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बिजनौर: बिलाई मिल पर ₹58 करोड़ बकाया, 20 हजार किसानों ने दिए शपथपत्र — भुगतान नहीं मिला तो डीएम कोठी में भरेंगे गन्ना

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 18, 2026 • 6 min read
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बिजनौर: बिलाई मिल पर ₹58 करोड़ बकाया, 20 हजार किसानों ने दिए शपथपत्र — भुगतान नहीं मिला तो डीएम कोठी में भरेंगे गन्ना
अंतिम अपडेट: October 18, 2026 1:35 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बिजनौर में गन्ना बकाया भुगतान को लेकर किसान आंदोलन एक बड़े और नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार को बिजनौर गन्ना समिति में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की मासिक बैठक के बाद 20 हजार किसानों ने एक साथ प्रशासन को शपथपत्र सौंप दिए, जिनमें कहा गया है कि जब तक बकाया भुगतान नहीं मिलता, तब तक वे बिलाई चीनी मिल को गन्ना नहीं देंगे। संगठन ने सीधी चेतावनी दी है कि अगर मिल चलने से पहले भुगतान नहीं मिला और बिलाई मिल ने उनका गन्ना नहीं काटा, तो किसान जिलाधिकारी की कोठी में गन्ना भर देंगे।

इस हंगामे की जड़ में बिलाई चीनी मिल पर किसानों का पिछले पेराई सत्र का करीब 58.15 करोड़ रुपये का बकाया है। नया पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने में अब बस कुछ दिन बचे हैं, ऐसे में पुराने सत्र का करोड़ों का भुगतान अटका होने से किसानों की नाराजगी चरम पर है। बैठक में संगठन ने पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने की भी मांग उठाई।

शपथपत्र में क्या कहा गया: 20 हजार किसान एक साथ

बैठक में संगठन के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि इन 20 हजार किसानों ने बिलाई मिल को गन्ना नहीं देने की मांग की है। शपथपत्रों के जरिये किसानों ने प्रशासन को साफ संदेश दिया है — पहले बकाया भुगतान, फिर गन्ना आपूर्ति। किसानों का कहना है कि पिछले सत्र का पैसा अटका होने के कारण घर के खर्च, बच्चों की फीस और खेती की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।

बैठक की अध्यक्षता मुखिया रामफल सिंह ने की और संचालन जिला महासचिव नितेंद्र प्रधान ने किया। इस मौके पर जिलाध्यक्ष नितिन कुमार सिरोही समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

8 करोड़ का शीरा, 10 करोड़ की खोई बेची — फिर भी भुगतान नहीं

बैठक में किसानों ने गंभीर आरोप लगाए। कहा गया कि बिलाई मिल ने 8 करोड़ रुपये का शीरा (मोलेसेज) और 10 करोड़ रुपये की खोई (बगास) बेच दी, लेकिन इसके बावजूद किसानों को उनका बकाया भुगतान नहीं किया गया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने जिला आबकारी अधिकारी को अपने बीच बैठाकर इस मामले में जवाब भी मांगा।

संगठन ने मांग की कि किसानों के गन्ना भुगतान के लिए निर्धारित धनराशि का उपयोग किस तरह हुआ, इसकी जांच कराई जाए — जब मिल के पास उप-उत्पाद बेचकर करोड़ों रुपये आए, तो गन्ने का भुगतान क्यों अटका रहा?

गन्ना मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल की मांग

बैठक में एक और बड़ी मांग उठी — पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल घोषित किया जाए। संगठन का कहना है कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि गन्ने के भाव में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई है।

गौरतलब है कि प्रदेश के कई जिलों में किसान संगठन गन्ने के मूल्य को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं और 500 से 600 रुपये प्रति कुंतल तक की मांग उठा रहे हैं। बिजनौर का यह प्रदर्शन उसी कड़ी का हिस्सा है।

ज्ञापन और 20 अक्टूबर की चेतावनी

प्रदर्शन के बाद किसानों ने एडीएम (प्रशासन) अंशिका दीक्षित को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि 20 अक्टूबर तक किसानों के भुगतान, गन्ना आवंटन, नकली बीज-दवाइयों के कारोबार, दैवीय आपदा से हुए नुकसान के सर्वे और तहसीलों में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर प्रशासन ठोस कदम उठाए।

चेतावनी दी गई है कि अगर 20 अक्टूबर तक इन मुद्दों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो 20 हजार किसान ऑनलाइन आईजीआरएस के माध्यम से शिकायतें दर्ज कराएंगे। यानी मामला अब सड़कों से निकलकर प्रशासनिक शिकायत तंत्र तक पहुंचने की तैयारी में है।

बिलाई मिल पर 58.15 करोड़ बकाया: पृष्ठभूमि क्या है

बिजनौर जिले में कुल 10 चीनी मिलें संचालित हैं और इनमें बिलाई चीनी मिल पर सबसे बड़ा बकाया बताया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बिलाई मिल पर पिछले पेराई सत्र का करीब 58 करोड़ 15 लाख रुपये का गन्ना मूल्य बकाया है। लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

किसान संगठनों का कहना है कि बकाया भुगतान को लेकर वे लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक शत-प्रतिशत बकाया भुगतान नहीं हो सका है। इस बीच अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में नया पेराई सत्र शुरू होने की संभावना जताई गई थी और बिलाई मिल के क्रय केंद्रों पर गन्ना तौल की तैयारियां भी चल रही हैं। ऐसे में किसानों की मांग है कि नया सीजन शुरू होने से पहले पिछली बकाया राशि का भुगतान करा दिया जाए।

किसान क्या कर सकते हैं: बकाया भुगतान के लिए ये रास्ते

अगर आपका भी गन्ना भुगतान अटका हुआ है, तो इन रास्तों का इस्तेमाल करें:

  • जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क: अपने जिले के जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय में लिखित शिकायत दें और बकाया की रसीद या परची की प्रतियां साथ रखें।
  • सामूहिक ज्ञापन: अकेले की बजाय समिति या किसान संगठन के साथ सामूहिक ज्ञापन अधिक असरदार होता है, जैसा बिजनौर के किसानों ने किया।
  • आईजीआरएस पोर्टल: उत्तर प्रदेश सरकार के आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं — बिजनौर के किसानों ने 20 अक्टूबर के बाद इसी रास्ते पर चलने की चेतावनी दी है।
  • रिकॉर्ड संभालें: गन्ना आपूर्ति की परची, तौल की पर्ची और भुगतान से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें; शिकायत में इन्हीं का हवाला दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बिलाई चीनी मिल पर कितना गन्ना बकाया है? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बिलाई चीनी मिल पर पिछले पेराई सत्र (2025-26) का करीब 58 करोड़ 15 लाख रुपये का गन्ना मूल्य बकाया है। यह बिजनौर जिले की 10 चीनी मिलों में सबसे बड़ा बकाया बताया गया है।

किसानों ने शपथपत्र में क्या कहा है? भाकियू (अराजनैतिक) के 20 हजार किसानों ने प्रशासन को शपथपत्र सौंपकर कहा है कि जब तक बकाया भुगतान नहीं मिलता, तब तक वे बिलाई चीनी मिल को गन्ना नहीं देंगे।

डीएम की कोठी में गन्ना भरने की चेतावनी क्यों दी गई? संगठन के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा है कि अगर मिल चलने से पहले किसानों का भुगतान नहीं मिला और बिलाई मिल ने उनका गन्ना नहीं काटा, तो किसान जिलाधिकारी के घर में गन्ना भर देंगे।

गन्ने के मूल्य को लेकर क्या मांग है? किसान संगठन ने पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने की मांग की है।

20 अक्टूबर की चेतावनी में क्या कहा गया? संगठन ने कहा है कि 20 अक्टूबर तक भुगतान, गन्ना आवंटन, नकली बीज-दवाइयों, दैवीय आपदा के सर्वे और तहसीलों में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 20 हजार किसान ऑनलाइन आईजीआरएस के माध्यम से शिकायतें दर्ज कराएंगे।

बकाया भुगतान की शिकायत कहां करें? जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय में लिखित शिकायत दें, सामूहिक ज्ञापन सौंपें या उत्तर प्रदेश सरकार के आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।

स्रोत: अमर उजाला (17 अक्टूबर, 2026), चिनीमंडी (हिंदुस्तान की रिपोर्ट के हवाले से, सितंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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