बेलगावी में आज 11 बजे मिल मालिकों और 3:30 बजे किसानों से मिलेंगे सीएम, ₹5500/टन पर फैसला नहीं तो कल बंद की चेतावनी

बेलगावी में आज गन्ना किसानों की लड़ाई एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सोमवार सुबह बेलगावी पहुंचे और दिन में गन्ना भाव को लेकर दो अलग-अलग बैठकें करने वाले हैं। पहली बैठक सुबह 11 बजे चीनी मिल मालिकों के साथ होगी और दूसरी बैठक दोपहर 3:30 बजे गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों के साथ होगी। दोनों बैठकें बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध में रखी गई हैं।
इस बैठक से पहले ही बेलगावी में किसानों का विरोध तेज हो गया है। किसानों ने राज्य राजमार्ग जाम करके अपना विरोध जताया है। उनकी मांग साफ है — गन्ने का भाव ₹5,500 प्रति टन तय हो, साथ में ₹1,000 प्रति टन की राज्य सहायता मिले और तौल व भुगतान की व्यवस्था पारदर्शी हो। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर आज की बैठक में उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 27 अक्टूबर को कर्नाटक बंद किया जाएगा।
यूपी के किसानों के लिए भी यह बैठक अहम है। गन्ने का भाव, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य और एथेनॉल नीति किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहते। कर्नाटक में जो फैसला होगा, उसका असर महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में चल रही भाव की बहस पर भी पड़ेगा। यूपी में 122 चीनी मिलें हैं, इसलिए बेलगावी की बैठक पर देश भर के गन्ना किसानों की नजर है।
आज की बैठक का पूरा कार्यक्रम
मुख्यमंत्री शिवकुमार रविवार को कित्तूर उत्सव के समापन के बाद बेलगावी में ही रुके थे। सुवर्ण विधान सौध में सुबह 11 बजे उनकी बैठक चीनी मिल मालिकों के साथ तय है। वह सौंदत्ती में विकास कार्यों की आधारशिला रखने के बाद दोपहर 3:30 बजे दोबारा सुवर्ण विधान सौध लौटकर गन्ना किसानों से बात करेंगे और शाम को बेंगलुरु रवाना होंगे।
बैठकों का क्रम भी अहम है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह पहले मिल मालिकों से बात करेंगे, क्योंकि आखिरकार किसानों को पैसा मिल मालिकों को ही देना है। इसके बाद किसानों का पक्ष सुना जाएगा। आज दिन भर की बातचीत के बाद ही यह साफ होगा कि ₹5,500 प्रति टन की मांग पर कोई बीच का रास्ता निकलता है या आंदोलन और तेज होता है।
किसानों की तीन बड़ी मांगें
पहली मांग गन्ने के भाव की है। किसान ₹5,500 प्रति टन भाव मांग रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए जो उचित और लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी तय किया है, वह ₹3,650 प्रति टन है और यह 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर आधारित है। किसानों का तर्क है कि खाद, बीज, कीटनाशक, मजदूरी, सिंचाई, कटाई और ढुलाई की लागत इतनी बढ़ गई है कि ₹3,650 प्रति टन से खेती की लागत भी पूरी नहीं निकलती।
दूसरी मांग ₹1,000 प्रति टन की राज्य सहायता की है। किसान चाहते हैं कि राज्य सरकार एफआरपी के ऊपर अलग से ₹1,000 प्रति टन की मदद दे। इसके साथ ही किसानों ने ₹500 करोड़ की अलग व्यवस्था की भी मांग की है, जिससे तौल मशीनों और भुगतान व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके। किसानों का आरोप है कि तौल में गड़बड़ी और कटौतियों से उनका नुकसान होता है।
तीसरी मांग चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य से जुड़ी है। किसान चाहते हैं कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹31 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो किया जाए। उनका कहना है कि यह मूल्य पिछले कई साल से नहीं बढ़ा है, जबकि उत्पादन लागत लगातार बढ़ी है। अगर चीनी का भाव बढ़ेगा, तो मिलों की आर्थिक हालत सुधरेगी और वे किसानों को बेहतर भाव दे पाएंगे।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने क्या कहा
कित्तूर में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक के किसानों का बचना उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वह दूसरे राज्यों की बात नहीं करेंगे, पहले अपने राज्य के किसानों को बचाना चाहते हैं। इसीलिए वह खुद बेलगावी आए हैं।
उन्होंने कहा कि पहले भी अतिरिक्त सहायता दी गई है और वह सभी पक्षों से बात करके ही रास्ता तय करेंगे। किसान नेता चुनप्पा पुजारी ने कहा है कि बैठक होना एक राहत है, लेकिन मांगें नहीं मानी गईं तो 27 अक्टूबर को कर्नाटक बंद होगा।
आंदोलन यहां तक कैसे पहुंचा
यह आंदोलन अचानक नहीं भड़का है। उत्तर कर्नाटक के किसान पिछले कई हफ्तों से गन्ने के भाव को लेकर सड़कों पर हैं। उन्होंने राजमार्ग जाम किए, टोल प्लाजा पर प्रदर्शन किए और सार्वजनिक जगहों पर धरने दिए। इसके बाद किसानों ने हुब्बल्लि चलो आंदोलन शुरू किया था, जिसे 19 अक्टूबर को अधिकारियों और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से बातचीत के बाद अस्थायी रूप से रोक दिया गया। किसानों ने राज्य और केंद्र सरकार को अपनी मांगें पूरी करने के लिए 26 नवंबर तक का समय दिया है।
कर्नाटक सरकार ने 26 अक्टूबर की बैठक इसी क्रम में बुलाई है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे, क्योंकि उनके दूसरे कार्यक्रम पहले से तय हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक जोशी ने सुझाव दिया है कि पहले राज्य सरकार दोनों पक्षों से बात करे, इसके बाद केंद्र स्तर पर अलग बैठक होगी।
कोल्हापुर में भी ₹5500 की मांग, 28-29 अक्टूबर को बैठक
कर्नाटक के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी गन्ने के भाव की लड़ाई तेज है। महाराष्ट्र राज्य किसान सभा ने 2026-27 पेराई सत्र के लिए गन्ने का न्यूनतम भाव ₹5,500 प्रति टन मांगा है। संगठन ने स्वामीनाथन आयोग के सी2 प्लस 50 प्रतिशत फॉर्मूले के हिसाब से ₹6,570 प्रति टन की दर की भी मांग की है। किसान सभा के राज्य सचिव गिरीश फोंडे के नेतृत्व में कोल्हापुर के संयुक्त चीनी निदेशक को ज्ञापन सौंपा गया है।
किसान सभा का कहना है कि सरकार ने गन्ना उत्पादन की ए2 प्लस एफएल लागत ₹1,820 प्रति टन आंकी है, जबकि महाराष्ट्र में कटाई और ढुलाई की औसत लागत ही ₹950 प्रति टन है। कोल्हापुर में भाव के गतिरोध को तोड़ने के लिए 28 या 29 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय में मिल प्रबंधनों और किसान संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाई जा रही है।
यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की स्थिति से इस बहस का सीधा जुड़ाव है। यूपी में 2025-26 सत्र के लिए अगेती गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य यानी एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल रहा है। यह दर उसी सत्र की है, इसे 2026-27 सत्र की दर समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। यूपी के किसान भी 2026-27 के भाव की मांग उठा रहे हैं।
दूसरा सबक तौल और भुगतान की पारदर्शिता का है। पेराई के दौरान अपनी पर्ची, तौल और भुगतान पर नजर रखें और गड़बड़ी तुरंत दर्ज कराएं, क्योंकि देर से शिकायत करने पर सबूत कमजोर पड़ जाते हैं।
आपके सवाल
आज बेलगावी में कौन-कौन सी बैठकें हो रही हैं? सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री की बैठक चीनी मिल मालिकों के साथ और दोपहर 3:30 बजे गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों के साथ हो रही है। दोनों बैठकें बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध में हो रही हैं।
किसान ₹5500 प्रति टन भाव क्यों मांग रहे हैं? किसानों का कहना है कि 2026-27 के लिए केंद्र का एफआरपी ₹3,650 प्रति टन है, जो 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर आधारित है। खाद, मजदूरी, कटाई और ढुलाई की बढ़ी लागत के हिसाब से यह भाव पर्याप्त नहीं है, इसलिए वे ₹5,500 प्रति टन मांग रहे हैं।
27 अक्टूबर को बंद की चेतावनी किस बात पर है? किसान नेताओं ने कहा है कि अगर आज की बैठक में उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 27 अक्टूबर को कर्नाटक बंद किया जाएगा और आंदोलन जारी रहेगा।
यूपी के किसानों के लिए इस खबर का क्या महत्व है? गन्ने का भाव, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य और एथेनॉल नीति पूरे देश के किसानों को प्रभावित करती है। इसलिए दक्षिण में भाव पर फैसला यूपी की बहस पर भी असर डालेगा।
स्रोत: आईएएनएस/प्रोकेरला, डेक्कन हेराल्ड, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, शुगर टाइम्स और चीनीमंडी की 26 अक्टूबर 2026 की खबरें।
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