बरखेड़ा चीनी मिल की संपत्ति कुर्क होगी: पीलीभीत में गन्ना किसानों के 112 करोड़ बकाया पर हाईकोर्ट ने रिपोर्ट मांगी, नीलामी तक की चेतावनी

पीलीभीत जिले की बरखेड़ा चीनी मिल पर गन्ना किसानों का 112 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया होने के मामले में प्रशासन ने सबसे सख्त कदम उठा लिया है। तहसील प्रशासन ने मिल की अचल संपत्ति को चिह्नित करके उसकी कुर्की की प्रक्रिया शुरू करा दी है, और साफ चेतावनी दी है कि तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो कुर्क संपत्ति की नीलामी करके किसानों की रकम वसूल की जाएगी। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से गन्ना भुगतान की प्रक्रिया पर अपडेट रिपोर्ट मांगी।
लंबे समय से अपने बकाये का इंतजार कर रहे किसानों के लिए यह खबर उम्मीद की किरण है। गन्ने की फसल तैयार करने से लेकर उसे मिल तक पहुंचाने में किसान ने जो लागत लगाई, वही अब महीनों से रुकी हुई है। प्रशासन की इस सख्ती के बाद अब कम से कम प्रक्रिया आगे बढ़ती दिख रही है।
हाईकोर्ट की रिपोर्ट मांग के बाद प्रशासन हरकत में आया
इस पूरे मामले की शुरुआत किसानों की शिकायतों से हुई। गन्ना किसानों ने अपनी मांगों को कई बार जिला प्रशासन के सामने रखा था, और तब प्रशासन ने भुगतान कराने का भरोसा भी दिया था। लेकिन महीनों बीतने के बाद भी पूरी रकम किसानों के खातों में नहीं पहुंची। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, और कोर्ट ने जिला प्रशासन से अब तक के गन्ना भुगतान की प्रक्रिया के बारे में अपडेट रिपोर्ट मांगी।
रिपोर्ट मांगे जाने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर बीसलपुर के एसडीएम नागेंद्र पांडे ने बरखेड़ा की इस निजी क्षेत्र की चीनी मिल पर शिकंजा कस दिया। एसडीएम ने तहसील की राजस्व टीमों को मिल की अचल संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। राजस्व टीमों से कहा गया है कि वे प्रक्रिया पूरी कर अपनी रिपोर्ट दें, ताकि जिला प्रशासन हाईकोर्ट को अपडेट रिपोर्ट दे सके।
कुर्की की प्रक्रिया: पहले चिह्नित, फिर नीलामी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कुर्की की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से होगी। पहले मिल की अचल संपत्ति को चिह्नित किया जा रहा है — यानी कौन-सी जमीन, भवन या स्थायी संपत्ति कुर्की के दायरे में आएगी, यह तय किया जा रहा है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत इन संपत्तियों को कुर्क किया जाएगा।
एसडीएम नागेंद्र पांडे ने कहा है कि कुर्क संपत्ति की नीलामी करा कर लंबित भुगतान कराया जाएगा। उनका कहना है कि राजस्व टीमों को निर्देशित किया गया है ताकि वे प्रक्रिया कर रिपोर्ट दें, और जिला प्रशासन को भी अपडेट रिपोर्ट दी जा रही है। सीधी भाषा में कहें तो अगर मिल प्रबंधन ने तय समय में 112 करोड़ से अधिक का बकाया नहीं चुकाया, तो उसकी संपत्ति नीलामी करके किसानों को पैसा दिया जाएगा।
112 करोड़ का बकाया: किसानों की आर्थिक हालत
बरखेड़ा चीनी मिल पर किसानों का 112 करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया बताया जा रहा है। यह रकम किसी एक गांव या कुछ किसानों की नहीं है — इस इलाके के सैकड़ों किसान परिवारों की मेहनत का पैसा है, जो महीनों से अटका हुआ है। गन्ने की फसल तैयार करने से लेकर मिल तक पहुंचाने में किसान ने बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और ढुलाई पर भारी खर्च किया, लेकिन भुगतान नहीं मिलने से वह अब आर्थिक परेशानी झेल रहा है।
किसानों का कहना रहा है कि उन्होंने अपनी शिकायतें राजनीतिक स्तर तक पहुंचाईं, लेकिन नतीजा नहीं निकला। अब कुर्की की प्रक्रिया शुरू होने से किसानों में उम्मीद जगी है कि शायद इस बार पैसा वाकई मिलेगा। पेराई सत्र 2026-27 नजदीक है और किसान नए सीजन की तैयारी में लगे हैं — ऐसे में पुराना बकाया मिलना उनके लिए बड़ी राहत होगी।
मिल प्रबंधन का जवाब: हमें जानकारी नहीं
इस पूरी कार्रवाई पर मिल प्रबंधन का रुख अब तक बेपरवाह दिखा है। बजाज चीनी मिल के जनसंपर्क अधिकारी सतीश श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें कुर्की की कार्रवाई की जानकारी नहीं है। यानी एक तरफ प्रशासन संपत्ति कुर्क करने की तैयारी में है, और दूसरी तरफ मिल प्रबंधन का कहना है कि उसे इसकी खबर ही नहीं है।
यह जवाब किसानों के लिए और भी चिंता की बात है, क्योंकि इससे मिल की भुगतान करने की मंशा पर सवाल उठता है। अब देखना यह है कि कुर्की की प्रक्रिया शुरू होने के बाद मिल प्रबंधन भुगतान के लिए आगे आता है या नीलामी की नौबत आती है।
यूपी के बाकी किसानों के लिए क्या सबक है
बरखेड़ा का यह मामला सिर्फ एक मिल का नहीं है — यह पूरे प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए एक संदेश है। उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं, और बकाया भुगतान की शिकायतें अलग-अलग जिलों से आती रहती हैं। अगर आपके मिल पर भी गन्ना भुगतान बकाया है, तो इन बातों को याद रखें:
पहला, अपना सट्टा, परची और तौल की रसीद हमेशा संभाल कर रखें — यही आपके बकाये का सबूत है। दूसरा, भुगतान में देरी पर गन्ना अधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक शिकायत दर्ज कराएं, और ऑनलाइन शिकायत का नंबर नोट करें। तीसरा, बकाया लंबा खिंचे तो हाईकोर्ट का रास्ता भी खुला है — बरखेड़ा मामले में कोर्ट की रिपोर्ट मांग के बाद ही प्रशासन हरकत में आया। और चौथा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बकाये पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान है — यानी देरी से भुगतान पर आपको ब्याज भी मिलना चाहिए।
पूछे जाने वाले प्रश्न
बरखेड़ा चीनी मिल पर किसानों का कितना भुगतान बकाया है? गन्ना किसानों का 112 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया है।
मिल की संपत्ति कुर्क करने के आदेश किसने दिए? हाईकोर्ट द्वारा भुगतान प्रक्रिया की अपडेट रिपोर्ट मांगे जाने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर बीसलपुर एसडीएम नागेंद्र पांडे ने तहसील की राजस्व टीमों को कुर्की की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
कुर्की के बाद किसानों को पैसा कैसे मिलेगा? यदि मिल ने तय समय में भुगतान नहीं किया, तो कुर्क की गई अचल संपत्ति की नीलामी कर रकम वसूल की जाएगी और किसानों का बकाया चुकाया जाएगा।
क्या यह मिल सरकारी है या निजी? यह निजी क्षेत्र की चीनी मिल है — बजाज समूह से जुड़े प्रबंधन का नाम सामने आया है।
अन्य जिलों के किसान बकाये के लिए क्या कर सकते हैं? अपनी परची-तौल की रसीदें संभाल कर रखें, गन्ना अधिकारी व जिलाधिकारी से लिखित शिकायत करें, और लंबे बकाये पर कानूनी रास्ता अपनाएं — बरखेड़ा मामले में हाईकोर्ट के दखल के बाद ही कार्रवाई तेज हुई है।
स्रोत: अमर उजाला (15 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (15 अक्टूबर 2026), शारदा एक्सप्रेस (15 अक्टूबर 2026)।
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