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35 करोड़ की नीलामी टली, तहसील में हंगामा: बरेली की केसर मिल के किसानों का गन्ना भुगतान फिर लटका, सोमवार पर टिकी आस

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 26, 2026 • 6 min read
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35 करोड़ की नीलामी टली, तहसील में हंगामा: बरेली की केसर मिल के किसानों का गन्ना भुगतान फिर लटका, सोमवार पर टिकी आस
अंतिम अपडेट: October 26, 2026 8:51 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बहेड़ी तहसील परिसर में शनिवार को वह हुआ, जिसकी आशंका केसर चीनी मिल से जुड़े किसानों को पहले से थी। मिल की जमीन की नीलामी टल गई, और गन्ने के बकाया भुगतान की आस लगाए बैठे किसानों का गुस्सा प्रदर्शन में बदल गया। काफी देर तक परिसर में गहमागहमी बनी रही, और आखिर में अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार के आश्वासन पर किसान शांत हुए। अब सबकी नजर आज सोमवार पर है।

यह खबर सिर्फ एक नीलामी के टलने की नहीं है। यह उन हजारों किसानों की कहानी है, जो लंबे समय से बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे हैं, और त्योहार के मौके पर नीलामी से भुगतान का रास्ता साफ होने की उम्मीद टूटना उनके लिए दोहरी मार जैसा है।

24 अक्टूबर को तहसील में क्या हुआ

बहेड़ी के मुड़िया मुकर्रमपुर स्थित केसर शुगर मिल की 11.443 हेक्टेयर जमीन की नीलामी के लिए 24 अक्टूबर की तारीख तय थी। जमीन का न्यूनतम मूल्य करीब 35 करोड़ रुपये रखा गया था। किसानों को उम्मीद थी कि जमीन की बिक्री से बकाया गन्ना भुगतान मिलने का रास्ता साफ होगा। इसी आस में किसान और किसान नेता तहसील परिसर पहुंचे थे।

नीलामी में चार खरीदार पहुंचे: किच्छा निवासी ग्यारसी लाल अग्रवाल, रुद्रपुर निवासी पुनीत अग्रवाल की एपी ट्रेडर्स, एसएनजी इंफ्रा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड और किच्छा निवासी अजय पाल यादव। लेकिन डिमांड ड्राफ्ट सिर्फ एसएनजी इंफ्रा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड की ओर से ही जमा किया गया। बाकी तीन की ओर से डिमांड ड्राफ्ट जमा नहीं हुआ, इसलिए नीलामी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

नीलामी निरस्त होने की जानकारी मिलते ही किसानों में नाराजगी फैल गई, और किसान नेताओं ने तहसील परिसर में विरोध जताया।

कम से कम तीन खरीदार क्यों जरूरी थे

अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार ने नीलामी रुकने की वजह साफ बताई। उनके मुताबिक नीलामी के तहत कम से कम तीन खरीदारों की भागीदारी जरूरी होती है। चार खरीदारों के पहुंचने के बावजूद सिर्फ एक के डिमांड ड्राफ्ट जमा करने के कारण नीलामी नहीं हो सकी।

एडीएम ने किसानों को आश्वासन दिया है कि अगर सोमवार को चारों खरीदार डिमांड ड्राफ्ट के साथ पहुंचते हैं, तो नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस बात पर किसान राजी हो गए हैं। लेकिन यह आश्वासन शर्त के साथ जुड़ा है। सोमवार को खरीदारों का डिमांड ड्राफ्ट के साथ पहुंचना ही इस प्रक्रिया की अगली कड़ी तय करेगा।

35 करोड़ की जमीन और किसानों की उम्मीद का जुड़ाव

किसानों की नाराजगी का बड़ा कारण यह है कि नीलामी को वे अपने बकाए की वसूली से जोड़कर देख रहे हैं। उनकी उम्मीद थी कि 35 करोड़ रुपये के न्यूनतम मूल्य वाली जमीन की बिक्री से भुगतान का रास्ता खुलेगा। जब प्रक्रिया ही आगे नहीं बढ़ी, तो यह उम्मीद भी फिलहाल अटक गई।

केसर मिल का बकाया: पहले से चल रही बड़ी कहानी

केसर मिल के किसानों की परेशानी नई नहीं है। गन्ना आयुक्त के आदेशों के मुताबिक इस मिल पर पेराई सत्र 2024-25 का 142.36 करोड़ रुपये और 2025-26 का 17.55 करोड़ रुपये मिलाकर कुल 159.91 करोड़ रुपये का बकाया दर्ज है, जो ब्याज सहित करीब 162 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इसी बकाए के चलते पेराई सत्र 2026-27 के लिए मिल के 40 गन्ना केंद्र काट दिए गए थे, और अब उसके पास सिर्फ 9 गेट केंद्र बचे हैं, जबकि पिछले साल 56 केंद्र थे।

काटे गए केंद्रों का गन्ना द्वारिकेश की फरीदपुर मिल और धामपुर की मीरगंज मिल को दिया गया था। यानी इस सत्र में बहेड़ी के बड़ी संख्या में किसानों का गन्ना अब इन्हीं दोनों मिलों को जाएगा। नए सत्र की व्यवस्था भले ही दूसरी मिलों को मिल गई हो, लेकिन पुराना बकाया अभी भी अटका है। पिछले सत्र में केसर मिल सिर्फ 98 दिन ही चल पाई थी।

आज सोमवार को क्या देखना होगा

आज सोमवार को सबसे पहला सवाल यही होगा कि क्या चारों खरीदार डिमांड ड्राफ्ट के साथ तहसील पहुंचते हैं। अगर ऐसा होता है, तो नीलामी आगे बढ़ सकती है। अगर फिर से डिमांड ड्राफ्ट की कमी रहती है, तो प्रक्रिया एक बार फिर अटक सकती है।

किसानों को सलाह है कि वे किसी अफवाह पर भरोसा न करें, और नीलामी की स्थिति तहसील प्रशासन या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से ही जानें। सोमवार को प्रक्रिया आगे बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भुगतान तुरंत खातों में आ जाएगा।

केसर मिल के किसानों को अभी क्या करना चाहिए

पहला काम यह है कि जिन किसानों का गन्ना क्षेत्र फरीदपुर या मीरगंज मिल को मिला है, वे अपना गन्ना सट्टा और पर्ची कैलेंडर जरूर सत्यापित कर लें। केंद्र बदलने से पर्ची में गड़बड़ी की आशंका रहती है, इसलिए संबंधित मिल के क्रय केंद्र या गन्ना समिति से जांचना सबसे सुरक्षित तरीका है।

दूसरा काम यह है कि पुराने बकाए से जुड़े कागजात संभालकर रखें। गन्ना आपूर्ति की पर्चियां और भुगतान की रसीदें भविष्य में काम आ सकती हैं।

तीसरा काम यह है कि शिकायत के लिए सही रास्ता अपनाएं। किसान अपनी शिकायत जिला गन्ना अधिकारी या गन्ना समिति के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। गन्ना किसानों के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 भी उपलब्ध हैं। किसी अनजान नंबर पर अपनी निजी जानकारी या बैंक विवरण साझा न करें।

यूपी के बाकी किसानों के लिए इस घटना का संकेत

बरेली की यह घटना सिर्फ एक जिले की खबर नहीं है। उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं, और पेराई सत्र 2026-27 में भुगतान की समयबद्धता हर जिले के किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल है। गन्ना आयुक्त ने हाल में सभी मिलों को 14 दिन के भीतर किसानों से अनुबंध करने और समय पर भुगतान करने के सख्त निर्देश भी दिए थे।

आने वाले दिनों में तीन बातों पर नजर रहेगी: सोमवार को नीलामी आगे बढ़ती है या नहीं, बोली और स्वीकृति की प्रक्रिया कैसी रहती है, और पुराने बकाए की वसूली के लिए प्रशासन कौन से कदम उठाता है। किसानों के लिए अभी धैर्य के साथ-साथ सतर्कता सबसे जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: बरेली की केसर मिल की नीलामी क्यों टल गई? उत्तर: 24 अक्टूबर की नीलामी में चार खरीदार पहुंचे, लेकिन सिर्फ एक ने डिमांड ड्राफ्ट जमा किया। कम से कम तीन खरीदारों की भागीदारी जरूरी होती है, इसलिए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

प्रश्न: किस जमीन की नीलामी होनी थी और न्यूनतम मूल्य कितना था? उत्तर: बहेड़ी के मुड़िया मुकर्रमपुर स्थित केसर मिल की 11.443 हेक्टेयर जमीन की नीलामी होनी थी, जिसका न्यूनतम मूल्य करीब 35 करोड़ रुपये था।

प्रश्न: एडीएम ने किसानों को क्या आश्वासन दिया है? उत्तर: अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार ने कहा है कि अगर सोमवार को चारों खरीदार डिमांड ड्राफ्ट के साथ पहुंचते हैं, तो नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

प्रश्न: केसर मिल पर किसानों का कितना बकाया है? उत्तर: गन्ना आयुक्त के आदेशों के मुताबिक 159.91 करोड़ रुपये का बकाया दर्ज है, जो ब्याज सहित करीब 162 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

प्रश्न: केसर मिल के किसानों का गन्ना अब किस मिल को जाएगा? उत्तर: पेराई सत्र 2026-27 के लिए केसर मिल के 40 केंद्र काटकर फरीदपुर और मीरगंज मिल को दिए गए हैं।

स्रोत: ईटीवी भारत (25 अक्टूबर 2026), न्यूज़ वॉक्स इंडिया; पृष्ठभूमि के लिए गन्ना आयुक्त के आदेशों पर केनअप की 23 अक्टूबर 2026 की खबर।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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