होम › शनिवार 17 अक्टूबर को मलकपुर चीनी मिल में …

शनिवार 17 अक्टूबर को मलकपुर चीनी मिल में किसानों की बड़ी बैठक: पूरा गन्ना भुगतान मिलने पर मिल मालिक उमेश मोदी का सम्मान, आगे भी समय पर भुगतान का वादा

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 19, 2026 • 6 min read
Google पर हमें फ़ॉलो करें
शेयर करें:
शनिवार 17 अक्टूबर को मलकपुर चीनी मिल में किसानों की बड़ी बैठक: पूरा गन्ना भुगतान मिलने पर मिल मालिक उमेश मोदी का सम्मान, आगे भी समय पर भुगतान का वादा
अंतिम अपडेट: October 19, 2026 10:36 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बागपत जिले की मलकपुर चीनी मिल में शनिवार (17 अक्टूबर 2026) को एक अलग ही नज़ारा देखने को मिला। मिल परिसर में हुई किसानों की बैठक में गन्ना उत्पादकों ने मिल मालिक उमेश मोदी का भव्य सम्मान किया, क्योंकि मिल ने बकाया गन्ना भुगतान पूरा कर दिया है। बैठक में उमेश मोदी ने किसानों से अपील की कि वे मिल को अपना समझकर अधिक मात्रा में गन्ना आपूर्ति करें और इस बार की तरह आगे भी समय पर भुगतान का आश्वासन दिया। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026; वॉइस ऑफ न्यूज़ 24, 18 अक्टूबर 2026)

बागपत के बड़ौत स्थित मलकपुर चीनी मिल उत्तर प्रदेश की 122 चीनी मिलों में से एक है और जिले के लाखों गन्ना किसानों के जीवन से सीधे जुड़ी है। पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से ठीक पहले इस बैठक का माहौल उत्साहजनक रहा — बकाया भुगतान मिल प्रबंधन के वादे के मुताबिक नए सत्र से पहले चुका दिया गया था।

लेकिन बैठक सिर्फ बधाई-बधाई तक सीमित नहीं रही। किसानों ने अपनी मांगें भी रखीं — विलंब से हुए गन्ना भुगतान पर ब्याज के भुगतान की मांग बैठक का अहम मुद्दा रही। थांबा चौधरी यशपाल सिंह ने स्पष्ट कहा कि जिन किसानों का भुगतान देर से हुआ, उन्हें ब्याज का हक मिलना चाहिए। वहीं मिल परिसर में किसानों के लिए हॉल और कैंटीन जैसी बुनियादी सुविधाएं बनाने की मांग भी उठी।

बैठक में क्या-क्या हुआ

शनिवार को मलकपुर चीनी मिल परिसर में किसानों की बैठक हुई, जिसमें मिल मालिक उमेश मोदी खुद मौजूद रहे। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मिल को अपना समझकर गन्ना दिया जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस बार की तरह आगे भी समय पर गन्ना भुगतान किया जाएगा, ताकि किसानों को इंतज़ार की तकलीफ न झेलनी पड़े।

वहीं वॉइस ऑफ न्यूज़ 24 की रिपोर्ट के मुताबिक चेयरमैन उमेश मोदी ने किसानों के बीच पहुंचकर सीधा संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने आगामी पेराई सत्र में किसानों को समय से गन्ना भुगतान कराने का पूरा भरोसा दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिल परिसरों और व्यवस्थाओं में सुधार किया जा रहा है, ताकि गन्ना लेकर आने वाले अन्नदाताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

बैठक में बावली थांबा चौधरी जयपाल सिंह, मिल के यूनिट हेड विपिन चौधरी, रणवीर प्रधान, पूर्व प्रधान सुधीर, अमरपाल दांगी, सुरेश तोमर और रामकुमार समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

“क्षेत्र का गन्ना बाहर नहीं जाना चाहिए”

बैठक में उमेश मोदी ने एक बड़ी बात कही — उन्होंने कहा कि क्षेत्र का गन्ना बाहर नहीं जाना चाहिए। उनका कहना था कि किसानों की खुशहाली के लिए ही क्षेत्र में मिल लगवाई गई थी और अब इसका परिणाम दिख रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ लोग कहते थे कि मिल में पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह का हिस्सा है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।

उमेश मोदी ने कहा कि प्रयास है कि क्षेत्र में अन्य कारखाने भी लगाए जाएं, जिससे यहां की जमीन के रेट बढ़ेंगे और पूरे इलाके का विकास होगा। यह बयान किसानों के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि बागपत का गन्ना क्षेत्र लंबे समय से यही मांग करता रहा है कि जिले के किसानों को अपना गन्ना बाहर के मिलों में ले जाने की मजबूरी न रहे।

पृष्ठभूमि: बकाया और वसूली प्रमाण-पत्र का मामला

यह सम्मान उसी मलकपुर मिल के लिए हो रहा है, जो बकाया भुगतान को लेकर हाल ही में सुर्खियों में थी। caneup.xyz की 18 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक बागपत जिले की किनौनी और भैंसाना चीनी मिलों को एक सप्ताह के भीतर 29 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान करने का नोटिस जारी किया गया था, जबकि मलकपुर सहित उत्तर प्रदेश की 6 चीनी मिलों के खिलाफ वसूली प्रमाण-पत्र (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी किए गए थे।

अब मिल प्रबंधन का दावा है कि बकाया चुका दिया गया है — मलकपुर गन्ना विकास समिति के चेयरमैन अंकित वीर के मुताबिक नए पेराई सत्र से पहले भुगतान का वादा पूरा हुआ। हालांकि किसानों की ओर से विलंबित भुगतान के ब्याज की मांग अब भी जिंदा है, यानी भुगतान में देरी का हिसाब अभी बाकी है।

किसान के लिए इसका मतलब क्या है

  1. तुरंत राहत: बकाया भुगतान मिलने से किसानों के खातों में रकम पहुंची है, जिससे दीपावली से पहले की खरीदारी और रबी फसल की बुवाई में मदद मिलेगी।
  2. नया सत्र साफ शुरुआत से: पुराना बकाया चुक जाने का मतलब है कि पेराई सत्र 2026-27 बिना पुरानी देनदारी के शुरू होगा — किसानों को नए गन्ने का भुगतान समय पर मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
  3. ब्याज की मांग पर नज़र: विलंबित भुगतान पर ब्याज मिलता है या नहीं, इस पर किसानों को नज़र रखनी चाहिए। यह विषय बैठक में उठा है, लेकिन अभी आश्वासन से आगे नहीं बढ़ा है।
  4. गन्ना आपूर्ति का भरोसा: मिल मालिक की “क्षेत्र का गन्ना बाहर नहीं जाना चाहिए” वाली अपील का मतलब है कि आगामी सत्र में गन्ना आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी है — किसानों को पर्ची और तौल कैलेंडर की जानकारी समय पर मिलती रहे, इसकी पुष्टि करते रहें।

गौरतलब है कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश में गन्ना भाव (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है — पिछले सत्र 2025-26 में एसएपी अगेती प्रजाति के लिए 400 रुपये, सामान्य के लिए 390 रुपये और अनुपयुक्त के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ था। किसान संगठन लगातार भाव बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं।

पूछे जाने वाले प्रश्न

मलकपुर चीनी मिल में 17 अक्टूबर की बैठक में क्या हुआ? बैठक में किसानों ने पूरा गन्ना भुगतान मिलने पर मिल मालिक उमेश मोदी का सम्मान किया। मोदी ने किसानों से अधिक गन्ना आपूर्ति की अपील की और इस बार की तरह आगे भी समय पर भुगतान का आश्वासन दिया। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026)

क्या मलकपुर मिल का सारा बकाया चुक गया है? मिल प्रबंधन और मलकपुर गन्ना विकास समिति के चेयरमैन अंकित वीर के मुताबिक, बकाया गन्ना भुगतान नए पेराई सत्र से पहले देने का वादा पूरा कर दिया गया है। हालांकि विलंबित भुगतान पर ब्याज की मांग किसानों की ओर से अभी लंबित है।

विलंबित गन्ना भुगतान पर ब्याज कौन देगा? बैठक में थांबा चौधरी यशपाल सिंह ने विलंब से हुए गन्ना भुगतान के ब्याज भुगतान की मांग उठाई है। इस पर अभी कोई फैसला सामने नहीं आया है — किसानों को मिल प्रबंधन या गन्ना आयुक्त कार्यालय से लिखित जवाब की मांग करनी चाहिए।

पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना भाव क्या तय हुआ है? 2026-27 सत्र के लिए उत्तर प्रदेश में राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए भाव अगेती 400 रुपये, सामान्य 390 रुपये और अनुपयुक्त 355 रुपये प्रति क्विंटल था। किसान संगठन 600 रुपये प्रति क्विंटल भाव की मांग कर रहे हैं।

क्षेत्र का गन्ना बाहर क्यों जाता है? जब आस-पास की मिल में समय पर भुगतान या पर्याप्त पेराई क्षमता नहीं होती, तो किसान मजबूर होकर गन्ना दूर की मिलों में ले जाते हैं, जिससे ढुलाई खर्च बढ़ता है। उमेश मोदी ने कहा है कि क्षेत्र में अन्य कारखाने लगाने का प्रयास जारी है, ताकि यह मजबूरी खत्म हो।

स्रोत: अमर उजाला (17 अक्टूबर 2026), वॉइस ऑफ न्यूज़ 24 (18 अक्टूबर 2026); पृष्ठभूमि के लिए caneup.xyz की 18 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट।

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें

गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।

1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
उत्तर प्रदेश का अपना जनपद चुनें
आपके जिले से संबंधित चीनी मिलें
इस नंबर पर आपको पर्ची और भुगतान के व्हाट्सएप अपडेट्स मिलेंगे
जितना स्पष्ट लिखेंगे, उतनी जल्दी सटीक समाधान मिलेगा

🔒 आपकी निजी जानकारी 100% सुरक्षित है। हम कोई स्पैम नहीं भेजते। केवल आपकी मिल से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स शेयर किए जाते हैं।

✓
Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में