बरेली में बारिश से पेराई 15 दिन टली: मिलों में 1.24 लाख क्विंटल चीनी, फिर भी बाजार में भाव 60 रुपये किलो — किसानों पर क्या असर होगा

बरेली के गन्ना किसान इस बार पेराई सत्र के कैलेंडर से ज्यादा आसमान की ओर देख रहे हैं। जिले के ज्यादातर गन्ना खेतों में पानी भरा है, बारिश और हवा से गन्ना जगह-जगह गिर चुका है, और कटाई-छोलाई का काम लगभग ठप पड़ा है। जिस पेराई सत्र को इस बार 15 दिन पहले शुरू करने की तैयारी थी, वह अब पिछले साल से करीब एक सप्ताह आगे खिसक सकता है — जिला गन्ना अधिकारी के मुताबिक मिलों के नवंबर के मध्य तक चालू होने के आसार हैं।
इस देरी का असर सिर्फ पेराई की तारीख पर नहीं पड़ेगा। खेत देर से खाली होने का मतलब है गेहूं की बुवाई का इष्टतम समय छोटा होना। और दूसरी ओर, जिले की दो चीनी मिलों में 1.24 लाख क्विंटल से ज्यादा चीनी का स्टॉक होने के बावजूद फुटकर बाजार में चीनी 60 रुपये किलो तक बिक रही है — मिल का भाव 45 से 47 रुपये किलो के मुकाबले। इस अंतर ने उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसानों के बीच भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
बारिश ने बिगाड़ा 15 दिन पहले पेराई का प्लान
जिले में इस बार पेराई सत्र पिछले साल के मुकाबले 15 दिन पहले शुरू करने की तैयारी थी। लेकिन बार-बार हो रही बारिश ने पूरा कार्यक्रम प्रभावित कर दिया। खेतों में पानी भरा होने के कारण गन्ने की कटाई और छिलाई में परेशानी आ रही है — ट्रैक्टर-ट्रॉली खेतों तक नहीं पहुंच पा रही और मजदूर गीले खेतों में कटाई नहीं कर पा रहे।
जिला गन्ना अधिकारी दिलीप सैनी के अनुसार, पिछले साल पेराई सत्र नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू हुआ था, लेकिन इस बार करीब एक सप्ताह की देरी होने की संभावना है और मिलों के नवंबर के मध्य तक चालू होने के आसार हैं। उपायुक्त गन्ना राजेश कुमार मिश्र ने भी कहा है कि खेतों में पानी भरा है, कटाई-छोलाई मुश्किल है और नवंबर के दूसरे सप्ताह में ही पेराई शुरू हो सकेगी।
गिरी हुई फसल से रिकवरी की भी चिंता
बारिश और हवा से सिर्फ कटाई ही नहीं रुकी है — जगह-जगह गन्ना गिर भी गया है। गिरे हुए गन्ने में चीनी की रिकवरी घटती है, क्योंकि जमीन के संपर्क में आने से गन्ना जल्दी खराब होने लगता है और उसके रस में चीनी की मात्रा कम हो जाती है। मिलों के लिए भी यह घाटे का सौदा है।

बरेली: बारिश से पेराई टली, चीनी 60 ₹/किलो
पढ़ें →किसानों के लिए चिंता दोहरी है। एक ओर कटाई रुकी है तो दूसरी ओर गिरा हुआ गन्ना देर से मिल पहुंचने पर उसका वजन और चीनी दोनों घटते हैं। इसलिए बरेली के किसान चाहते हैं कि खेत सूखते ही मिलें तेजी से गन्ना उठाना शुरू कर दें।
गेहूं की बुवाई पर पड़ेगा सीधा असर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए पेराई की तारीख रबी सीजन के कैलेंडर से जुड़ी है। गन्ना खेत से जितनी जल्दी हटेगा, गेहूं की बुवाई उतनी जल्दी हो सकेगी — और बुवाई का इष्टतम समय नवंबर का पहला पखवाड़ा माना जाता है। यही वजह है कि मिलें इस बार पेराई 10-15 दिन पहले शुरू करना चाहती थीं, ताकि किसानों को समय पर गेहूं बोने का मौका मिले। बारिश ने इस गणित को उलट दिया है। किसानों को सलाह है कि जिन खेतों से गन्ना हट चुका है, वहां पानी की निकासी करके जमीन तैयार रखें, ताकि पेराई के तुरंत बाद बुवाई में देरी न हो।## मिलों में 1.24 लाख क्विंटल चीनी, फिर भी 60 रुपये किलो क्यों
बरेली की सेमीखेड़ा चीनी मिल में 57 हजार क्विंटल और फरीदपुर स्थित द्वारिकेश शुगर मिल में 67 हजार क्विंटल चीनी का स्टॉक बताया गया है — दोनों को मिलाकर कुल 1.24 लाख क्विंटल। मिलों में चीनी का भाव 4,500 से 4,700 रुपये प्रति क्विंटल, यानी 45 से 47 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है।
इसके बावजूद फुटकर बाजार में चीनी 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। जिले में रोज करीब पांच हजार क्विंटल चीनी की खपत है, और श्यामगंज मंडी से शाहजहांपुर, बदायूं, पीलीभीत और उत्तराखंड तक चीनी की आपूर्ति होती है। मिल से 45-47 रुपये किलो में मिलने वाली चीनी दुकान तक पहुंचते-पहुंचते 60 रुपये की कैसे हो जाती है — यह सवाल उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसानों के बीच भी उठ रहा है।
जिला गन्ना अधिकारी डी.के. सैनी का कहना है कि चीनी मिलों से 4,500 रुपये क्विंटल थोक में चीनी दी जा रही है, लेकिन खरीदार नहीं आ रहे हैं — मिलों से उठान ही नहीं हो रहा। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक मिल कर्मियों और कुछ व्यापारियों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है। त्योहारों के मौसम में मिठाइयों की बढ़ी मांग के बीच यह अंतर उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा बोझ डाल रहा है।
यूपी की तस्वीर: पश्चिम में 20 अक्टूबर, सीतापुर में नवंबर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं — पिछले साल से करीब 10 दिन पहले। सीतापुर में मिलों की करीब 80 फीसदी मरम्मत पूरी हो चुकी है और वहां अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह के बीच पेराई शुरू होने की उम्मीद है।
इसके मुकाबले बरेली का कार्यक्रम सबसे ज्यादा पिछड़ता दिख रहा है, और इसकी वजह सिर्फ बारिश है। प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से पश्चिमी यूपी में 71 से ज्यादा हैं। गन्ना आयुक्त कार्यालय ने सभी जिलों में पेराई की तैयारियों की निगरानी तेज कर दी है, लेकिन मौसम किसी के हाथ में नहीं है।
किसानों के लिए आगे का रास्ता: अभी क्या करें
पेराई की तारीख भले ही टल रही हो, लेकिन किसान इस इंतजार को तैयारी में बदल सकते हैं। पहला काम है खेतों से पानी की निकासी — नालियों से पानी निकालकर जमीन सुखाने की कोशिश करें, क्योंकि गीले खेत का कटा गन्ना मिल तक पहुंचने में और खराब होगा।
दूसरा, गन्ना सर्वे और सट्टा-पर्ची के रिकॉर्ड की जांच कर लें। ई-गन्ना ऐप पर अपना कैलेंडर और पर्ची की स्थिति देख लें, और बैंक खाता सक्रिय व आधार से लिंक रखें — भुगतान में देरी की सबसे आम वजह निष्क्रिय खाते या गलत खाता विवरण होते हैं।
जिन किसानों का गन्ना गिर चुका है, वे उसे ज्यादा दिन खेत में न रखें — गिरा हुआ गन्ना जितनी जल्दी मिल पहुंचे, उतना ही बेहतर। गन्ना समिति से भी संपर्क में रहें, क्योंकि पेराई की तारीख तय होते ही पर्ची का वितरण उसी के हिसाब से होगा।
आपके सवाल
बरेली में पेराई सत्र कब शुरू होगा? जिला गन्ना अधिकारी के मुताबिक बारिश के कारण पेराई में करीब एक सप्ताह की देरी की संभावना है और मिलों के नवंबर के मध्य तक चालू होने के आसार हैं। उपायुक्त गन्ना ने नवंबर के दूसरे सप्ताह में पेराई शुरू होने की बात कही है। पिछले साल पेराई नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू हुई थी।
बारिश से गन्ने की कटाई क्यों रुक गई है? खेतों में पानी भरा होने से कटाई और छोलाई में परेशानी आ रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉली गीले खेतों में नहीं जा पा रही और मजदूरों के लिए भी काम मुश्किल हो गया है। हवा से गन्ना गिरने से फसल को भी नुकसान हुआ है।
मिलों में चीनी का स्टॉक होने के बावजूद भाव 60 रुपये किलो क्यों है? सेमीखेड़ा और फरीदपुर मिलों में कुल 1.24 लाख क्विंटल चीनी है और थोक भाव 45-47 रुपये किलो है, लेकिन मिलों से उठान नहीं हो रहा। थोक-फुटकर की कड़ी में परिवहन-भंडारण खर्च जुड़ता है और मिलीभगत के आरोप भी हैं — इससे फुटकर भाव 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
पेराई में देरी से किसानों को क्या नुकसान होगा? सबसे बड़ा नुकसान गेहूं की बुवाई में देरी का है — खेत देर से खाली होगा तो रबी की बुवाई का इष्टतम समय छोटा हो जाएगा। गिरे हुए गन्ने का वजन और चीनी की मात्रा भी घटती है।
2026-27 सीजन के लिए गन्ने का भाव (एसएपी) घोषित हुआ है? अभी नहीं। उत्तर प्रदेश में 2025-26 सीजन के लिए एसएपी अगेती किस्म पर 400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित है, लेकिन 2026-27 सीजन के लिए नई एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। किसान संगठन भाव बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
स्रोत: अमृत विचार (बरेली, 19 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (बरेली, 14 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (सीतापुर रिपोर्ट), द टाइम्स ऑफ इंडिया (पश्चिमी यूपी पेराई रिपोर्ट)
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