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बिजनौर में बारिश ने रोकी 10 चीनी मिलों की पेराई, धामपुर में 2 नवंबर से तौल शुरू — कटाई एक हफ्ता पिछड़ी

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 1, 2026 • 6 min read
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बिजनौर में बारिश ने रोकी 10 चीनी मिलों की पेराई, धामपुर में 2 नवंबर से तौल शुरू — कटाई एक हफ्ता पिछड़ी
अंतिम अपडेट: November 1, 2026 1:31 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बिजनौर के गन्ना किसानों का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है। अक्टूबर के आखिर तक बार-बार हुई बारिश ने जिले की एक भी चीनी मिल को चलने नहीं दिया है, जबकि मिलें 25 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करना चाहती थीं। अब पेराई नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में खिसक गई है, जिसका असर कटाई, कोल्हू के भाव और रबी की बुवाई पर पड़ रहा है। अच्छी खबर यह है कि धामपुर चीनी मिल ने 2 नवंबर से तौल का इंडेंट जारी कर दिया है।

बिजनौर में अभी एक भी मिल नहीं चली

बिजनौर जिले में दस चीनी मिलें और 100 से ज्यादा पावर कोल्हू हैं। कुछ कोल्हू चल गए हैं, लेकिन अभी तक कोई भी चीनी मिल पेराई शुरू नहीं कर पाई है और कई मिलों के क्रय केंद्र भी पूरी तरह नहीं लगे हैं।

किसान विजयपाल सिंह और ताहर सिंह ने बताया कि बारिश और हवा से गन्ने की फसल गिर गई है और खेतों में पानी भरा है, इसलिए कटाई में ही दो-तीन दिन और लग जाएंगे।

धामपुर मिल: 2 नवंबर से तौल, 30 और 32 हजार क्विंटल का इंडेंट

धामपुर चीनी मिल ने किसानों को सबसे पहले राहत दी है। मिल में विधि-विधान से पूजन के बाद गन्ने का इंडेंट जारी हो गया है: 2 नवंबर से तौल शुरू होगी, जिसमें 2 नवंबर के लिए 30 हजार क्विंटल और 3 नवंबर के लिए 32 हजार क्विंटल गन्ना शामिल है।

मिल उपाध्यक्ष आशीष शर्मा ने किसानों से अपील की है कि पर्ची मिलने के बाद निर्धारित तिथि पर साफ-सुथरा गन्ना तौल केंद्र पर लेकर पहुंचें। उधर, बरकातपुर चीनी मिल ने मिल गेट और क्रय केंद्रों के लिए 30 और 31 अक्टूबर को गन्ना खरीद का इंडेंट जारी कर दिया था। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि बारिश से गन्ने में रिकवरी कम आ रही है, इसलिए मिलें सत्र शुरू करने में देरी कर रही हैं, लेकिन चीनी मिलें अपनी जारी तिथियों पर ही शुरू होंगी।

कटाई एक हफ्ता पिछड़ी, कोल्हू पर भाव भी घटा

बारिश की मार सिर्फ बिजनौर तक सीमित नहीं है। उत्तर भारत में अक्टूबर के आखिर की लगातार बारिश से गन्ने की कटाई कम से कम एक सप्ताह पिछड़ गई है, और पश्चिमी यूपी की अधिकांश मिलों में अब नवंबर के दूसरे सप्ताह में पेराई शुरू होने की संभावना है।

इस देरी का असर कोल्हू के भाव पर भी दिखा है। मुजफ्फरनगर के किसान संजय चौधरी ने बताया कि अब कोल्हू पर गन्ने का दाम 380 से 400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास मिल रहा है, जबकि सीजन की शुरुआत में कोल्हू संचालकों ने 430 से 450 रुपये का भाव दिया था। बारिश के चलते कोल्हू संचालक भी गन्ना खरीदने की स्थिति में नहीं हैं।

आमतौर पर पेराई दिवाली के बाद शुरू होती है और इससे पहले किसान त्योहारों के खर्चों के लिए कोल्हू पर गन्ना बेचते हैं। इस बार बारिश ने यह गणित बिगाड़ दिया है: मिल देर से चल रही है और कोल्हू का भाव भी नीचे आ गया है।

देश में सिर्फ 2 यूपी मिलें चलीं, नवंबर की चीनी पर दबाव बढ़ा

भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (इस्मा) के अनुसार, 26 अक्टूबर तक देशभर में 107 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी, जिनमें महाराष्ट्र की 87 और उत्तर प्रदेश की केवल दो मिलें थीं। इन मिलों ने नए सीजन में लगभग 4 लाख टन चीनी बनाई है, जो पिछले साल की समान अवधि के 0.6 लाख टन से कहीं ज्यादा है।

लेकिन उद्योग के अनुमानों के अनुसार, अक्टूबर के अंत में बकाया स्टॉक लगभग 15 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि नवंबर में देश की चीनी खपत करीब 23 लाख टन रह सकती है। ऐसे में यूपी में पेराई में अधिक देरी से नवंबर में आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

गन्ना मूल्य की घोषणा का इंतजार बरकरार

पेराई सत्र शुरू होने के बावजूद नए सत्र के गन्ने के मूल्य की घोषणा अभी बाकी है। किसान मांग कर रहे हैं कि पेराई से पहले ही भाव घोषित हो, ताकि वे हिसाब लगाकर गन्ना बेच सकें। पिछले सत्र में अगैती का मूल्य 400 रुपये और पछेती का 390 रुपये प्रति क्विंटल था — यह पिछले सत्र की दर है, इसे नए सत्र 2026-27 की दर न समझें। घोषणा तक अपनी पर्ची और तौल पर्ची संभालकर रखें।

बारिश के बाद खेत में क्या करें

बारिश के बाद खेत में जल्दबाजी नुकसान कर सकती है। पहला काम खेत से पानी निकालना है — नाली बनाकर निकासी करें, क्योंकि पानी में डूबा गन्ना सड़ने लगता है और मिठास घटती है। गिरे गन्ने को सहारा देकर बांधें और गीले खेत में भारी ट्रैक्टर न चलाएं।

तौल केंद्र पर जाने से पहले अपनी पर्ची की तारीख और केंद्र का नाम दोबारा जांच लें — धामपुर जैसे इंडेंट में तारीख के हिसाब से क्विंटल तय होता है, इसलिए गलत दिन पहुंचने पर लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। रबी की बुवाई का हिसाब भी साथ-साथ बनाएं: 23 अक्टूबर तक देश में रबी की बुवाई 18 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 28 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। जैसे ही खेत खाली हो, बुवाई में देर न करें।

आगे क्या: नवंबर के दूसरे सप्ताह पर नजर

अब सबकी नजर नवंबर के दूसरे सप्ताह पर है। बिजनौर की एक चीनी मिल के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, गन्ने की परिपक्वता और रिकवरी को देखते हुए समय से पहले पेराई व्यावहारिक नहीं है, इसलिए अधिकांश मिलें दूसरे सप्ताह में ही चल पाएंगी।

किसानों के लिए इसका मतलब साफ है: अपनी मिल की घोषित तारीख, इंडेंट और पर्ची पर नजर रखें, और कोल्हू पर कम भाव पर जल्दबाजी में गन्ना बेचने से पहले मिल की तारीख का इंतजार करने का हिसाब लगाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बिजनौर में चीनी मिलें कब से चलेंगी? धामपुर में 2 नवंबर से तौल शुरू हो रही है। जिले की ज्यादातर मिलें नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में शुरू होंगी। अपनी मिल की घोषित तारीख ही अंतिम मानें।

धामपुर मिल का इंडेंट कितने क्विंटल का है? 2 नवंबर के लिए 30 हजार क्विंटल और 3 नवंबर के लिए 32 हजार क्विंटल का इंडेंट जारी हुआ है। निर्धारित तिथि पर ही गन्ना लेकर जाएं।

बारिश से गन्ने की रिकवरी क्यों घटती है? बारिश से गन्ने में नमी बढ़ जाती है और चीनी का परता घट जाता है, इसलिए मिलें रिकवरी सुधरने का इंतजार करती हैं।

कोल्हू पर गन्ने का भाव क्यों घट गया है? मिलों में पेराई शुरू नहीं होने और बारिश से कोल्हू संचालकों की खरीद रुकने से भाव नीचे आया है। मुजफ्फरनगर में भाव 430-450 से घटकर 380-400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास आ गया है।

गन्ना भुगतान या पर्ची की शिकायत कहां करें? जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या अपनी गन्ना समिति से संपर्क करें। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

क्या 2026-27 का गन्ना मूल्य घोषित हो गया है? नहीं, घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र की दर अगैती 400 और पछेती 390 रुपये प्रति क्विंटल थी, जिसे नए सत्र की दर न समझें।

स्रोत: अमर उजाला (बिजनौर, 31 अक्टूबर 2026), रूरल वॉयस (30-31 अक्टूबर 2026), द हिंदू बिजनेसलाइन / इस्मा (27 अक्टूबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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