55 करोड़ का चेक बाउंस होते ही टूटी किसानों की उम्मीद, बहेड़ी केसर मिल की जमीन अब 24 अक्टूबर को नीलाम

मिल खरीदने का दावा हवा, 55 करोड़ का चेक बाउंस
बरेली जिले के बहेड़ी स्थित केसर चीनी मिल के गन्ना किसानों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। चीनी मिल खरीदने का दावा करने वाले अवध ग्रुप के चेयरमैन ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए 55 करोड़ रुपये और मिल कर्मचारियों के वेतन के लिए 11 करोड़ रुपये का जो चेक दिया था, वह बाउंस हो गया है। दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक इसी चेक की वजह से जिला प्रशासन ने चीनी मिल की कुर्क संपत्ति की नीलामी टाल दी थी। अब चेक बाउंस हो जाने के बाद प्रशासन ने कुर्क जमीन की नीलामी की तारीख 24 अक्टूबर तय कर दी है।
इस फैसले के बाद चीनी मिल के कर्मचारियों से लेकर प्रशासनिक हलके में खलबली मच गई है, और किसानों की उम्मीदें भी धूमिल होती दिख रही हैं। मिल पर किसानों का 165 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मूल्यांकन समिति की बैठक बुलाकर वर्तमान स्थिति पर चर्चा की, जिसके बाद सर्वसम्मति से नीलामी का फैसला लिया गया।
पूरी कहानी: 431 करोड़ के सौदे से बाउंस चेक तक
मामले की जड़ में वह सौदा है, जिसमें अवध ग्रुप ने 431 करोड़ रुपये में केसर चीनी मिल खरीदने का दावा किया था। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार मिल खरीदने वाली फर्म अवध फूड्स एंड मल्टी वेयर हाउस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन कम एमडी संजीव कपूर ने बताया था कि केसर इंटरप्राइजेज लिमिटेड बहेड़ी और उससे जुड़ी संपत्तियों के क्रय के लिए कुल 431 करोड़ रुपये का सौदा किया गया है। इसी राशि के भीतर मिल से जुड़ी लागू और अधिग्रहण के दायरे में आने वाली देनदारियों को निपटाने की जिम्मेदारी भी अवध फूड्स प्रबंधन ने स्वीकार की थी।
इसी दिशा में 23 सितंबर को कलेक्ट्रेट सभागार में 55 करोड़ रुपये के चेक दिए गए थे। बैठक में केसर इंटरप्राइजेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शरत मिश्र भी मौजूद थे। संजीव कपूर ने भरोसा दिलाया था कि बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान पेराई सत्र 2026-27 में चीनी मिल चलने से पहले कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर ग्राम मुड़िया मुकर्रमपुर स्थित कुर्क भूमि की नीलामी होती है, तो अधिग्रहण व्यवस्था और परिसंपत्तियों को लेकर अनावश्यक विवाद और जटिलता पैदा हो सकती है। उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए नीलामी स्थगित कर दी गई थी।
उस बैठक में जिलाधिकारी अविनाश सिंह, उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र, एडीएम एफआर संतोष कुमार सिंह, एडीएम सिटी डॉ. अविनाश त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी दिलीप कुमार सैनी, एसडीएम बहेड़ी गोपाल शर्मा और तहसीलदार बहेड़ी भानु प्रताप सिंह मौजूद रहे थे। यानी पूरे प्रशासन ने इस आश्वासन पर भरोसा करके नीलामी टाली थी।
किसानों का 165 करोड़ बकाया: आंकड़ा कहां पहुंचा
जागरण की खबर के अनुसार चीनी मिल पर किसानों का 165 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। किसानों को भुगतान दिलाने के लिए प्रशासन ने इससे पहले भी कड़े कदम उठाए थे। विगत 31 मई को चीनी मिल की 11.447 हेक्टेयर जमीन 28.05 करोड़ रुपये में नीलाम भी कराई गई थी, मगर कम कीमत का मुद्दा उठने के बाद वह नीलामी निरस्त कर दी गई थी।
इसके बाद नए सर्किल रेट के आधार पर दोबारा नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई थी। पिछले 25 सितंबर को नीलामी की तारीख भी तय हुई थी, लेकिन इसी बीच मिल के सौदे और 55 करोड़ के चेक की खबर सामने आई। अवध ग्रुप के चेयरमैन ने जिलाधिकारी से मुलाकात करके पेराई सत्र शुरू होने से पहले सारा बकाया चुकाने का आश्वासन दिया था। उन्हीं के आग्रह पर नीलामी टाल दी गई थी। किसानों को जल्द भुगतान मिलने के साथ-साथ इस सीजन में चीनी मिल चलने की भी उम्मीद जग गई थी, जो अब टूटती दिख रही है।
24 अक्टूबर की नीलामी: आगे क्या होगा
चेक बाउंस होने के बाद जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने गुरुवार को मूल्यांकन समिति की बैठक बुलाई। बैठक में वर्तमान स्थिति पर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि कुर्क की गई चीनी मिल की जमीन की नीलामी 24 अक्टूबर को कराई जाएगी। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नीलामी का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक बोलीदाता शामिल हों और अच्छी कीमत में जमीन की नीलामी हो सके।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार जिला गन्ना अधिकारी दिलीप कुमार सैनी ने बताया कि नीलामी की तारीख तय हो गई है और बहेड़ी तहसील प्रशासन नीलामी कराएगा। पिछली बार 28.05 करोड़ रुपये की नीलामी कम कीमत का मुद्दा उठने पर रद्द हुई थी, इसलिए इस बार प्रशासन बोली बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार पर जोर दे रहा है।
पेराई सत्र पर भी साया: क्या चलेगी मिल?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर नए पेराई सत्र पर पड़ता दिख रहा है। जागरण की खबर में साफ कहा गया है कि केसर चीनी मिल, बहेड़ी के नए पेराई सत्र में चल पाने की संभावना क्षीण होने लगी है।
गौरतलब है कि बरेली जिले में यही अकेला मामला नहीं है। नवाबगंज स्थित ओसवाल ओवरसीज लिमिटेड चीनी मिल का 180 करोड़ रुपये मूल्यांकन कराया जा चुका है और 22 अक्टूबर को उसकी नीलामी पहले से घोषित है। प्रशासन ने उस चीनी मिल पर ताला लगाकर वहां मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकलवा दिया था। यानी बरेली में दो बड़ी चीनी मिलें एक साथ संकट में हैं।
किसान क्या करें: अपने हक के लिए 4 जरूरी काम
- लिखित शिकायत दर्ज कराएं: गन्ना आयुक्त कार्यालय के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराएं। भुगतान में देरी पर ब्याज का भी नियम है — इसकी मांग भी रखें।
- ई-गन्ना ऐप पर नजर रखें: अपनी पर्ची, तौल और भुगतान की स्थिति ई-गन्ना ऐप या caneup.in पोर्टल पर नियमित देखते रहें, ताकि रिकॉर्ड में गड़बड़ी हो तो समय पर आपत्ति दर्ज हो सके।
- समिति की बैठक में शामिल हों: सहकारी गन्ना विकास समिति की बैठकों में जाकर बकाया भुगतान का मुद्दा उठाएं — केसर मिल मामले में समिति की ओर से ही पहले कानूनी कार्रवाई हुई थी।
- भ्रम फैलाने वालों से बचें: मिल खरीदने के दावों और चेक जैसे आश्वासनों पर भरोसा करने से पहले जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से आधिकारिक पुष्टि जरूर लें।
पूछे जाने वाले प्रश्न
बहेड़ी केसर चीनी मिल पर किसानों का कितना बकाया है?
दैनिक जागरण (8 अक्टूबर 2026) के अनुसार केसर चीनी मिल, बहेड़ी पर किसानों का 165 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है।
55 करोड़ का चेक किसने दिया था और क्यों बाउंस हुआ?
चीनी मिल खरीदने का दावा करने वाले अवध ग्रुप के चेयरमैन ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए 55 करोड़ रुपये और कर्मचारियों के वेतन के लिए 11 करोड़ रुपये का चेक दिया था, जो बाउंस हो गया।
कुर्क जमीन की नीलामी कब होगी?
मूल्यांकन समिति की बैठक में फैसला लिया गया है कि कुर्क की गई चीनी मिल की जमीन की नीलामी 24 अक्टूबर को कराई जाएगी। बहेड़ी तहसील प्रशासन नीलामी कराएगा।
क्या इस सीजन में बहेड़ी केसर मिल चलेगी?
जागरण की खबर के अनुसार नए पेराई सत्र में मिल के चल पाने की संभावना क्षीण होती दिख रही है।
नवाबगंज की ओसवाल मिल का क्या हाल है?
ओसवाल ओवरसीज लिमिटेड, नवाबगंज चीनी मिल का 180 करोड़ रुपये मूल्यांकन हो चुका है और 22 अक्टूबर को उसकी नीलामी पहले से घोषित है।
स्रोत: दैनिक जागरण (8 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (सितंबर 2026)
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