बिजनौर में पुलिस से भिड़े किसान: भाकियू लोकशक्ति ने गन्ने का भाव ₹580 करने की मांग, घटतौली और बकाया भुगतान पर हंगामा

पेराई सत्र शुरू होने से ठीक पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश का गन्ना बेल्ट फिर आंदोलन की राह पर है। बिजनौर में भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) की महापंचायत के बाद हजारों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ सड़कों पर उतर आए। किसानों ने गन्ने का भाव ₹580 प्रति क्विंटल करने, गन्ना क्रय केंद्रों पर हो रही घटतौली रोकने और बकाया गन्ना भुगतान जल्द कराने की मांग रखी है। प्रदर्शन के दौरान नुमाइश ग्राउंड पर पुलिस से किसानों की तीखी नोकझोंक हुई, जहां बैरिकेडिंग हटाकर किसान गन्ना समिति तक पहुंचे और वहीं धरना शुरू कर दिया।
यह घटनाक्रम बुधवार, 14 अक्टूबर को दोपहर बाद हुआ, जिसकी रिपोर्टें गुरुवार को सामने आईं। बिजनौर उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक जिला है, और यहां उठी आंदोलन की चिंगारी पेराई सत्र की शुरुआत से ठीक पहले सरकार के लिए दबाव का संकेत मानी जा रही है।
नुमाइश ग्राउंड पर क्या हुआ: बैरिकेडिंग हटी, किसान आगे बढ़े
भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति के कार्यकर्ता जिला अध्यक्ष चौधरी वीर सिंह सहरावत के नेतृत्व में सेंट मैरीज़ स्कूल चौराहे के पास एकत्र हुए। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर शौराज सिंह भी महापंचायत में शामिल हुए। यहां से किसान ट्रैक्टरों और पैदल नारेबाजी करते हुए गन्ना समिति की ओर बढ़ने लगे।
किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने नुमाइश ग्राउंड पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार, किसान जब बैरिकेडिंग हटाने लगे तो दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस के रोकने के बावजूद किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। किसानों ने बैरिकेडिंग हटाई और आगे बढ़ते हुए गन्ना समिति पहुंच गए, जहां उन्होंने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
महापंचायत में किसानों ने “जय जवान, जय किसान” के नारे लगाए। कलेक्ट्रेट की ओर कूच से पहले संगठन के पदाधिकारियों ने नुमाइश ग्राउंड चौराहे पर चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि भी दी।
किसानों की प्रमुख मांगें: ₹580 भाव से घटतौली की रोक तक
महापंचायत और धरने में किसानों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं:
1. गन्ने का भाव ₹580 प्रति क्विंटल: संगठन के जिला अध्यक्ष चौधरी वीर सिंह सहरावत ने महापंचायत में गन्ने का भाव बढ़ाकर ₹580 प्रति क्विंटल किए जाने की मांग रखी। रॉयल बुलेटिन की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन का कहना है कि गन्ना किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। वहीं महापंचायत में मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में गन्ना मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग का भी उल्लेख सामने आया है।
2. घटतौली पर रोक: गन्ना क्रय केंद्रों पर हो रही कथित घटतौली पर रोक लगाने की मांग किसानों के एजेंडे में सबसे ऊपर रही। किसान नेताओं ने कहा कि तौल में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं होनी चाहिए और क्रय केंद्रों पर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
3. बकाया गन्ना भुगतान: संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के गन्ना भुगतान के मुद्दे पर गंभीर नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने पुराने सत्रों का बकाया गन्ना मूल्य जल्द से जल्द चुकाने की मांग की।
4. गुलदार की समस्या: ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार, गुलदार की समस्या से निजात दिलाना भी किसानों की प्रमुख मांगों में शामिल था। पश्चिमी यूपी के गन्ना क्षेत्रों में गुलदार के हमलों से किसानों को खेतों में काम करने में डर लगता है।
5. समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी: किसान गन्ने के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की भी मांग उठा रहे हैं, ताकि खेती आर्थिक रूप से टिकाऊ बनी रहे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष का आरोप: सरकार गंभीर नहीं
महापंचायत को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर शौराज सिंह ने सरकार पर सीधा निशाना साधा। रॉयल बुलेटिन के अनुसार, उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के गन्ना भुगतान और गन्ना क्रय केंद्रों पर घटतौली जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है, और इसकी नाराजगी किसानों में साफ दिख रही है।
पेराई सत्र से ठीक पहले आंदोलन: टाइमिंग क्यों अहम है
बिजनौर का यह आंदोलन ऐसे समय पर हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में गन्ना पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत बस दिनों की दूरी पर है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं।
किसान संगठनों की रणनीति साफ है — पेराई शुरू होने से पहले गन्ने के भाव और भुगतान की गारंटी को लेकर सरकार पर अधिकतम दबाव बनाया जाए। बिजनौर यूपी का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक जिला है, जहां लाखों किसान परिवारों की आजीविका गन्ने की खेती पर टिकी है। जब इस जिले के किसान सड़कों पर उतरते हैं, तो पूरे पश्चिमी यूपी के गन्ना बेल्ट में उसका संदेश जाता है।
यूपी के गन्ना किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
भाव की लड़ाई तेज होगी: महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने के समर्थन मूल्य और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को लेकर पहले से ही आंदोलन चल रहा है। केंद्र ने रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति गठित की है, लेकिन उसकी सिफारिशों के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है। यूपी के किसान भी अब उसी कतार में खड़े हो रहे हैं।
घटतौली पर नजर रखें: क्रय केंद्र पर तौल की प्रक्रिया पर खुद नजर रखें। किसी भी अनियमितता की शिकायत जिला गन्ना अधिकारी या गन्ना समिति में दर्ज कराएं। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी शिकायत की जा सकती है।
बकाया भुगतान का हिसाब रखें: अपने बकाया भुगतान का पूरा रिकॉर्ड — पर्ची, तौल पर्चे और भुगतान विवरण — संभालकर रखें। शिकायत के समय यही दस्तावेज काम आते हैं।
पेराई कैलेंडर पर ध्यान दें: पेराई सत्र शुरू होते ही गन्ना आपूर्ति का कैलेंडर जारी होगा। ई-गन्ना ऐप या गन्ना समिति से अपना सट्टा और आपूर्ति कार्यक्रम पहले से जांच लें।
आगे क्या: बातचीत या टकराव
बिजनौर में धरने के बाद अब सबकी नजर जिला प्रशासन और गन्ना विभाग की प्रतिक्रिया पर है। किसान संगठनों का कहना है कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज होगा। दूसरी ओर, मिलें और प्रशासन चाहते हैं कि पेराई सत्र शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हो।
आपके सवाल
बिजनौर में किसान किस मांग को लेकर सड़कों पर उतरे? भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के नेतृत्व में किसानों ने गन्ने का भाव ₹580 प्रति क्विंटल करने, गन्ना क्रय केंद्रों पर घटतौली रोकने, बकाया गन्ना भुगतान कराने और गुलदार की समस्या से निजात दिलाने की मांग रखी है। महापंचायत में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया है।
पुलिस से किसानों की झड़प क्यों हुई? 14 अक्टूबर को किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ गन्ना समिति की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने नुमाइश ग्राउंड पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोका। किसानों ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की, जिस पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बाद में किसान गन्ना समिति पहुंचकर धरने पर बैठ गए।
गन्ने के भाव की मांग ₹580 क्यों रखी गई? किसान नेताओं का कहना है कि खाद, बीज, दवाओं, सिंचाई और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि गन्ने के दाम में उसके अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई। चीनी के बाजार भाव ऊंचे बने हुए हैं, इसलिए किसानों को भी उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए।
इस आंदोलन का पेराई सत्र पर क्या असर पड़ेगा? उत्तर प्रदेश की मिलें 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। किसान संगठन पेराई से पहले भाव और भुगतान की गारंटी चाहते हैं। अगर मांगों पर बातचीत नहीं हुई तो आंदोलन तेज हो सकता है, जिससे सत्र की शुरुआत प्रभावित हो सकती है।
घटतौली की शिकायत किसान कहां करें? गन्ना क्रय केंद्र पर तौल में अनियमितता दिखे तो जिला गन्ना अधिकारी या गन्ना समिति में शिकायत दर्ज कराएं। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी शिकायत की जा सकती है। पर्ची और तौल के दस्तावेज संभालकर रखें।
स्रोत: ईटीवी भारत (14 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (15 अक्टूबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी (15 अक्टूबर 2026)।
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