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बरेली: किसानों के ₹70 करोड़ के लिए बिकेगी ओसवाल चीनी मिल! ₹180 करोड़ मूल्यांकन, खरीददार की तलाश — जानें पूरा मामला

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 30, 2026 • 6 min read
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बरेली: किसानों के ₹70 करोड़ के लिए बिकेगी ओसवाल चीनी मिल! ₹180 करोड़ मूल्यांकन, खरीददार की तलाश — जानें पूरा मामला
अंतिम अपडेट: September 30, 2026 7:15 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बरेली। तीन साल से अपने गन्ने के बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। बरेली के नवाबगंज में स्थित ओसवाल चीनी मिल को बेचने की प्रक्रिया तेज हो गई है। पुणे की बसंत दादा शुगर इंस्टीट्यूट की तीन सदस्यीय तकनीकी टीम ने मिल का मूल्यांकन ₹180 करोड़ किया है, और अब मिल की बिक्री के लिए खरीददार तलाशे जा रहे हैं। मिल की बिक्री से जो रकम मिलेगी, उसी से किसानों के करीब ₹70 करोड़ के बकाए का भुगतान कराया जाएगा।

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने एसडीएम नवाबगंज सचिन यादव की अध्यक्षता में मिल की बिक्री के लिए कमेटी गठित कर दी है। प्रशासनिक अधिकारी अब मिल के लिए खरीददार तलाश रहे हैं। तीन साल से प्रशासन लगातार दबाव बना रहा था, लेकिन मिल प्रबंधन ने एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया — जिसके बाद प्रशासन को पूरी मिल बेचने का रास्ता अपनाना पड़ा।


₹70 करोड़ का बकाया कैसे बना: साल-दर-साल पूरा हिसाब

ओसवाल चीनी मिल पर किसानों के बकाए का सिलसिला पेराई सत्र 2023-24 से शुरू हुआ। उस साल मिल को गन्ना किसानों का ₹107.12 करोड़ भुगतान करना था, जिसमें से मिल प्रबंधन ने ₹91.64 करोड़ का भुगतान कर दिया। बकाया रह गए ₹15.48 करोड़।

इसके बाद पेराई सत्र 2024-25 में मिल ने किसानों से ₹39.45 करोड़ का गन्ना खरीदा, लेकिन एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया। इस तरह बकाया रकम बढ़कर ₹54.93 करोड़ पहुंच गई, जो ब्याज सहित अब करीब ₹70 करोड़ तक हो चुकी है।

इसी बीच प्रशासन ने मिल के गोदाम में रखे 8,900 क्विंटल चीनी के स्टॉक को जब्त कर नीलाम भी किया था, जिससे ₹3.39 करोड़ मिले और कुछ किसानों का आंशिक भुगतान कराया गया। लेकिन बकाया रकम इतनी बड़ी थी कि यह कदम अपर्याप्त साबित हुआ।

प्रशासन के सभी कड़े कदम बेकार गए

जिला प्रशासन ने पिछले तीन साल में बकाया वसूली के लिए कई कड़े कदम उठाए, लेकिन मिल प्रबंधन पर कोई असर नहीं पड़ा। शासन के निर्देश पर मिल प्रबंधन और अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई — 2 सितंबर 2025 को हाफिजगंज थाने में प्रबंध निदेशक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद वसूली प्रमाण-पत्र (RC) जारी कर चीनी मिल की जमीन कुर्क कराई गई।

जब इन सबका भी कोई असर नहीं पड़ा, तो पिछले पेराई सत्र में चीनी मिल को गन्ना ही आवंटित नहीं किया गया — यानी मिल को पेराई के लिए गन्ना देना ही बंद कर दिया गया। प्रशासन के पास अब सिर्फ एक रास्ता बचा था: मिल की नीलामी। पहले मिल की संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन पुणे की तकनीकी टीम के ₹180 करोड़ के मूल्यांकन के बाद फैसला लिया गया कि सिर्फ जमीन नहीं, पूरी चीनी मिल की बिक्री की जाएगी।

जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी के मुताबिक, अब मिल की जमीन नहीं, बल्कि पूरी चीनी मिल की बिक्री की प्रक्रिया चल रही है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही चीनी मिल बिक जाएगी।

करीब 22,000 किसानों का पैसा फंसा

ओसवाल ओवरसीज लिमिटेड ने 1996 में नवाबगंज में यह चीनी मिल लगाई थी। 1998 में इसका पहला ट्रायल रन हुआ, जिसके बाद व्यावसायिक उत्पादन शुरू हुआ। करीब तीन दशक से यह मिल क्षेत्र के किसानों का गन्ना खरीद रही थी। अब इसमें फंसे करीब 22,000 गन्ना किसानों के भुगतान की उम्मीद मिल की बिक्री पर टिकी है।

दरअसल, ये किसान पिछले तीन पेराई सत्रों से अपने पैसे का इंतजार कर रहे हैं। 2024-25 के सत्र में जिन किसानों ने मिल को गन्ना दिया, उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला। ऐसे में किसानों की आर्थिक हालत लगातार खराब होती जा रही है।

पड़ोसी बहेड़ी की केसरी मिल भी नीलामी की कतार में

बता दें कि बरेली की दूसरी चीनी मिल — बहेड़ी की केसरी शुगर मिल — भी इसी स्थिति से गुजर रही है। 1933 में स्थापित यह मिल क्षेत्र की सबसे पुरानी मिलों में से एक है, जिस पर किसानों का करीब ₹146 करोड़ बकाया है। प्रशासन ने मई में मिल की 11.447 हेक्टेयर जमीन ₹28.05 करोड़ में नीलाम भी की थी, लेकिन किसानों और स्थानीय नेताओं के मूल्यांकन पर आपत्ति के बाद दोबारा नीलामी की तैयारी चल रही है।

दोनों मिलों के किसानों के प्रतिनिधियों का कहना है कि कुल बकाया ₹200 करोड़ से अधिक है और करीब 80,000 गन्ना किसान इससे प्रभावित हैं। किसानों ने मांग की है कि सरकार पहले बकाया भुगतान कराए और मिलों को पुनर्जीवित करने का विकल्प तलाशे।

अब आगे क्या होगा: टाइमलाइन

  1. मूल्यांकन पूरा: बसंत दादा शुगर इंस्टीट्यूट, पुणे की टीम ने ₹180 करोड़ का मूल्यांकन सौंप दिया है।
  2. कमेटी गठित: जिलाधिकारी ने एसडीएम नवाबगंज की अध्यक्षता में बिक्री कमेटी बनाई है।
  3. खरीददार की तलाश: प्रशासनिक अधिकारी अब मिल के लिए खरीददार तलाश रहे हैं।
  4. बिक्री से भुगतान: मिल बिकने के बाद मिली रकम से किसानों के ₹70 करोड़ के बकाए का भुगतान किया जाएगा।

किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर नीलामी प्रक्रिया में बाधा डाली गई या भुगतान में देरी हुई, तो वे बड़े आंदोलन की राह पर जाएंगे। अगस्त में हुई एक बैठक में SDM सचिन यादव ने बताया था कि नीलामी सितंबर में हो सकती है — अब सितंबर के अंतिम दिनों में बिक्री की प्रक्रिया तेज हो गई है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

अगर आपका भुगतान भी बकाया है, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • भुगतान की स्थिति ऑनलाइन चेक करें: e-Ganna ऐप या CaneUP पोर्टल पर अपने गन्ना भुगतान की स्थिति नियमित रूप से देखें।
  • रिकॉर्ड सुरक्षित रखें: मिल को गन्ना देने की पर्ची, टोकन और भुगतान के दस्तावेज संभालकर रखें — कानूनी प्रक्रिया में यही आपके काम आएंगे।
  • ब्याज का अधिकार: गन्ना नियमों के मुताबिक 14 दिन के बाद भुगतान में देरी पर 15% ब्याज का प्रावधान है। मिल की बिक्री से भुगतान होता है तो ब्याज सहित पूरी रकम की मांग करें।
  • सहकारी समिति से जुड़े रहें: अपने क्षेत्र की गन्ना विकास समिति की बैठकों में शामिल होकर बकाया भुगतान के मुद्दे पर आवाज उठाते रहें।

आपके सवाल

प्रश्न: ओसवाल चीनी मिल कहां स्थित है और कब से बंद है?

उत्तर: ओसवाल ओवरसीज लिमिटेड की यह चीनी मिल बरेली जिले के नवाबगंज में स्थित है। इसे 1996 में लगाया गया था। पिछले पेराई सत्र में मिल को गन्ना आवंटित नहीं किया गया था, जिससे इसका संचालन ठप है।

प्रश्न: मिल के मूल्यांकन में कितनी रकम तय हुई है?

उत्तर: बसंत दादा शुगर इंस्टीट्यूट, पुणे की तीन सदस्यीय तकनीकी टीम ने मिल का मूल्यांकन ₹180 करोड़ किया है। इसी मूल्यांकन के आधार पर पूरी मिल की बिक्री की प्रक्रिया चल रही है।

प्रश्न: किसानों को उनका बकाया कब मिलेगा?

उत्तर: प्रशासन मिल की बिक्री के लिए खरीददार तलाश रहा है। मिल बिकने के बाद मिली रकम से किसानों के करीब ₹70 करोड़ के बकाए का भुगतान कराया जाएगा। जिला गन्ना अधिकारी के अनुसार जल्द ही बिक्री पूरी होने की उम्मीद है।

प्रश्न: बकाया ₹70 करोड़ कैसे बना?

उत्तर: 2023-24 में ₹15.48 करोड़ और 2024-25 में ₹39.45 करोड़ का गन्ना खरीदकर बिना भुगतान के लेने से बकाया ₹54.93 करोड़ हो गया, जो ब्याज सहित अब करीब ₹70 करोड़ है।

प्रश्न: क्या मिल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हुई है?

उत्तर: हां। मिल प्रबंधन और अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई, वसूली प्रमाण-पत्र जारी कर मिल की जमीन कुर्क की गई और गोदाम की चीनी जब्त कर नीलाम की गई।


स्रोत: दैनिक जागरण (29 सितंबर 2026), चिनीमंडी (अमर उजाला और दैनिक भास्कर की रिपोर्टों के हवाले से)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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