159 करोड़ गन्ना बकाया पर किसानों का फूटा गुस्सा — 12 अक्टूबर को बहेड़ी में महाधरना का ऐलान, एसडीएम दफ्तर में हंगामा

बरेली के बहेड़ी तहसील कार्यालय में 3 अक्टूबर को संपूर्ण समाधान दिवस पर जमकर हंगामा हुआ। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के तराई क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने दो सत्रों के बकाया गन्ना भुगतान को लेकर एसडीएम बहेड़ी से मुलाकात की, और इसी दौरान बहेड़ी के गन्ना सचिव राजीव सेठ से किसानों की तीखी बहस हो गई। सैकड़ों किसान “केसर चीनी मिल से 159 करोड़ का बकाया दो” के नारे लगाते रहे। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चौधरी अजीत सिंह, चौधरी सुरेंद्र सिंह, योगेश पाल सिंह, प्रदीप सिंह और वंश चौधरी कर रहे थे।
यहीं से मामला और तेज हो गया — भाकियू टिकैत ने संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सरदार बलजिंदर सिंह मान के निर्देश पर ऐलान कर दिया है कि 12 अक्टूबर (सोमवार) को तहसील परिसर बहेड़ी में विशाल महाधरना होगा। किसान नेताओं का कहना है कि इस धरने में बरेली के जिलाधिकारी और जिला गन्ना अधिकारी को खुद मौके पर आना होगा। जब तक पूरे बकाए का ठोस समाधान नहीं होता, आंदोलन नहीं थमेगा।
159 करोड़ का बकाया — हिसाब किताब क्या कहता है
यह बकाया एक दिन का नहीं, दो पेराई सत्रों का जमा है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक केसर चीनी मिल पर कुल 159.5 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य बकाया है — इसमें पेराई सत्र 2024-25 का बकाया 141.96 करोड़ रुपये और सत्र 2025-26 का बकाया 17.55 करोड़ रुपये है। स्थानीय किसान नेता इन्हीं आंकड़ों को गोल करके 159 करोड़ बताते हैं (142 करोड़ पुराना + 17 करोड़ नया)।
किसानों का आरोप है कि मिल ने किसानों से गन्ना लेकर चीनी बेच दी, लेकिन भुगतान नहीं किया। भाकियू (भानु) के तराई क्षेत्र के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर अमर सिंह और प्रदेश प्रवक्ता जुबैर सिद्दीकी ने पहले ही कह चुके हैं कि प्रशासन ने समय रहते मिल पर भुगतान का दबाव नहीं बनाया — अगर उसी समय थोड़ा-थोड़ा करके भुगतान कराया जाता, तो आज इतना बड़ा बकाया खड़ा ही नहीं होता।
डिस्टलरी गेट पर 1 सितंबर से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना
याद रहे, यह आंदोलन नया नहीं है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक भाकियू (भानु) के बैनर तले किसान 1 सितंबर से केसर मिल के डिस्टलरी गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर चुके हैं। किसानों का कहना है कि जब तक पूरा भुगतान नहीं हो जाता, धरना जारी रहेगा।
धरने में तराई के प्रदेश प्रभारी नितिन सिरोही, मुख्य महासचिव शाहिद अंसारी, प्रदेश सचिव इरशाद अहमद और तहसील अध्यक्ष सोनू बेनीवाल समेत कई किसान नेता मौजूद हैं। यानी जमीन पर एक गुट डिस्टलरी गेट पर बैठा है और अब भाकियू टिकैत ने तहसील स्तर पर दूसरा मोर्चा खोल दिया है — दबाव दोनों तरफ से बढ़ रहा है।
नीलामी टली, खरीदार का चेक गायब — किसानों को जवाब कौन देगा
किसानों का गुस्सा सिर्फ बकाए पर नहीं है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक केसर मिल की जमीन की नीलामी भी स्थगित हो गई है और नए संभावित खरीदार के चेक का भी कोई पता नहीं है। यानी बकाया वसूली का जो रास्ता प्रशासन दिखा रहा था, वही रुक गया है।
एसडीएम बहेड़ी से मुलाकात में किसानों ने इसी बिंदु पर सवाल उठाए — जब मिल की नीलामी तक नहीं हो पा रही और खरीदार की ओर से कोई साफ जवाब नहीं आ रहा, तो 159 करोड़ की वसूली का भरोसा किस बात पर दिया जाए? गन्ना सचिव राजीव सेठ से हुई बहस इसी ठोस जवाब की मांग पर हुई थी।
12 अक्टूबर के महाधरने में किसानों की मांगें
भाकियू टिकैत के नेताओं ने 12 अक्टूबर के महाधरने के लिए अपनी मांगें साफ कर दी हैं —
- दो सत्रों का पूरा 159 करोड़ का बकाया तुरंत भुगतान किया जाए
- धरना स्थल पर जिलाधिकारी बरेली और जिला गन्ना अधिकारी खुद पहुंचकर समाधान का ठोस आश्वासन दें
- मिल की नीलामी प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए ताकि बकाया वसूली का रास्ता खुले
- जब तक भुगतान नहीं होता, आंदोलन और तेज किया जाएगा
भुगतान न मिलने से छोटे किसान सबसे ज्यादा पिसे
बकाया सिर्फ आंकड़ा नहीं है, इसके पीछे हजारों किसान परिवारों की टूटी अर्थव्यवस्था है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट कहती है कि किसानों को पिछले सत्र का बहुत कम भुगतान मिला था और इस सत्र का भी मिल प्रबंधन ने साढ़े 17 करोड़ रुपये रोक लिए हैं। भुगतान न मिलने से छोटे किसान पिस गए हैं — उन पर कर्जे का बोझ बढ़ गया है और आर्थिक स्थिति डगमगा गई है।
अगस्त में हुई महापंचायत में भी किसानों ने भावुक अपील की थी — “मिल ने पैसा नहीं दिया तो इसमें हमारे बच्चों का क्या कसूर? हमारे बच्चों को स्कूल से फीस के लिए मत निकालो।” खेती की अगली पेराई नजदीक है, और बिना भुगतान के किसानों के पास बुवाई और पराली प्रबंधन के खर्चे जुटाना भी मुश्किल हो रहा है।
अगर आपका गन्ना बकाया भी फंसा है तो ये 4 काम जरूर करें
- भुगतान की स्थिति ऑनलाइन जांचें — caneup.in या upcane.gov.in पोर्टल पर अपना गन्ना आपूर्ति और भुगतान का रिकॉर्ड देखें। बकाया राशि और सत्रवार हिसाब नोट करके रखें।
- पर्ची, तौल और आपूर्ति के कागजात संभालकर रखें — धरने या प्रशासनिक कार्रवाई में यही कागज आपके बकाए का सबसे बड़ा सबूत होंगे।
- टोल-फ्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं — गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर अपने बकाए की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- समिति से जुड़े रहें — पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना समिति की सदस्यता की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। समिति से जुड़े रहने पर ही भुगतान और पर्ची व्यवस्था में आपका हक बना रहता है।
क्या होगा आगे
12 अक्टूबर का महाधरना इस बकाया विवाद का सबसे बड़ा मोड़ हो सकता है। एक तरफ डिस्टलरी गेट पर 1 सितंबर से धरना जारी है, दूसरी तरफ तहसील परिसर में किसान ताकत दिखाने की तैयारी में हैं। देखना होगा कि जिलाधिकारी और जिला गन्ना अधिकारी धरने में पहुंचते हैं या नहीं — और पहुंचते हैं तो बकाया भुगतान का ठोस कैलेंडर देते हैं या सिर्फ आश्वासन। किसानों का रुख इस बार साफ है — “भुगतान होने तक आंदोलन जारी रहेगा।” CaneUp इस खबर के हर नए मोड़ की जानकारी देता रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
केसर चीनी मिल पर किसानों का कितना बकाया है?
कुल 159.5 करोड़ रुपये — पेराई सत्र 2024-25 का 141.96 करोड़ और सत्र 2025-26 का 17.55 करोड़। किसान नेता इसे 159 करोड़ बताते हैं।
12 अक्टूबर को बहेड़ी में क्या हो रहा है?
भाकियू टिकैत ने 12 अक्टूबर (सोमवार) को तहसील परिसर बहेड़ी में विशाल महाधरना का ऐलान किया है। मांग है कि जिलाधिकारी बरेली और जिला गन्ना अधिकारी खुद मौके पर आकर बकाया भुगतान का ठोस समाधान दें।
केसर मिल की नीलामी क्यों नहीं हुई?
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक मिल की जमीन की नीलामी स्थगित हो गई है और नए संभावित खरीदार के चेक का भी कोई पता नहीं है, जिससे बकाया वसूली का रास्ता रुक गया है।
किसानों का अनिश्चितकालीन धरना कहां चल रहा है?
भाकियू (भानु) के बैनर तले 1 सितंबर से केसर मिल के डिस्टलरी गेट पर अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। किसान कह रहे हैं कि पूरा भुगतान होने तक धरना जारी रहेगा।
बकाया भुगतान की शिकायत कहां दर्ज कराएं?
गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। साथ ही caneup.in पर अपना भुगतान रिकॉर्ड जांचते रहें।
स्रोत: अमर उजाला (1 सितंबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (1 सितंबर 2026), NEWS84 बहेड़ी (3 अक्टूबर 2026)
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