बारिश से गन्ने की रिकवरी 8.44% से गिरकर 8.01% हुई, त्रिवेणी ने जताई चिंता — नवंबर में चीनी की किल्लत?

अक्टूबर के आखिर में हुई बेमौसम बारिश ने उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों और चीनी मिलों, दोनों की चिंता बढ़ा दी है। देश में चीनी की औसत रिकवरी पिछले साल के 8.44 फीसदी से गिरकर 8.01 फीसदी रह गई है। देश की दूसरी सबसे बड़ी चीनी उत्पादक कंपनी त्रिवेणी इंजीनियरिंग ने साफ कहा है कि बारिश के बाद गन्ने में चीनी की मात्रा पतली पड़ गई है, इसलिए पेराई शुरू करने में देरी ही समझदारी है।
चिंता सिर्फ रिकवरी तक सीमित नहीं है। नवंबर में देश को करीब 23 लाख टन चीनी की जरूरत है, जबकि अक्टूबर के अंत में बचा हुआ स्टॉक सिर्फ 15 लाख टन के आसपास है। अगर उत्तर प्रदेश की मिलें जल्दी पूरी रफ्तार से नहीं चलीं, तो नवंबर में चीनी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। किसानों के लिए सवाल यह है कि भीगा गन्ना मिल कब लेगी।
त्रिवेणी की चेतावनी: बारिश ने गन्ने का रस पतला कर दिया
त्रिवेणी इंजीनियरिंग के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ध्रुव एम. साहनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के आखिर में हुई भारी बारिश और आंधी-तूफान के बाद खेतों की हालत का बारीकी से आकलन जरूरी है। उन्होंने कहा कि पेराई में देरी ही सबसे संभावित असर होगा।
पिछले पेराई सत्र में त्रिवेणी की चीनी रिकवरी 11.06 फीसदी रही थी, जो उससे पिछले साल के 10.80 फीसदी से बेहतर थी। लेकिन इस बार बारिश ने हालात बदल दिए हैं। कंपनी का कहना है कि वह इस सत्र में ज्यादा गन्ने की पेराई करना चाहती है, पर रिकवरी के नुकसान का जोखिम उठाकर नहीं।
देश में रिकवरी 8.44% से गिरकर 8.01% — आंकड़े क्या कहते हैं
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (एनएफसीएसएफ) की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 अक्टूबर 2026 तक देश भर की 152 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी। इन मिलों में औसत रिकवरी 8.01 फीसदी रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 8.44 फीसदी थी। यानी रिकवरी में 0.43 प्रतिशत अंक की गिरावट आई है।
उत्तर प्रदेश की हालत इससे भी ज्यादा चिंताजनक है। बारिश के चलते 31 अक्टूबर तक प्रदेश में सिर्फ तीन चीनी मिलों में पेराई शुरू हो पाई थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 10 मिलें चल रही थीं। महाराष्ट्र में 25 अक्टूबर तक औसत रिकवरी सिर्फ 7.04 फीसदी रही। चीनीमंडी के सीईओ उप्पल शाह के मुताबिक, कच्चा गन्ना पीसने से वहां रिकवरी में 1 से 1.5 फीसदी तक की गिरावट आने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद गन्ने में पानी की मात्रा बढ़ जाती है। मिलें ऐसा गन्ना पीसना नहीं चाहतीं, क्योंकि इससे चीनी कम निकलती है और मिल को घाटा होता है।
नवंबर में चीनी की किल्लत का खतरा: मांग 23 लाख टन, स्टॉक 15 लाख टन
अक्टूबर में पेराई धीमी रहने से नवंबर के लिए सिर्फ 15 लाख टन के आसपास स्टॉक उपलब्ध है, जबकि नवंबर की मांग करीब 23 लाख टन आंकी गई है।
इस कमी को पूरा करने के लिए महाराष्ट्र की मिलों पर दबाव बढ़ गया है। 26 अक्टूबर तक देश में 107 मिलें पेराई शुरू कर चुकी थीं, जिनमें महाराष्ट्र की 87 मिलें शामिल थीं। इन मिलों ने करीब 4 लाख टन चीनी बनाई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में सिर्फ 0.6 लाख टन चीनी बनी थी।
केंद्र सरकार ने नवंबर के पहले पखवाड़े (1 से 15 नवंबर) के लिए घरेलू बिक्री का 13 लाख टन का कोटा तय किया है। इसमें महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा 4.77 लाख टन और उत्तर प्रदेश को 4.17 लाख टन का हिस्सा मिला है। चीनीमंडी के सीईओ उप्पल शाह का अनुमान है कि 2026-27 में उत्पादन 12 फीसदी घटकर करीब 2.7 करोड़ टन रह सकता है।
यूपी में पेराई अभी भी धीमी: 10 नवंबर के बाद ही पूरी रफ्तार
उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है। गन्ना विकास विभाग के मुताबिक, प्रदेश की 9 चीनी मिलों में व्यावसायिक पेराई शुरू हो गई है, जिनमें सहकारी क्षेत्र की एक और निजी क्षेत्र की आठ मिलें शामिल हैं। 33 चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में पेराई नवंबर के दूसरे सप्ताह, यानी 10 नवंबर के बाद ही पूरी रफ्तार पकड़ेगी।
बारिश से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई मिलों की योजना बिगड़ी है। कई मिलों ने 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन खेतों में पानी भरने से किसान कटाई नहीं कर पाए और मिलें ज्यादा नमी वाला गन्ना खरीदने को तैयार नहीं हुईं।
कोल्हू पर गन्ने के दाम घटे, एसएपी की घोषणा अभी बाकी
मिलों में पेराई शुरू न हो पाने का सीधा असर कोल्हू पर गन्ने के दाम पर पड़ा है। मुजफ्फरनगर के किसानों के मुताबिक, सीजन की शुरुआत में कोल्हू संचालक 430-450 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दे रहे थे, लेकिन बारिश के बाद दाम घटकर 380-400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रह गया है।
उधर, पेराई शुरू होने के बावजूद 2026-27 सत्र के गन्ना मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था। किसान संगठन इस बार 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी मांग रहे हैं और गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 फीसदी की बुनियादी रिकवरी पर आधारित है।
यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
घबराकर कच्चा या भीगा गन्ना कोल्हू पर सस्ते में न बेचें। अगर आपकी मिल ने इंडेंट जारी कर दिया है, तो पर्ची और तौल की तारीख का इंतजार करें। कटाई से पहले खेत का पानी सूखने दें — गीले गन्ने में चीनी कम निकलती है। और एसएपी की घोषणा पर नजर रखें, क्योंकि 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है।
आपके सवाल
बेमौसम बारिश से गन्ने की रिकवरी कितनी घटी है? देश में चीनी की औसत रिकवरी पिछले साल के 8.44 फीसदी से गिरकर 8.01 फीसदी रह गई है। महाराष्ट्र में 25 अक्टूबर तक औसत रिकवरी सिर्फ 7.04 फीसदी रही।
उत्तर प्रदेश में पेराई पूरी रफ्तार से कब शुरू होगी? विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पेराई नवंबर के दूसरे सप्ताह, यानी 10 नवंबर के बाद ही पूरी रफ्तार पकड़ेगी।
नवंबर में चीनी की कमी होगी क्या? नवंबर में देश को करीब 23 लाख टन चीनी की जरूरत है, जबकि अक्टूबर के अंत में बचा स्टॉक सिर्फ 15 लाख टन के आसपास है।
2026-27 सत्र का एसएपी क्या है? 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। किसान संगठन 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
त्रिवेणी ने पेराई में देरी क्यों जताई है? त्रिवेणी का कहना है कि अक्टूबर के आखिर की भारी बारिश के बाद गन्ने में चीनी की मात्रा पतली पड़ गई है। कंपनी रिकवरी के नुकसान से बचना चाहती है।
स्रोत: द हिंदू बिजनेसलाइन (4 नवंबर 2026), चीनीमंडी-इन्फॉर्मिस्ट (2 नवंबर 2026), रूरल वॉयस (30 अक्टूबर और 2 नवंबर 2026), कृषक जगत (3 नवंबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (4 नवंबर 2026)
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