बलरामपुर चीनी का ₹3,080 करोड़ Biopolymer Plant — गन्ने से बनेगा प्लास्टिक! लखीमपुर में देश का पहला प्रोजेक्ट

ऐतिहासिक पहल: उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के लिए बड़ी खुशखबरी है। बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (BCML) लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में भारत का पहला बड़े पैमाने का Sugarcane-to-PLA (बायोप्लास्टिक) प्लांट स्थापित कर रही है। ₹3,080 करोड़ के भारी निवेश से तैयार हो रहा यह मेगा प्रोजेक्ट गन्ने की खेती और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में क्रांतिकारी कदम साबित होगा।
🏭 प्रोजेक्ट की प्रमुख विशेषताएं
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कंपनी / ब्रांड | बलरामपुर चीनी मिल्स (Balrampur Bioyug) |
| कुल निवेश | ₹3,080 करोड़ |
| स्थान | कुंभी चीनी मिल परिसर, लखीमपुर खीरी (UP) |
| उत्पादन क्षमता | 80,000 टन प्रति वर्ष (PLA बायोप्लास्टिक) |
| शिलान्यास | फरवरी 2025 (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा) |
| कमर्शियल उत्पादन | नवंबर 2026 |
| ग्रीन टेक्नोलॉजी | 100% रिन्यूएबल एनर्जी + Zero Liquid Discharge (ZLD) |
🧪 क्या है PLA और गन्ने से कैसे बनेगा प्लास्टिक?
PLA (Polylactic Acid) एक 100% बायोडिग्रेडेबल और कम्पोस्टेबल प्लास्टिक है। यह पारंपरिक पेट्रोलियम-आधारित प्लास्टिक का पूर्ण विकल्प है:
- 🌾 गन्ने से उत्पादन: गन्ने के रस और शीरे (Molasses) के फर्मेंटेशन से लैक्टिक एसिड बनता है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाला PLA बायोप्लास्टिक तैयार किया जाता है।
- 🥤 इस्तेमाल: इससे डिस्पोजेबल कप, प्लेट, कटलरी, फूड पैकेजिंग पाउच, बैग और कृषि मल्चिंग फिल्म बनाई जाती है।
- ♻️ 100% सुरक्षित: यह कचरे के ढेर में 6 महीने के भीतर मिट्टी में मिलकर पूरी तरह नष्ट हो जाता है — कोई प्लास्टिक प्रदूषण नहीं!
📦 लखनऊ कैंटोनमेंट बोर्ड से मिला पहला ऑर्डर
कंपनी ने अपने उत्पाद को ‘Balrampur Bioyug’ ब्रांड के तहत बाजार में उतारा है। प्लांट शुरू होने से पहले ही इसे सरकारी व निजी संस्थानों से शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। हाल ही में लखनऊ छावनी परिषद (Lucknow Cantonment Board) ने सिंगल-यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए बायोप्लास्टिक उत्पादों के बड़े ऑर्डर दिए हैं।
👨🌾 UP के गन्ना किसानों को क्या फायदा होगा?
इस बायोप्लास्टिक प्लांट से लखीमपुर और आसपास के लाखों गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा:
- गन्ने की मांग में भारी उछाल: चीनी और एथेनॉल के अलावा अब बायोप्लास्टिक के लिए भी गन्ने की स्थायी खपत होगी।
- मिल की वित्तीय मजबूती: बायोप्लास्टिक एक हाई-वैल्यू प्रोडक्ट है। मिलों की कमाई बढ़ने से किसानों का 14 दिन के अंदर गन्ना भुगतान सुनिश्चित होगा।
- रोजगार के अवसर: लखीमपुर क्षेत्र के स्थानीय युवाओं को हाई-टेक इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग में नए रोजगार मिलेंगे।
📢 पर्यावरण मानक: यह प्लांट 100% नवीकरणीय ऊर्जा से चलेगा और इसमें Zero Liquid Discharge (ZLD) सिस्टम लगा है, जिससे पानी का एक भी बूंद बाहर व्यर्थ नहीं बहेगा।
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