है। किसान संगठन गिरे गन्ने की तौल में छूट की मांग कर रहे हैं।
किसान संगठन क्या मांग कर रहे हैं? राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम से तत्काल सर्वे (जिसमें किसान संगठन भी शामिल हों), तत्काल मुआवजा, बिना अड़चन फसल बीमा का लाभ और गिरे गन्ने की तौल में छूट।
फसल क्षति का मुआवजा कैसे मिलेगा? उत्तर प्रदेश में डिजिटल फसल क्षति सर्वे और राहत पोर्टल की व्यवस्था है। नुकसान की सूचना स्थानीय प्रशासन को दें और ब्योरा फीड कराएं। विस्तृत प्रक्रिया हमारी गाइड रिपोर्ट में उपलब्ध है।
क्या पेराई सत्र पर इसका असर पड़ेगा? आजमगढ़ की सठियांव चीनी मिल समेत क्षेत्र की मिलों का पेराई कार्यक्रम मौसम और प्रशासनिक स्थिति पर निर्भर करेगा। गिरे गन्ने की समय पर कटाई-आपूर्ति किसानों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्रोत: हिंदुस्तान (लाइव हिंदुस्तान), 5 अक्टूबर 2026; बसावन इंडिया, 6 अक्टूबर 2026; चेतना मंच, 9 अक्टूबर 2026; समाचार इंडिया लाइव, 6 अक्टूबर 2026।
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