होम › 55 करोड़ का चेक बाउंस: बहेड़ी केसर चीनी …

55 करोड़ का चेक बाउंस: बहेड़ी केसर चीनी मिल की कुर्क जमीन की नीलामी 24 अक्टूबर को, 165 करोड़ बकाए पर किसानों की उम्मीद फिर टूटी

Aamir Raza Aamir Raza • Jan 1, 0001 • 6 min read
Google पर हमें फ़ॉलो करें
शेयर करें:
55 करोड़ का चेक बाउंस: बहेड़ी केसर चीनी मिल की कुर्क जमीन की नीलामी 24 अक्टूबर को, 165 करोड़ बकाए पर किसानों की उम्मीद फिर टूटी
अंतिम अपडेट: January 1, 0001 — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

दो साल से अपने गन्ने के पैसे का इंतजार कर रहे बरेली के बहेड़ी क्षेत्र के हजारों किसानों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। केसर चीनी मिल खरीदने का दावा करने वाले अवध ग्रुप की ओर से दिए गए 55 करोड़ रुपये के चेक बाउंस हो गए हैं। इन चेकों के सहारे प्रशासन ने मिल की कुर्क जमीन की नीलामी टाल दी थी, लेकिन अब 24 अक्टूबर को नीलामी की नई तारीख तय हो गई है। मिल पर किसानों का करीब 165 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है, और नए पेराई सत्र में इस मिल के चलने की संभावना भी क्षीण नजर आ रही है।

55 करोड़ का चेक कैसे बाउंस हुआ

कुछ दिन पहले अवध फूड्स ग्रुप के चेयरमैन ने बकाए के लिए जिलाधिकारी के सामने 55 करोड़ का चेक दिया था। कर्मचारियों के वेतन के लिए भी अलग चेक दिए गए थे — डायनामाइट न्यूज़ के मुताबिक वेतन का 11 करोड़ का चेक भी शामिल था। चेक लगाने के लिए पांच अक्टूबर तक का समय मांगा था।

सोमवार को बैंक में लगते ही दोनों चेक बाउंस हो गए — खाते में पर्याप्त रकम नहीं थी। खबर मिलते ही किसानों और मिल कर्मचारियों में नाराजगी फैल गई। गुस्साए किसानों ने मिल परिसर में प्रदर्शन किया और मालिक का पासपोर्ट जब्त करने की मांग तक उठा दी।

165 करोड़ का बकाया और 431 करोड़ का सौदा

बहेड़ी केसर इंटरप्राइजेज चीनी मिल पर किसानों का करीब 165 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। दो साल से इंतजार कर रहे किसानों को तब उम्मीद जगी थी, जब मिल प्रबंधन ने 431 करोड़ रुपये में अवध ग्रुप को मिल बेचने का सौदा किया। अवध ग्रुप ने नौ महीने में पूरा बकाया चुकाने और मिल समय से चालू करने का आश्वासन दिया था।

सौदे के तहत बतौर ब्याना 55 करोड़ का चेक जिलाधिकारी को दिया गया था। चेक बाउंस होते ही किसानों की उम्मीद फिर धूमिल हो गई। दैनिक जागरण के अनुसार, जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मूल्यांकन समिति की बैठक बुलाकर स्थिति पर चर्चा की, जिसमें सर्वसम्मति से नीलामी की तारीख तय हुई।

24 अक्टूबर को नीलामी: पहले भी दो बार टली

कुर्क जमीन की नीलामी की कहानी पुरानी है। प्रशासन ने 31 मई को मिल की 11.447 हेक्टेयर जमीन 28.05 करोड़ रुपये में नीलाम भी करा दी थी, लेकिन कम कीमत का मुद्दा उठने पर वह नीलामी निरस्त हो गई। इसके बाद नए सर्किल रेट पर दोबारा प्रक्रिया शुरू हुई और 25 सितंबर को नीलामी की तारीख भी तय हो गई थी।

इसी बीच मिल का 431 करोड़ में सौदा हो गया और खरीददार के आग्रह पर नीलामी टाल दी गई। किसानों को जल्द भुगतान और सीजन में मिल चलने की उम्मीद जग गई थी। अब चेक बाउंस होने के बाद 24 अक्टूबर को नई तारीख तय हुई है। जिलाधिकारी ने नीलामी के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं, ताकि ज्यादा बोलीदाता आएं और किसानों के बकाए की वसूली हो सके।

दो साल से इंतजार कर रहे किसान, वेतन भी फंसा

सबसे ज्यादा मार उन किसानों पर पड़ी है जिन्होंने दो साल पहले अपना गन्ना इस मिल को दिया था। पेराई के बाद भुगतान नहीं मिला, मिल बंद हो गई, और अब खरीद-बिक्री के चक्कर में उनका पैसा और फंसता जा रहा है। छोटे किसानों के लिए यह रकम सिर्फ बकाया नहीं है — इससे खाद, डीजल, बच्चों की फीस और घर के खर्च जुड़े हैं।

मिल कर्मचारियों की हालत भी खराब है — वेतन का चेक भी बाउंस हो गया, यानी तनख्वाह का संकट बरकरार है। यही वजह है कि किसानों के साथ-साथ कर्मचारी भी प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

अधिवक्ताओं ने भी खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री को ज्ञापन

बहेड़ी बार एसोसिएशन भी मैदान में उतर आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 9 अक्टूबर को अध्यक्ष रामेन्द्र सिंह राठी के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया है कि मिल पर क्षेत्र के किसानों का 164 करोड़ बकाया है, और अधिकांश अधिवक्ता भी किसान हैं जिनका गन्ना इसी फैक्ट्री पर जाता है।

ज्ञापन में फर्जी चेक के मामले में कंपनी मालिक पर दंडात्मक कार्रवाई और मिल की संपत्ति कुर्क कर शीघ्र भुगतान की मांग की गई है। चेतावनी दी गई है कि कार्रवाई न होने पर अधिवक्ता किसानों के साथ आंदोलन करेंगे और कलमबंद हड़ताल तक की जाएगी।

15 प्रतिशत ब्याज वाला सुप्रीम कोर्ट फैसला भी जुड़ा

यह मामला ऐसे समय में आया है जब गन्ना बकाए पर ब्याज को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला चर्चा में है। 6 अक्टूबर को कोर्ट ने यूपी सरकार की अर्जी खारिज कर स्पष्ट किया कि 14 दिन में भुगतान न होने पर मिलों को 15 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले ही पाया था कि वसूली प्रमाणपत्रों के तहत 1,936 करोड़ की वसूली बाकी है — 1,087 करोड़ मूल बकाया और 849.5 करोड़ ब्याज।

2006 में जनहित याचिका दायर करने वाले किसान नेता वी.एम. सिंह ने इसे किसानों की बड़ी जीत बताया है। बहेड़ी जैसे मामलों में भी 15 प्रतिशत की दर से ब्याज जुड़े तो किसानों को मिलने वाली रकम मूल बकाए से कहीं ज्यादा हो सकती है।

आगे क्या: किसानों के लिए जरूरी बातें

पहली बात — 24 अक्टूबर की नीलामी से वसूल रकम किसानों के बकाए में लगेगी। पिछली बार 28.05 करोड़ की नीलामी कम कीमत के आरोप में निरस्त हो चुकी है, इसलिए इस बार सर्किल रेट के आधार पर प्रक्रिया हो रही है और प्रशासन प्रचार का दावा कर रहा है।

दूसरी बात — नया पेराई सत्र अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से शुरू हो रहा है, लेकिन बहेड़ी मिल के इस सीजन में चलने की संभावना क्षीण बताई जा रही है। इस क्षेत्र के किसानों को अपना गन्ना नजदीकी मिलों को देने की योजना बनानी चाहिए और पर्ची-कैलेंडर समय पर देख लेना चाहिए।

तीसरी बात — किसान अपना बकाया और पर्ची की स्थिति caneup.in और upcane.gov.in पर जरूर जांचें। गन्ना शिकायत के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 उपलब्ध हैं।

स्रोत: दैनिक जागरण (8 अक्टूबर 2026), डायनामाइट न्यूज़ हिंदी (8 अक्टूबर 2026), बीटा समाचार (10 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी/टाइम्स ऑफ इंडिया (सुप्रीम कोर्ट ब्याज फैसला)।

जवाब जानिए

प्रश्न: बहेड़ी केसर चीनी मिल पर किसानों का कितना बकाया है? उत्तर: मिल पर करीब 165 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है, जिसका भुगतान दो साल से अटका है।

प्रश्न: 55 करोड़ का चेक किसने दिया था और वह क्यों बाउंस हुआ? उत्तर: मिल खरीदने का दावा करने वाले अवध ग्रुप के चेयरमैन ने बकाया भुगतान के लिए 55 करोड़ का चेक दिया था। खाते में रकम न होने से वह बाउंस हो गया। वेतन का चेक भी बाउंस हुआ है।

प्रश्न: मिल की कुर्क जमीन की नीलामी कब होगी? उत्तर: 24 अक्टूबर को नीलामी तय है। 31 मई की नीलामी निरस्त हो चुकी थी और 25 सितंबर की तारीख सौदे के बाद टल गई थी।

प्रश्न: क्या इस पेराई सत्र में बहेड़ी मिल चलेगी? उत्तर: मौजूदा हालात में इस मिल के चलने की संभावना क्षीण बताई जा रही है। किसानों को नजदीकी चालू मिलों की व्यवस्था देखनी चाहिए।

प्रश्न: बकाए पर ब्याज मिलेगा या नहीं? उत्तर: सुप्रीम कोर्ट के 6 अक्टूबर के आदेश के अनुसार 14 दिन में भुगतान न होने पर 15 प्रतिशत ब्याज देना होगा, हालांकि वसूली प्रशासन के हाथ में है।

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें

गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।

1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
उत्तर प्रदेश का अपना जनपद चुनें
आपके जिले से संबंधित चीनी मिलें
इस नंबर पर आपको पर्ची और भुगतान के व्हाट्सएप अपडेट्स मिलेंगे
जितना स्पष्ट लिखेंगे, उतनी जल्दी सटीक समाधान मिलेगा

🔒 आपकी निजी जानकारी 100% सुरक्षित है। हम कोई स्पैम नहीं भेजते। केवल आपकी मिल से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स शेयर किए जाते हैं।

✓
Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में