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40 गन्ना केंद्र छिने, 162 करोड़ बकाया: बहेड़ी की केसर चीनी मिल पर गन्ना आयुक्त की बड़ी कार्रवाई, 34 हजार किसानों का गन्ना अब फरीदपुर-मीरगंज को

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 23, 2026 • 6 min read
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40 गन्ना केंद्र छिने, 162 करोड़ बकाया: बहेड़ी की केसर चीनी मिल पर गन्ना आयुक्त की बड़ी कार्रवाई, 34 हजार किसानों का गन्ना अब फरीदपुर-मीरगंज को
अंतिम अपडेट: October 23, 2026 12:35 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बरेली के बहेड़ी क्षेत्र में केसर इंटरप्राइजेज चीनी मिल से जुड़े करीब 34 हजार गन्ना किसानों के लिए गन्ना आयुक्त का ताजा आदेश बड़ी राहत और चेतावनी, दोनों लेकर आया है। गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए तीन आदेश जारी करके किसानों का 159.91 करोड़ रुपये बकाया रखने वाली इस मिल का अधिकांश गन्ना क्षेत्र काट दिया है। अब केसर मिल के पास सिर्फ 9 गेट केंद्र बचे हैं, जबकि पिछले साल उसके पास 56 गन्ना केंद्र थे।

काटा गया गन्ना क्षेत्र अब द्वारिकेश की फरीदपुर मिल और धामपुर की मीरगंज मिल को आवंटित कर दिया गया है, और दोनों को पेराई सत्र 2026-27 के लिए स्पष्ट लक्ष्य भी दे दिया गया है।

गन्ना आयुक्त के तीन आदेशों में क्या-क्या तय हुआ

गन्ना आयुक्त के आदेशों के मुताबिक केसर मिल पर भुगतान बकाया की वजह से उसका गन्ना क्षेत्र घटाकर मात्र 9 गेट केंद्रों तक सीमित कर दिया गया है। पिछले साल मिल के पास 56 गन्ना केंद्र थे, जिनमें से पहले छह केंद्र हटाए गए थे और अब इस बार एक साथ 40 केंद्र छीन लिए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इतना बड़ा बकाया रखने वाली मिल को बड़ा क्षेत्र देना किसानों के हित में नहीं था।

आयुक्त ने प्रदेश की सभी चीनी मिलों को भी सख्त निर्देश दिए हैं — 14 दिन के भीतर किसानों से अनुबंध करें और गन्ने का भुगतान समय पर करें। यह साफ संकेत है कि इस पेराई सत्र में भुगतान में देरी बर्दाश्त नहीं होगी।

162 करोड़ का बकाया: पूरा हिसाब-किताब

आदेशों में केसर मिल पर बकाया की पूरी तालिका दर्ज है। आयुक्त के मुताबिक मिल पर नौ साल की देरी की तालिका बनी हुई है। पेराई सत्र 2024-25 का 142.36 करोड़ रुपये और 2025-26 का 17.55 करोड़ रुपये मिलाकर कुल 159.91 करोड़ रुपये का बकाया है, जो ब्याज सहित करीब 162 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

इतना बड़ा बकाया इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मिल की अपनी हालत भी ठीक नहीं रही। पिछले पेराई सत्र में केसर मिल सिर्फ 98 दिन ही चल पाई और 134.50 लाख क्विंटल के लक्ष्य में से केवल 55.31 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई ही हो सकी। यानी लक्ष्य का आधा भी गन्ना नहीं पेरा जा सका। इसके बाद 29 सितंबर को एनएसआई कानपुर की जांच में मिल की मरम्मत महज 37 से 45 प्रतिशत ही पाई गई।

इसी बीच 8 सितंबर को मिल बेचने का एमओयू होने और 23 सितंबर को 55 करोड़ रुपये का चेक बाउंस होने की घटनाओं ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी थी। इन्हीं सब कारणों को देखते हुए गन्ना आयुक्त ने करीब 34 हजार किसानों के हित में क्षेत्र काटने का फैसला लिया।

फरीदपुर और मीरगंज को मिला गन्ना: पूरा ब्योरा

बहेड़ी से काटे गए गन्ना केंद्रों का बंटवारा दो मिलों में किया गया है। द्वारिकेश की फरीदपुर मिल को कुल 33,455 हेक्टेयर क्षेत्र में 245.62 लाख क्विंटल का पेराई लक्ष्य दिया गया है, जबकि धामपुर की मीरगंज मिल को 30,684 हेक्टेयर क्षेत्र में 229.30 लाख क्विंटल का लक्ष्य मिला है।

फरीदपुर को बहेड़ी के 8 बड़े गेट केंद्र मिले हैं, जिनमें शकरस, मंडनपुर, जोखनपुर, सैदपुर बुजुर्ग, मोहम्मदपुर गोटिया, इटौआ धुरा, धमीपुर और मुड़िया मुकर्रमपुर शामिल हैं। वहीं मीरगंज को लखा, मवई जैरेल, चंगासी, मनकरा, बरसावा, पचदौरा, बीजामऊ समेत दर्जनों गन्ना केंद्र आवंटित किए गए हैं।

इन केंद्रों के किसान अब अपना गन्ना केसर मिल के बजाय इन्हीं दोनों मिलों को देंगे। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने गन्ना सट्टे और पर्ची की स्थिति संबंधित मिल के क्रय केंद्र या गन्ना समिति से जरूर सत्यापित कर लें, ताकि पेराई शुरू होने पर कोई परेशानी न हो।

भाजपा नेता की प्रतिक्रिया: अधिकारियों पर निशाना

इस कार्रवाई पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई है। भाजपा नेता और गन्ना समिति के पूर्व डायरेक्टर विनोद चौधरी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उत्तर प्रदेश में चीनी उद्योग बंदी की कगार पर है। उन्होंने कहा कि जब भूसा रेड्डी प्रमुख सचिव थे, तब कोई फैक्ट्री बंद नहीं होने दी गई। विनोद चौधरी ने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि गन्ने के उच्च अधिकारी विपक्ष के एजेंडे पर काम कर रहे हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में संज्ञान लेने की मांग की है।

किसानों की मांग: संयुक्त बैठक और ठोस कार्रवाई

केसर मिल के बकाए को लेकर किसान संगठनों की मांग भी तेज हो गई है। किसानों की मांग है कि जिला प्रशासन, गन्ना विभाग, मिल प्रबंधन और किसान प्रतिनिधियों को एक साथ बैठाकर तत्काल बैठक की जाए और भुगतान की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जाए। किसानों का कहना है कि यदि भुगतान में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाए।

किसानों का यह भी कहना है कि उन्हें अब तक जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान नहीं मिला है। बहेड़ी और बरेली के किसान आश्वासन नहीं, बल्कि अपनी मेहनत की कमाई और ठोस समाधान चाहते हैं।

34 हजार किसानों के लिए आगे का रास्ता

गन्ना आयुक्त के इस फैसले से केसर मिल से जुड़े किसानों को दोहरा संदेश मिला है। एक तरफ उनका गन्ना क्षेत्र अब फरीदपुर और मीरगंज जैसी भुगतान में बेहतर ट्रैक रिकॉर्ड वाली मिलों को मिल गया है, जिससे इस सत्र में समय पर पेराई और भुगतान की उम्मीद बढ़ी है। दूसरी तरफ पुराना 162 करोड़ का बकाया अभी भी अटका हुआ है, जिसकी वसूली के लिए प्रशासनिक कार्रवाई जारी है।

किसानों को चाहिए कि वे अपना गन्ना सट्टा और पर्ची कैलेंडर ई-गन्ना ऐप या caneup.in पोर्टल पर जांचते रहें। यदि केंद्र बदलने से पर्ची में गड़बड़ी दिखे, तो तुरंत अपनी गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: केसर चीनी मिल बहेड़ी के कितने गन्ना केंद्र काटे गए हैं? उत्तर: गन्ना आयुक्त ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए केसर मिल के 40 गन्ना केंद्र काट दिए हैं। अब मिल के पास सिर्फ 9 गेट केंद्र बचे हैं, जबकि पिछले साल उसके पास 56 केंद्र थे।

प्रश्न: केसर मिल पर किसानों का कितना बकाया है? उत्तर: गन्ना आयुक्त के आदेश के मुताबिक मिल पर कुल 159.91 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसमें 2024-25 का 142.36 करोड़ और 2025-26 का 17.55 करोड़ शामिल है। ब्याज सहित यह रकम करीब 162 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

प्रश्न: बहेड़ी के किसानों का गन्ना अब किस मिल को जाएगा? उत्तर: काटे गए केंद्रों का गन्ना द्वारिकेश की फरीदपुर मिल (245.62 लाख क्विंटल लक्ष्य) और धामपुर की मीरगंज मिल (229.30 लाख क्विंटल लक्ष्य) को आवंटित किया गया है।

प्रश्न: केसर मिल का क्षेत्र क्यों काटा गया? उत्तर: 162 करोड़ के बकाए के साथ-साथ मिल पिछले सत्र में सिर्फ 98 दिन चली, लक्ष्य का आधा भी गन्ना नहीं पेर सकी, एनएसआई जांच में मरम्मत 37-45 प्रतिशत मिली और 55 करोड़ का चेक बाउंस हुआ। इन्हीं कारणों से करीब 34 हजार किसानों के हित में यह फैसला लिया गया।

प्रश्न: किसान बकाया भुगतान की शिकायत कहां करें? उत्तर: किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा अपनी गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से भी संपर्क किया जा सकता है।

स्रोत: अमर उजाला (21 अक्टूबर 2026), Need24 Digital (23 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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