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कर्नाटक के सीएम किसान आंदोलन के बीच बेलगावी जाएंगे: चीनी ₹60 और गन्ना ₹5500/टन की मांग, यूपी किसानों को क्या मिलेगा

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 18, 2026 • 6 min read
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कर्नाटक के सीएम किसान आंदोलन के बीच बेलगावी जाएंगे: चीनी ₹60 और गन्ना ₹5500/टन की मांग, यूपी किसानों को क्या मिलेगा
अंतिम अपडेट: October 18, 2026 5:02 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन इस हफ्ते एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार (17 अक्टूबर 2026) को पत्रकारों से कहा कि वह खुद बेलगावी जाकर आंदोलन कर रहे गन्ना किसानों से मिलेंगे, उनकी दिक्कतें समझेंगे और संभव सहायता पर विचार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ कर्नाटक की समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है।

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए इस खबर का सीधा मतलब है — क्योंकि मांगों के केंद्र में चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) और गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) है, और इन्हीं दोनों पर केंद्र की रमेश चंद समिति विचार कर रही है। समिति की सिफारिशें देशभर पर लागू होंगी, और 122 चीनी मिलों व करीब 48 लाख किसान परिवारों वाले यूपी को इसका सबसे बड़ा फायदा मिलेगा। (न्यूज़एबल एशियानेट/एएनआई, 17 अक्टूबर 2026)

बेलगावी से शुरू हुआ आंदोलन, जिले भर में फैला

कर्नाटक में किसानों का प्रदर्शन मंगलवार (13 अक्टूबर) को बेलगावी से शुरू हुआ और गोकाक, मुदलगी, गुरलापुर और मुन्नोली समेत जिले भर में फैल गया। अब किसान हुबली की ओर मार्च कर रहे हैं, जहां वे केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी के आवास के सामने प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं।

महाराष्ट्र में भी हालात समान हैं — स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने चेतावनी दी है कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन को सांगली, सतारा और पुणे तक बढ़ाया जाएगा। सांगली जिले में किसान पहले ही चार चीनी मिलों का संचालन रुकवा चुके हैं। (द न्यूज़ मिल, 17 अक्टूबर 2026; द हिंदू बिज़नेस लाइन, 17 अक्टूबर 2026)

किसानों की दो बड़ी मांगें: चीनी ₹60/किलो, गन्ना ₹5500/टन

आंदोलनरत किसानों की प्रमुख मांगें दो हैं:

  1. चीनी का एमएसपी ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो — किसानों का कहना है कि चीनी का यह न्यूनतम विक्रय मूल्य फरवरी 2019 से नहीं बढ़ा है, जबकि खाद, मजदूरी और खेती की बाकी लागत लगातार बढ़ रही है।
  2. गन्ने का मूल्य ₹5500 प्रति टन — उत्तरी कर्नाटक के किसान ₹5500 प्रति टन की मांग कर रहे हैं, जबकि दक्षिणी कर्नाटक के उत्पादक कहते हैं कि एफआरपी कम से कम ₹4500 प्रति टन तो होना ही चाहिए। कुछ किसान संगठनों की मांग ₹5500 से ₹6000 प्रति टन तक जाती है।

महाराष्ट्र के किसान नेता राजू शेट्टी की मांग अलग पैकेज में है — एफआरपी ₹450 प्रति क्विंटल के साथ सत्र के अंत में ₹50 प्रति क्विंटल का बोनस (कुल ₹500 प्रति क्विंटल), चीनी का एमएसपी ₹50 प्रति किलो और सी-हेवी शीरे से बने एथनॉल की खरीद दर ₹70 प्रति लीटर। 20 अक्टूबर को हुबली में बड़ा प्रदर्शन होगा, और मांगें न मानी जाने तक मिल संचालन रोकने की चेतावनी है। (द हिंदू बिज़नेस लाइन, 17 अक्टूबर 2026; एंगेज रूरल वॉयस, 16 अक्टूबर 2026)

केंद्र का पक्ष: एफआरपी हमारी, एसएपी राज्य की — जोशी ने क्या कहा

शनिवार को केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी सफाई दी, और उनका बयान तकनीकी लिहाज से बेहद अहम है। जोशी ने कहा कि एमएसपी का मतलब चीनी का “न्यूनतम समर्थन मूल्य” नहीं है — यह वह न्यूनतम दर है जिससे नीचे चीनी मिलें चीनी नहीं बेच सकतीं। किसानों को सीधे मिलने वाला मूल्य एफआरपी है, और केंद्र ने 2026-27 सत्र के लिए एफआरपी ₹3650 प्रति टन (₹365 प्रति क्विंटल) तय किया है।

जोशी ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों के पास एसएपी (राज्य परामर्श मूल्य) घोषित करने का अधिकार है — केंद्र किसी राज्य को एसएपी देने से नहीं रोकता। उनके अनुसार पांच राज्यों ने एसएपी घोषित किया है, लेकिन कर्नाटक ने नहीं। किसान संगठनों का तर्क इससे उल्टा है — उनके अनुसार ₹31 का एमएसपी मिलों को बकाये का बहाना देता है। (न्यूज़एबल एशियानेट/एएनआई, 17 अक्टूबर 2026)

रमेश चंद समिति: रिपोर्ट की कोई समयसीमा नहीं, किसान मांग रहे 30 दिन

केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है, जो एफआरपी बढ़ाने की मांग, चीनी के एमएसपी में संशोधन, चीनी रिकवरी की जांच और मिलों में तौल की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर विचार करेगी। लेकिन इस समिति को रिपोर्ट सौंपने की कोई अंतिम तिथि नहीं दी गई है — सरकारी आदेश में सिर्फ “जितनी जल्दी संभव हो” सिफारिशें देने को कहा गया है।

अखिल भारतीय किसान सभा की मांग है कि समिति 30 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपे और उसे सार्वजनिक करे, और सिफारिशें इसी पेराई सत्र (2026-27) में लागू की जाएं। किसान सभा के मुताबिक गन्ने की असली लागत के हिसाब से मूल्य कम से कम ₹575 प्रति क्विंटल होना चाहिए। (एंगेज रूरल वॉयस, 17 अक्टूबर 2026)

यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है

1. एसएपी का हिसाब-किताब: यूपी में 2025-26 सत्र के लिए एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) था, जबकि हरियाणा में ₹415 और पंजाब में ₹416 प्रति क्विंटल है। 2026-27 सत्र की एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। कर्नाटक में उठी मांग (₹5500/टन यानी ₹550/क्विंटल) और किसान सभा की ₹575/क्विंटल की मांग, यूपी के किसानों की आवाज को भी मजबूती देती है।

2. एमएसपी बढ़ा तो भुगतान क्षमता बढ़ेगी: चीनी का ₹31/किलो वाला एमएसपी सात साल से स्थिर है, जबकि गन्ने की लागत बढ़ी है। अगर समिति एमएसपी संशोधन की सिफारिश करती है, तो मिलों की भुगतान क्षमता बढ़ेगी — और देश में सबसे ज्यादा 122 चीनी मिलों वाले यूपी को इसका सबसे बड़ा फायदा मिलेगा।

3. समय अनुकूल है: यूपी का पेराई सत्र आमतौर पर नवंबर में शुरू होता है, यानी समिति की सिफारिशें आने का समय इस सत्र के ठीक बीच का होगा।

किसानों को अभी क्या करना चाहिए

बेलगावी की घटनाओं से एक बात साफ है — किसान संगठनों का मानना है कि दबाव के बिना भाव तय नहीं होता। यूपी के किसानों को अभी e-Ganna ऐप या enquiry.caneup.in पर अपना परची/सट्टा कैलेंडर जांचना चाहिए, 2026-27 की एसएपी घोषणा पर नजर रखनी चाहिए और गन्ना मिल भेजते समय वजन पर्ची संभाल कर रखनी चाहिए।

आपके सवाल

चीनी का एमएसपी और गन्ने का एफआरपी में क्या अंतर है? एफआरपी वह मूल्य है जो केंद्र सरकार गन्ना किसानों को देने के लिए तय करती है (2026-27 के लिए ₹3650 प्रति टन)। एमएसपी वह न्यूनतम दर है जिससे नीचे चीनी मिलें चीनी नहीं बेच सकतीं — यह किसानों का मूल्य नहीं, बल्कि चीनी की बिक्री का “फ्लोर प्राइस” है। यह फरवरी 2019 से ₹31 प्रति किलो पर स्थिर है। (न्यूज़एबल एशियानेट/एएनआई, 17 अक्टूबर 2026)

क्या कर्नाटक की मांग मानने से यूपी के किसानों को फायदा होगा? सीधे तो नहीं, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से हां — अगर केंद्र चीनी का एमएसपी बढ़ाता है या एफआरपी में संशोधन की सिफारिश करता है, तो वह देशभर के किसानों पर लागू होगा। कर्नाटक के आंदोलन का दबाव समिति की सिफारिशों को तेज भी कर सकता है।

2026-27 सत्र की एसएपी की घोषणा कब होगी? अभी तक कोई आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है। पिछले सत्र (2025-26) की दर अगेती गन्ने के लिए ₹400 प्रति क्विंटल थी।

परची की स्थिति कहां जांचें? e-Ganna ऐप या enquiry.caneup.in पर अपना सट्टा और परची कैलेंडर देखें। विसंगति पर जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें या टोल-फ्री 1800-121-3203 / 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराएं।

स्रोत: न्यूज़एबल एशियानेट (एएनआई), 17 अक्टूबर 2026; द न्यूज़ मिल, 17 अक्टूबर 2026; आवाज़ द वॉयस (एएनआई), 17 अक्टूबर 2026; द हिंदू बिज़नेस लाइन, 17 अक्टूबर 2026; एंगेज रूरल वॉयस, 16-17 अक्टूबर 2026; डेक्कन हेराल्ड, 15 अक्टूबर 2026।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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