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बरेली: बहेड़ी-नवाबगंज मिलों की कुर्क संपत्ति की नीलामी 17 नवंबर को, बोलीदाताओं को मिले 15 दिन — बकाया भुगतान की उम्मीद जगी

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 2, 2026 • 6 min read
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बरेली: बहेड़ी-नवाबगंज मिलों की कुर्क संपत्ति की नीलामी 17 नवंबर को, बोलीदाताओं को मिले 15 दिन — बकाया भुगतान की उम्मीद जगी
अंतिम अपडेट: November 2, 2026 8:50 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बरेली के गन्ना किसानों के लिए एक ठोस तारीख सामने आ गई है। बहेड़ी और नवाबगंज चीनी मिलों की कुर्क की गई संपत्तियों की नीलामी अब 17 नवंबर को होगी। इससे पहले बोलीदाताओं की संख्या कम होने के कारण यह नीलामी टल गई थी। जिला प्रशासन ने बोलीदाताओं को 15 दिन का समय दिया है और मिल मालिक व प्रबंधन पर विधिक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।

डीएम की बैठक में क्या तय हुआ

अमर उजाला की 1 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में नीलामी कमेटी का विस्तार किया गया। इस कमेटी में अब एडीएम सिटी अविनाश त्रिपाठी, एसडीएम नवाबगंज सचिन यादव और तहसीलदार नवाबगंज सत्येंद्र कटियार को भी शामिल किया गया है। बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व और जिला गन्ना अधिकारी भी मौजूद रहे।

डीएम ने एसडीएम बहेड़ी को राजस्व संहिता नियमावली 2016 के प्रावधानों के तहत नीलामी की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब यह है कि नीलामी की जानकारी अधिक से अधिक संभावित बोलीदाताओं तक पहुंचाई जाए, ताकि पिछली बार जैसी स्थिति दोबारा न बने। प्रचार जितना व्यापक होगा, प्रतिस्पर्धा उतनी ही बढ़ेगी और संपत्ति का उचित मूल्य मिलने की संभावना भी उतनी ही अधिक होगी। किसानों के लिए यही सबसे बड़ा सवाल है, क्योंकि नीलामी से मिलने वाली राशि से ही बकाया भुगतान की राह खुलनी है।

मिल प्रबंधन पर विधिक कार्रवाई के निर्देश

डीएम ने गन्ना विकास समिति बहेड़ी के प्रभारी सचिव को वर्ष 2025-26 के बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान प्रकरण में मिल प्रबंधन के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने के लिए कहा है। इसके साथ ही एसडीएम बहेड़ी को चीनी मिल मालिक और निदेशक मंडल के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का यह रुख किसानों को यह भरोसा दिलाता है कि नीलामी के साथ-साथ कानूनी दबाव भी बना रहेगा। बकाया का मामला महीनों से खिंच रहा है, और प्राथमिकी से बात न बनने पर आरसी जारी कराकर कुर्की शुरू की गई थी।

पिछली नीलामी क्यों टली थी

17 नवंबर की नई तारीख को समझने के लिए 24 अक्टूबर की घटना को याद करना जरूरी है। अमर उजाला की 24 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, बहेड़ी की केसर चीनी मिल की कुर्क जमीन की नीलामी उस दिन फिर से नहीं हो सकी थी। नियमानुसार बोली लगाने वालों से साढ़े तीन करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट मांगा गया था। नीलामी में चार खरीदार पहुंचे थे, लेकिन सिर्फ एएनजी इंफ्रा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड, बरेली ने ही डिमांड ड्राफ्ट जमा किया था। बाकी तीन खरीदार चेक लेकर पहुंचे थे, जिन्हें प्रशासन ने स्वीकार नहीं किया, क्योंकि नियमों के अनुसार केवल डिमांड ड्राफ्ट ही मान्य था। अधिकारियों ने कहा था कि पूर्व में भी चीनी मिल की खरीद में चेक बाउंस हो चुका है। नीलामी के लिए कम से कम तीन पात्र खरीदार होना अनिवार्य था, इसलिए उसे स्थगित कर दिया गया।

जिस जमीन की नीलामी होनी है, उसे जिला प्रशासन ने 16 जुलाई 2025 को कुर्क किया था। यह ग्राम मुड़िया मुकर्रमपुर, नैनीताल रोड हाईवे किनारे स्थित 11.443 हेक्टेयर जमीन है। 31 मई को इसी जमीन की 28.05 करोड़ रुपये की नीलामी कम कीमत का मुद्दा उठने पर निरस्त हो चुकी है, इसलिए इस बार नए सर्किल रेट के आधार पर प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई है।

बकाया कितना है: 162 करोड़ या 170 करोड़

किसानों के मन में एक सवाल यह भी है कि आखिर बकाया कितना है। अमर उजाला की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट में बहेड़ी की केसर चीनी मिल की ओर से 162 करोड़ रुपये का बकाया बताया गया था। वहीं जागरण की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट में चीनी मिल पर 170 करोड़ रुपये बकाया होने का उल्लेख था। यह अंतर रिपोर्ट की तारीख, बकाया की गणना के दायरे और ब्याज या अन्य मदों के जुड़ने से हो सकता है। इसलिए सही तरीका यही है कि गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से अपने गांव और अपने नाम के बकाए की पुष्टि करें। रकम चाहे 162 करोड़ हो या 170 करोड़, किसी एक नीलामी से इसका पूरा भुगतान हो जाएगा, इसकी गारंटी कोई नहीं दे सकता।

किसानों का धरना और केंद्र छिनने की कार्रवाई

बकाया भुगतान को लेकर किसानों का गुस्सा अक्टूबर के आखिर में सड़क पर भी दिखा था। अमर उजाला की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, बकाया भुगतान न किए जाने से नाराज किसानों ने गन्ना समिति परिसर में धरना शुरू कर दिया था। इस धरने में करीब दो हजार किसान शामिल हुए थे। गन्ना समिति के अध्यक्ष राजेंद्र गंगवार ने आरोप लगाया था कि केसर चीनी मिल की नीयत ठीक नहीं है। जिला गन्ना अधिकारी दिलीप कुमार सहित अधिकारियों ने किसानों से वार्ता की थी।

उसी रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि मिल के क्रय केंद्र दूसरी मिलों को आवंटित कर दिए गए हैं। जब तक पूरा भुगतान नहीं होता, तब तक केंद्र आवंटन नहीं किया जाएगा। इसलिए इस सत्र में गन्ना दूसरी मिलों के केंद्रों पर जा सकता है, और पर्ची व केंद्र की जानकारी की पुष्टि पहले से कर लेना जरूरी है।

नीलामी से भुगतान कैसे मिलेगा और किसान क्या करें

नीलामी की सूचना का व्यापक प्रचार-प्रसार होगा, ताकि अधिक बोलीदाता हिस्सा ले सकें। बोली पूरी होने के बाद नीलामी की राशि से बकाया भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिसमें गन्ना समिति और जिला प्रशासन की भूमिका अहम होगी। किसानों को तीन बातों पर नजर रखनी चाहिए: नीलामी की सूचना की पुष्टि आधिकारिक सूचना से करें, भुगतान की सूची गन्ना समिति से मांगें, और किसी दलाल के यह कहने पर भरोसा न करें कि वह नीलामी से पहले ही भुगतान दिला देगा।

एक बात और साफ रखनी चाहिए। 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए अगेती किस्म का मूल्य 400 रुपये और सामान्य किस्म का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल था। नया एसएपी घोषित होने तक पिछले सत्र के भाव को इस सत्र का भाव न समझें। पर्ची और भुगतान की पर्ची संभालकर रखें। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 तथा एसएमएस शॉर्टकोड 51969 उपलब्ध हैं। उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, इसलिए बरेली की खबर को पूरे प्रदेश की स्थिति न समझें।

आपके सवाल

बहेड़ी और नवाबगंज मिलों की नीलामी कब होगी? 17 नवंबर को। पिछली नीलामी बोलीदाताओं की कमी से टली थी, इसलिए इस बार 15 दिन का समय दिया गया है।

नीलामी क्यों हो रही है? गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए कुर्क संपत्तियों की नीलामी हो रही है। केसर मिल पर अमर उजाला में 162 करोड़ और जागरण में 170 करोड़ रुपये के बकाए का उल्लेख था।

पिछली नीलामी क्यों टली थी? 24 अक्टूबर को चार खरीदार पहुंचे थे, लेकिन सिर्फ एक ने साढ़े तीन करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा किया था। बाकी तीन चेक लेकर पहुंचे थे, जो मान्य नहीं थे। कम से कम तीन पात्र खरीदार जरूरी थे, इसलिए नीलामी स्थगित हुई थी।

किसानों को भुगतान कब मिलेगा? नीलामी के बाद मिली राशि से भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। तारीख और प्राथमिकता समिति व प्रशासन तय करेंगे।

किसान अपना बकाया कैसे जांचें? अपनी गन्ना समिति से अपने नाम के बकाए की पुष्टि करें। टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी जानकारी मिल सकती है।

स्रोत: अमर उजाला (बरेली, 1 नवंबर 2026; 30 अक्टूबर 2026; 24 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (बरेली, 29 अक्टूबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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