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बागपत में 29 करोड़ गन्ना बकाया पर नोटिस: मलकपुर सहित 6 चीनी मिलों के खिलाफ आरसी, पेराई से पहले भुगतान का आदेश

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 18, 2026 • 6 min read
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बागपत में 29 करोड़ गन्ना बकाया पर नोटिस: मलकपुर सहित 6 चीनी मिलों के खिलाफ आरसी, पेराई से पहले भुगतान का आदेश
अंतिम अपडेट: October 18, 2026 8:15 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बागपत जिले में पेराई कैलेंडर तैयार हो चुका है और दीपावली से पहले तीनों चीनी मिलें चालू हो जाएंगी। लेकिन पेराई शुरू होने से पहले बकाया गन्ना भुगतान को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखा दी है। किनौनी और भैंसाना चीनी मिलों को एक सप्ताह के भीतर 29 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान करने का नोटिस जारी किया गया है। इसी बीच प्रदेश स्तर पर भी कार्रवाई तेज हुई है — बागपत की मलकपुर चीनी मिल सहित उत्तर प्रदेश की 6 चीनी मिलों के खिलाफ वसूली प्रमाण-पत्र (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी किए गए हैं।

जिले के सवा लाख गन्ना किसानों के लिए खबर दोहरी राहत लेकर आई है — पेराई की तारीखें तय हो गई हैं और बकाये पर पहली बार स्पष्ट समय-सीमा बंधी है: पुराना भुगतान साफ, फिर नया सत्र।

किनौनी और भैंसाना मिल पर कितना बकाया

अमर उजाला की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, बागपत जिले में किनौनी चीनी मिल पर किसानों का लगभग 20 करोड़ रुपये और भैंसाना चीनी मिल पर लगभग 9 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य बकाया चल रहा है। दोनों को मिलाकर यह रकम 29 करोड़ रुपये होती है।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों मिलें बकाया भुगतान में रुचि नहीं ले रही थीं और किसानों के कई बार मांग करने के बावजूद रकम नहीं मिली। भुगतान अटके रहने से खाद-बीज और घरेलू खर्चों के लिए अपने ही पैसों का इंतजार कर रहे किसानों में रोष बढ़ रहा था।

जिला गन्ना अधिकारी का नोटिस: एक सप्ताह की समय-सीमा

जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने किनौनी और भैंसाना, दोनों चीनी मिलों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के अंदर बकाया भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मिलों के अधिकारियों की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि पेराई सत्र शुरू होने से पहले बकाया भुगतान कर दिया जाएगा। अमर उजाला के अनुसार, जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि जिले में लगभग 85 हजार हेक्टेयर में गन्ने का उत्पादन होता है और सवा लाख से अधिक किसान मिलों को गन्ने की आपूर्ति करते हैं। इतनी बड़ी संख्या के किसानों का भुगतान अटके रहना जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालता है।

प्रदेश स्तर पर भी सख्ती: 6 चीनी मिलों के खिलाफ आरसी

इसी बीच प्रदेश स्तर पर भी कार्रवाई तेज हुई है। गन्ना एवं चीनी विभाग के आयुक्त प्रमोद कुमार उपाध्याय ने समय पर भुगतान नहीं करने वाली 6 चीनी मिलों के खिलाफ वसूली प्रमाण-पत्र जारी किए हैं। इस सूची में बागपत की मलकपुर चीनी मिल भी शामिल है। इसके अलावा बरखेड़ा (पीलीभीत), मकसूदापुर (शाहजहांपुर), बहेड़ी और नवाबगंज (बरेली) तथा कुंदुरखी (गोंडा) की मिलों पर भी यह कार्रवाई की गई है।

वसूली प्रमाण-पत्र का मतलब है कि संबंधित जिलों के प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह इस राशि को भू-राजस्व की भांति वसूल कर किसानों को भुगतान सुनिश्चित करे। गन्ना आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि गन्ना मूल्य भुगतान शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है और शासन स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक सभी को भुगतान की निगरानी और निष्पादन के निर्देश दिए गए हैं।

मलकपुर मिल के खिलाफ आरसी का असर सीधे बागपत के किसानों पर पड़ेगा — यह जिले की तीनों मिलों में से एक है और अब तीनों पर प्रशासन की नजर बनी रहेगी।

पेराई कैलेंडर तैयार: 25 अक्टूबर से मलकपुर, 3 नवंबर से बागपत-रमाला

बकाये की कार्रवाई के साथ ही नया पेराई सत्र भी समय पर शुरू होने जा रहा है। अमर उजाला के अनुसार, जिले की तीनों चीनी मिलों का कैलेंडर तैयार हो गया है। मलकपुर चीनी मिल 25 अक्टूबर से चालू हो जाएगी, जबकि बागपत और रमाला चीनी मिल 3 नवंबर से चलेंगी। दोनों मिलों का मिल इंडेंट 1 नवंबर को जारी होगा।

जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि पेराई शुरू होने से दो दिन पहले इंडेंट जारी कर पक्की पर्ची दी जाएगी। सभी कर्मचारियों को लापरवाही न बरतने के निर्देश जारी हो चुके हैं। तीनों मिलों — मलकपुर, बागपत और रमाला — में तैयारियां पूरी हैं।

किसानों के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण है। पर्ची समय पर मिले और तौल पारदर्शी हो — इन्हीं बिंदुओं पर हर सत्र में सबसे ज्यादा शिकायतें आती हैं। प्रशासन का लापरवाही पर कार्रवाई का आश्वासन एक सकारात्मक संकेत है।

बारिश और रिकवरी की चिंता

मिल अधिकारियों का कहना है कि बरसात की वजह से गन्ने में रिकवरी कम होने की आशंका है, इसलिए पेराई सत्र को थोड़ा पीछे रखा गया है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि रिकवरी की चिंता अलग है और पुराने भुगतान की जिम्मेदारी अलग — बकाया समय पर चुकाना ही होगा।

किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह आदेश

पहला और सबसे बड़ा संदेश यह है कि पुराने बकाये का भुगतान नए सत्र की शर्त बन गया है। किनौनी और भैंसाना मिलों को एक सप्ताह में 29 करोड़ रुपये चुकाने हैं और मलकपुर मिल के खिलाफ आरसी जारी हो चुकी है। यानी दीपावली से पहले भुगतान की राह खुलती दिख रही है।

दूसरा, गन्ना देने के बाद नियत समय के भीतर भुगतान मिलना किसान का अधिकार है और विलंब पर ब्याज का प्रावधान है। बकाया अटकने पर किसान जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या गन्ना समिति में शिकायत दर्ज करा सकता है।

तीसरा, पेराई कैलेंडर की जानकारी रखें। मलकपुर मिल 25 अक्टूबर से चलेगी और बागपत-रमाला मिलों का इंडेंट 1 नवंबर को जारी होगा। पर्ची जारी होने की सूचना पर नजर रखें और पर्ची मिलने के बाद ही गन्ना कटाई का समय तय करें। पर्ची से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से संपर्क करें।

चौथा, 2026-27 सत्र के लिए केंद्र ने गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) — यही वह न्यूनतम दर है, जो मिलों को चुकानी ही होगी।

आपके सवाल

सवाल: किनौनी और भैंसाना मिलों पर किसानों का कितना बकाया है? जवाब: अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, किनौनी चीनी मिल पर लगभग 20 करोड़ रुपये और भैंसाना चीनी मिल पर लगभग 9 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य बकाया है। कुल मिलाकर यह रकम 29 करोड़ रुपये होती है।

सवाल: जिला गन्ना अधिकारी ने नोटिस में क्या आदेश दिया है? जवाब: जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने दोनों मिलों को एक सप्ताह के अंदर भुगतान के निर्देश दिए हैं। देरी पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मिलों ने पेराई सत्र से पहले भुगतान का आश्वासन दिया है।

सवाल: किन 6 चीनी मिलों के खिलाफ वसूली प्रमाण-पत्र जारी हुआ है? जवाब: गन्ना आयुक्त ने बरखेड़ा (पीलीभीत), मकसूदापुर (शाहजहांपुर), बहेड़ी और नवाबगंज (बरेली), कुंदुरखी (गोंडा) और मलकपुर (बागपत) की मिलों के खिलाफ वसूली प्रमाण-पत्र जारी किए हैं। अब जिला प्रशासन यह राशि भू-राजस्व की भांति वसूल कर किसानों को भुगतान सुनिश्चित करेगा।

सवाल: बागपत की तीनों मिलों का पेराई कैलेंडर क्या है? जवाब: मलकपुर चीनी मिल 25 अक्टूबर से चालू होगी। बागपत और रमाला चीनी मिल 3 नवंबर से चलेंगी और इनका मिल इंडेंट 1 नवंबर को जारी होगा। पेराई शुरू होने से दो दिन पहले किसानों को पक्की पर्ची जारी की जाएगी।

सवाल: बकाया भुगतान में देरी पर किसान क्या कर सकते हैं? जवाब: किसान जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। समय पर भुगतान न करने वाली मिलों के खिलाफ नोटिस, वसूली प्रमाण-पत्र जैसी प्रशासनिक कार्रवाई का प्रावधान है। भुगतान अटकने पर गन्ना समिति से भी संपर्क किया जा सकता है।

स्रोत: अमर उजाला (12 अक्टूबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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