बिजनौर: बिलाई मिल पर ₹26 करोड़ बकाया, 31,752 किसान परेशान — भुगतान नहीं तो कलक्ट्रेट में गन्ना भरने की चेतावनी

बिजनौर जिले के गन्ना किसानों का सब्र अब जवाब देने लगा है। जिले की बिलाई चीनी मिल पर पिछले पेराई सत्र का करीब 26 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान अब तक बकाया है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह ने शुक्रवार को बिजनौर में कहा कि जब तक मिल पूरा बकाया नहीं चुकाती, किसान उसे गन्ना नहीं देंगे। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर मिल बिना भुगतान पेराई शुरू करती है, तो किसान 50 हजार क्विंटल गन्ना लेकर कलक्ट्रेट पहुंचेंगे।
बिलाई मिल से 31,752 किसान जुड़े हैं, और इनमें से 20 हजार से अधिक किसान पहले ही शपथपत्र देकर कह चुके हैं कि वे इस मिल के क्रय केंद्रों पर गन्ना नहीं डालेंगे। इसके बावजूद संगठन का आरोप है कि प्रशासन ने मिल के सिर्फ तीन गन्ना क्रय केंद्र काटे हैं। किसानों का कहना है कि वे पिछले करीब एक साल से अपने गन्ने के पैसे का इंतजार कर रहे हैं, बच्चों की स्कूल फीस भरना मुश्किल हो रहा है, और कई किसानों को खेती की लागत के लिए कर्ज लेना पड़ा है।
26 करोड़ का आंकड़ा: बकाया कैसे घटा
बकाये का आंकड़ा पिछले कुछ हफ्तों में धीरे-धीरे घटा है। 10 अक्टूबर 2026 को अमर उजाला के अनुसार बिलाई मिल पर 41.98 करोड़ रुपये बकाया था, और जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने इस आंकड़े की पुष्टि की थी। 19 अक्टूबर को दैनिक जागरण ने बकाया करीब 27 करोड़ रुपये बताया था। अब 30 और 31 अक्टूबर की खबरों में किसान संगठन के हवाले से करीब 26 करोड़ रुपये का आंकड़ा आया है, जबकि दैनिक जागरण की 30 अक्टूबर की खबर में यही रकम करीब 24 करोड़ रुपये बताई गई है। अंतर इसलिए है, क्योंकि मिल किश्तों में भुगतान कर रही है। सीधा मतलब यह है कि बकाया अब भी करोड़ों में है।
20 हजार शपथपत्र, सिर्फ तीन केंद्र कटे
टाइम्स ऑफ इंडिया की 30 अक्टूबर की खबर के अनुसार, किसानों ने जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह को शपथपत्र सौंपकर कहा है कि जब तक भुगतान नहीं होता, वे बिलाई मिल को गन्ना नहीं देंगे। अमर उजाला के अनुसार, करीब 20 हजार किसान पहले ही ऐसे शपथपत्र दे चुके हैं और धरना-प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। संगठन का आरोप है कि गन्ना आरक्षण आदेश में मिल के केवल तीन क्रय केंद्र काटे गए। संगठन की एक और मांग यह है कि बिलाई मिल का गन्ना दूसरी चीनी मिलों को डायवर्ट कर दिया जाए, ताकि किसानों को उन मिलों के क्रय केंद्रों पर गन्ना डालने की सुविधा मिले, जहां भुगतान समय पर होता है।
कलक्ट्रेट योजना: 50 हजार क्विंटल गन्ना, गांधीगिरी का रास्ता
दैनिक जागरण के अनुसार, दिगंबर सिंह ने कहा है कि जिस दिन मिल इंडेंट जारी करेगी, उसी दिन संगठन भी समितियों में पूजन की इंडेंट जारी करेगा। मिल में तौल वाले दिन एक हजार किसान 50-50 क्विंटल गन्ना लेकर आएंगे, यानी कुल 50 हजार क्विंटल गन्ना कलक्ट्रेट या जिलाधिकारी आवास पर भरा जाएगा। संगठन ने कहा है कि इस दौरान किसान गांधीगिरी का पालन करेंगे, यानी शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे। टाइम्स ऑफ इंडिया और चिनीमंडी में भी यही चेतावनी दर्ज है कि बिना पुराना भुगतान चुकाए पेराई शुरू हुई, तो किसान अपना गन्ना कलक्ट्रेट ले जाएंगे।
जिले की नौ मिलें बनाम बिलाई: सीसीएल की कहानी
बिजनौर में कुल 10 चीनी मिलें हैं, और किसान संगठन के अनुसार इनमें से नौ मिलों ने पिछले सत्र का भुगतान चुका दिया है। सिर्फ बिलाई मिल पर बड़ा बकाया बचा है। दैनिक जागरण की 19 अक्टूबर की खबर के अनुसार, जिले की चीनी मिलों ने समय पर भुगतान के लिए बैंकों से करीब 1,605 करोड़ रुपये का कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) मांगा था, लेकिन बिलाई मिल को बैंकों से सीसीएल नहीं मिलता है। इसी कारण बिलाई के किसानों को भुगतान के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है, जबकि जिले की बाकी मिलों के किसान अपेक्षाकृत समय पर भुगतान पा लेते हैं।
बारिश ने बढ़ाई पेराई की देरी
बिजनौर में पेराई की घड़ी भी पीछे खिसकी है। अमर उजाला की 31 अक्टूबर की खबर के अनुसार, अक्टूबर के अंत तक बार-बार हुई बारिश से गन्ने की कटाई और मिलों की पेराई में देरी हुई है। जिले में 10 चीनी मिलें और 100 से ज्यादा पावर कोल्हू चलते हैं, लेकिन खबर के अनुसार जिले में अभी कोई चीनी मिल नहीं चली है। किसानों ने बताया है कि बारिश और हवा से गन्ने की फसल गिर गई और खेतों में पानी भरने से कटाई में दो-तीन दिन और लग जाएंगे। बरकातपुर मिल ने 30 और 31 अक्टूबर को गन्ना खरीद का इंडेंट जारी किया था, और धामपुर मिल में 2 नवंबर से तौल शुरू होने की बात कही गई है।
2026-27 का गन्ना भाव अभी घोषित नहीं हुआ
साफ-साफ समझ लें: पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना मूल्य यानी एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र में अगेती प्रजाति का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और पछेती का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल था। ये आंकड़े पिछले सत्र के हैं, इस सत्र के नहीं, इसलिए इन्हें इस सत्र का भाव मानकर हिसाब न लगाएं। किसान संगठनों की मांग 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है, और मीडिया में 28 से 40 रुपये की बढ़ोतरी की अटकलें भी आई हैं, लेकिन यह आधिकारिक घोषणा नहीं है। नया भाव घोषित होने के बाद भी पुराना बकाया अपने आप खत्म नहीं होगा। उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं।
किसान क्या करें: पर्ची, हिसाब और शिकायत के रास्ते
अपने गन्ने का पूरा हिसाब संभालकर रखें — पर्ची, तौल रसीद, समिति का सट्टा और बैंक खाते में आए भुगतान का ब्योरा। शपथपत्र या शिकायत देते समय सही नाम, गांव, समिति और मिल का नाम लिखें, और बकाये की रकम के साथ सत्र का साल साफ लिखें। भुगतान में देरी हो तो गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। सत्यापित हेल्पलाइन: टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129, एसएमएस शॉर्टकोड 51969। किसी अनजान नंबर पर पर्ची, बैंक खाता, ओटीपी या आधार की जानकारी साझा न करें।
पूछे जाने वाले प्रश्न
बिलाई मिल पर कितना बकाया है? किसान संगठन के अनुसार करीब 26 करोड़ रुपये। दैनिक जागरण की 30 अक्टूबर की खबर में यही रकम करीब 24 करोड़ रुपये बताई गई है। अंतर किश्तों में हो रहे भुगतान का है।
कितने किसान बिलाई मिल से जुड़े हैं? अमर उजाला और दैनिक जागरण के अनुसार 31,752 किसान। इनमें से 20 हजार से अधिक शपथपत्र दे चुके हैं।
किसान कलक्ट्रेट में गन्ना क्यों ले जाना चाहते हैं? संगठन की चेतावनी है कि बिना पुराना भुगतान चुकाए पेराई शुरू हुई, तो एक हजार किसान 50-50 क्विंटल गन्ना लेकर कलक्ट्रेट पहुंचेंगे। विरोध शांतिपूर्ण तरीके से होगा।
2026-27 का गन्ना भाव क्या तय हुआ है? अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र में अगेती का भाव 400 रुपये और पछेती का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
बकाया भुगतान की शिकायत कहां करें? पहले अपनी गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। हेल्पलाइन: 1800-121-3203 और 1800-180-5129, एसएमएस 51969।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया (30 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (31 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (31 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (30 अक्टूबर 2026 और 19 अक्टूबर 2026)।
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