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70 करोड़ बकाए पर बरेली की ओसवाल चीनी मिल सील: 22 अक्टूबर को नीलामी, गेट पर नोटिस चस्पा — कब मिलेगा किसानों का पैसा

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 2, 2026 • 6 min read
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70 करोड़ बकाए पर बरेली की ओसवाल चीनी मिल सील: 22 अक्टूबर को नीलामी, गेट पर नोटिस चस्पा — कब मिलेगा किसानों का पैसा
अंतिम अपडेट: October 2, 2026 7:35 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

नवाबगंज, बरेली। किसानों के करीब 70 करोड़ रुपये के गन्ना बकाए पर प्रशासन ने गुरुवार (1 अक्टूबर 2026) को बड़ा कदम उठाते हुए ओसवाल चीनी मिल को सील कर दिया। एसडीएम सचिन यादव और जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी के नेतृत्व में राजस्व और गन्ना विभाग की टीम मिल परिसर पहुंची, वहां मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकाला और नियम अनुसार मिल को सील कर दिया। इसके साथ ही मिल की नीलामी के लिए 22 अक्टूबर की तारीख तय कर दी गई है और नीलामी का नोटिस मिल गेट पर चस्पा कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि नीलामी से मिलने वाली रकम से किसानों के बरसों से अटके बकाये का भुगतान किया जाएगा।

कैसे हुई सीलिंग की कार्रवाई

गुरुवार को एसडीएम सचिन यादव और डीसीओ डीके सैनी के नेतृत्व में राजस्व विभाग और गन्ना विभाग की संयुक्त टीम ओसवाल चीनी मिल परिसर पहुंची। टीम ने पहले मिल परिसर का निरीक्षण किया, फिर वहां मौजूद मिल कर्मियों को मिल से बाहर निकालने के बाद नियम अनुसार कार्रवाई करते हुए चीनी मिल को सील कर दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई के दौरान मिल परिसर में मौजूद कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। एसडीएम सचिन यादव ने बताया कि किसानों का बकाया भुगतान न करने पर मिल को सील किया गया है और 22 अक्टूबर को मिल की नीलामी की जाएगी, जिसके लिए मिल गेट पर नोटिस चस्पा करा दी गई है।

70 करोड़ का बकाया कैसे जमा हुआ

नवाबगंज चीनी मिल पर गन्ना किसानों का भुगतान पिछले कई वर्षों से लंबित चल रहा है। पेराई सत्र 2023-24 के दौरान मिल पर किसानों का कुल 107 करोड़ 12 लाख रुपये बकाया था। इसमें से मिल प्रबंधन ने 91 करोड़ 64 लाख रुपये का भुगतान तो कर दिया, लेकिन फिर भी 15 करोड़ 48 लाख रुपये की राशि बकाया रह गई। इसके बाद पेराई सत्र 2024-25 में मिल ने किसानों से 39 करोड़ 45 लाख रुपये का गन्ना तो खरीदा, लेकिन इस बार एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया। इससे बकाया बढ़कर सीधे 54 करोड़ 93 लाख रुपये हो गया। इस मूल बकाए में जब ब्याज की राशि जोड़ी गई, तो पूरा आंकड़ा बढ़कर लगभग 70 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। किसान लगातार मिल प्रबंधन और प्रशासन से भुगतान कराने की मांग करते रहे, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

22 अक्टूबर को नीलामी, डीएम ने की समीक्षा बैठक

नीलामी की तारीख तय होने के बाद डीएम अविनाश सिंह ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में डीएम ने नीलामी से जुड़ी सभी तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नीलामी की तारीख और शर्तों का समाचार पत्रों, डिजिटल और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग नीलामी प्रक्रिया में भाग ले सकें। उन्होंने चीनी मिल गेट के अलावा तहसील, प्रमुख चौराहों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पोस्टर और बैनर लगवाने के निर्देश भी दिए। डीएम ने नीलामी प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही न बरतने और सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने को कहा। बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व संतोष कुमार सिंह, एडीएम सिटी अविनाष त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी, एसडीएम नवाबगंज सचिन यादव, तहसीलदार नवाबगंज सतेंद्र कटियार, एससीडीआई मणिकांत और गन्ना समिति की सचिव मेघा चतुर्वेदी मौजूद रहे।

180 करोड़ का मूल्यांकन, खरीदार की तलाश तेज

मिल की सही कीमत आंकने के लिए पुणे स्थित प्रसिद्ध बसंत दादा शुगर इंस्टीट्यूट की तीन सदस्यीय तकनीकी विशेषज्ञ टीम को बरेली भेजा गया था। इस टीम ने मिल परिसर और उसकी संपत्तियों का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद पूरी चीनी मिल की कीमत करीब 180 करोड़ रुपये आंकी है। जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी ने स्पष्ट किया है कि अब सिर्फ जमीन के एक हिस्से की नहीं, बल्कि पूरी चीनी मिल को बेचने की प्रक्रिया गति पकड़ चुकी है। इस पूरी बिक्री प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू रूप से चलाने के लिए जिलाधिकारी अविनाश सिंह के निर्देश पर एसडीएम नवाबगंज सचिन यादव की अध्यक्षता में एक विशेष प्रशासनिक कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी वर्तमान में देश भर के संभावित खरीदारों और निवेशकों की तलाश कर रही है। जिला प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि मिल की इस बड़ी बिक्री से मिलने वाली राशि से गन्ना किसानों के कई वर्षों से अटके बकाये का भुगतान शत-प्रतिशत पूरा हो सकेगा।

कुर्की से एफआईआर तक, पहले क्या-क्या हुआ

यह पहली बार नहीं है जब प्रशासन ने ओसवाल मिल पर सख्त रुख अपनाया है। किसानों के भुगतान को लेकर पिछले तीन वर्षों से प्रशासन लगातार मिल प्रबंधन पर दबाव बना रहा था। बावजूद इसके संतोषजनक भुगतान न होने पर शासन के निर्देश पर सख्त कानूनी कार्रवाई की गई। मिल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, इसके बाद आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी करते हुए मिल की भूमि को कुर्क करने की कार्रवाई अमल में लाई गई। भुगतान की स्थिति पूरी तरह विफल रहने के कारण पिछले पेराई सत्र में इस मिल को किसी भी तरह का गन्ना आवंटित नहीं किया गया था। तमाम प्रशासनिक प्रयासों के बेनतीजा रहने के बाद अब मिल की पूरी संपत्ति को नीलाम कर या बेचकर भुगतान चुकाने का रास्ता चुना गया है।

किसानों का पैसा कब मिलेगा, अब क्या करें

प्रशासन का साफ कहना है कि 22 अक्टूबर की नीलामी से जो रकम आएगी, वह सबसे पहले किसानों के बकाये के भुगतान में लगेगी। अगर नीलामी में उम्मीद के मुताबिक बोली आती है तो 180 करोड़ के मूल्यांकन वाली मिल से 70 करोड़ का बकाया चुकाना संभव है, लेकिन प्रक्रिया में समय लगेगा। किसानों को सलाह है कि वे अपने बैंक खाते की केवाईसी और मोबाइल नंबर अपडेट रखें ताकि भुगतान में कोई तकनीकी अड़चन न आए। अगर किसी किसान को बकाया भुगतान से जुड़ी कोई शिकायत है तो वह गन्ना एवं चीनी उत्तर प्रदेश के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क कर सकता है। इसके अलावा अपना गन्ना बकाया और भुगतान की स्थिति caneup पोर्टल पर ऑनलाइन भी देखी जा सकती है — हमारी गाइड गन्ना भुगतान स्थिति ऑनलाइन कैसे चेक करें में पूरी प्रक्रिया बताई गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ओसवाल चीनी मिल को कब सील किया गया?

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को एसडीएम सचिन यादव और डीसीओ डीके सैनी के नेतृत्व में राजस्व और गन्ना विभाग की टीम ने मिल को सील किया।

किसानों का कुल बकाया कितना है?

मिल पर किसानों का करीब 70 करोड़ रुपये बकाया है — मूल बकाया 54 करोड़ 93 लाख रुपये था, जिसमें ब्याज जुड़ने के बाद यह आंकड़ा लगभग 70 करोड़ रुपये हो गया।

मिल की नीलामी कब होगी?

22 अक्टूबर 2026 को नीलामी होगी। नीलामी का नोटिस मिल गेट पर चस्पा कर दिया गया है।

नीलामी से मिलने वाली रकम से क्या होगा?

प्रशासन के मुताबिक नीलामी से मिलने वाली रकम से सबसे पहले किसानों के बकाये का भुगतान किया जाएगा।

मिल का मूल्यांकन कितना किया गया है?

पुणे की बसंत दादा शुगर इंस्टीट्यूट की तकनीकी टीम ने पूरी मिल की कीमत करीब 180 करोड़ रुपये आंकी है।

स्रोत: लाइव हिंदुस्तान (1 अक्टूबर 2026), डाइनामाइट न्यूज (30 सितंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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