बिजनौर की चीनी मिलें 10 दिन पहले शुरू करेंगी पेराई: अक्टूबर के मध्य से चलेगी चक्की, मरम्मत 90% तक पूरी

🚨 बड़ी खबर: पश्चिमी यूपी के बिजनौर जिले की चीनी मिलें इस बार गन्ने की पेराई करीब 10 दिन पहले शुरू कराने की तैयारी में हैं। आमतौर पर जिले की मिलों में नवंबर के पहले सप्ताह से पेराई शुरू होती थी, लेकिन इस बार अक्टूबर के मध्य से ही चक्कियां चलने लगेंगी। मिलों में मशीनों की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर चल रहा है — अलग-अलग मिलों में 65 से 90 प्रतिशत तक काम पूरा हो चुका है। पेराई जल्दी शुरू होने से गन्ना किसानों को सबसे बड़ा फायदा गेहूं की समय पर बुवाई में मिलेगा।
बिजनौर में पेराई की नई समय-सारणी
पिछले वर्षों में बिजनौर की चीनी मिलों में पेराई नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू होती थी — अपवाद के तौर पर बिलाई चीनी मिल अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में पेराई शुरू कर देती थी। इस बार सभी मिलों को अक्टूबर के मध्य से ही पेराई शुरू कराने का लक्ष्य दिया गया है, और मरम्मत उसी तेजी से पूरा कराया जा रहा है ताकि तय तारीख न खिसके।
अक्टूबर के पहले सप्ताह से मिलों के गन्ना क्रय केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू होने की संभावना है, ताकि किसानों से गन्ने की खरीद की तैयारी समय पर पूरी हो सके।
मरम्मत का काम कहां तक पहुंचा?
जिले की सभी चीनी मिलों में मशीनों की मरम्मत और रखरखाव का काम विशेषज्ञों की निगरानी में तेजी से चल रहा है, ताकि पेराई के दौरान तकनीकी व्यवधान न आए। रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग मिलों में मरम्मत 65 से 90 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी है। चांगीपुर चीनी मिल सबसे आगे है — यहां करीब 90.75 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। शासन ने भी मिलों की मरम्मत जल्द पूरी करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, क्योंकि नई समय-सारणी को देखते हुए कोई देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पेराई जल्दी क्यों शुरू की जा रही है?
इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहली — चीनी के बढ़ते दाम। इस साल चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है; पश्चिमी यूपी में खुदरा बाजार में चीनी का दाम 74 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पेराई जल्दी शुरू करना जरूरी है, ताकि नई चीनी समय से बाजार पहुंचे।
दूसरी — सरकारी निर्देश। गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस. पहले ही मिल संचालकों को 15 अक्टूबर तक मिलें चलाने के लिए प्रोत्साहित कर चुकी हैं — यानी पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 दिन पहले। नई व्यवस्था के तहत अक्टूबर में उत्पादन शुरू करने वाली मिलों को उसी महीने की चीनी अक्टूबर-नवंबर में बेचने की अनुमति भी मिलेगी।
गन्ने के रकबे और उत्पादन का अनुमान
बिजनौर में करीब 2.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हो रही है — पिछले साल से करीब 2,000 हेक्टेयर अधिक। फसल की स्थिति भी पिछले तीन-चार वर्षों की तुलना में बेहतर बताई जा रही है।
मिल अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, इस बार जिले की चीनी मिलों में 10 करोड़ क्विंटल से ज्यादा गन्ने की पेराई होगी, जबकि पिछले वर्ष करीब 9 करोड़ क्विंटल की पेराई हुई थी। रिकॉर्ड पेराई के लिए मिलों को पूरी क्षमता के साथ समय पर चलाना जरूरी है — यही जल्दी शुरुआत की असली वजह है।
गन्ना किसानों के लिए क्या मायने हैं?
पेराई 10 दिन पहले शुरू होने से किसानों को कई फायदे होंगे:
गेहूं की समय पर बुवाई: यह सबसे बड़ा फायदा है। गन्ने की कटाई जल्दी पूरी होने से किसान अपनी जमीन समय पर तैयार करके गेहूं की बुवाई उचित समय पर कर पाएंगे। देर से गन्ना कटने पर गेहूं की बुवाई में देरी होती थी, जिससे गेहूं की पैदावार पर असर पड़ता था।
चारे की समस्या से राहत: पेराई सीजन के दौरान चीनी मिलों से मिलने वाला चारा किसानों के पशुओं के लिए महत्वपूर्ण होता है। मिलें समय पर चलेंगी तो चारे की उपलब्धता भी समय पर होगी।
नकद भुगतान की गति: पेराई जल्दी शुरू होने से गन्ने का भुगतान भी उसी अनुपात में जल्दी शुरू होगा, जिससे किसानों की नकदी की समस्या कम होगी। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने गन्ना सर्वे रिकॉर्ड, पर्ची और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज अभी से दुरुस्त करा लें।
क्रय केंद्रों की समय पर स्थापना: अक्टूबर के पहले सप्ताह से क्रय केंद्र स्थापित होने की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे किसानों को अपने नजदीकी केंद्र पर गन्ना आपूर्ति की सुविधा मिलेगी।
पश्चिमी यूपी में तैयारियां जोरों पर
बिजनौर अकेला जिला नहीं है — पश्चिमी यूपी की अधिकांश चीनी मिलों में बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल की तैयारियां सितंबर के अंत तक पूरी की जा रही हैं। भुगतान के मोर्चे पर भी हालात बेहतर हुए हैं — 2025-26 पेराई सत्र में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान हो चुका है और 102 निजी चीनी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान पूरा कर दिया है।
हालांकि किसानों की एक शिकायत बनी हुई है — चीनी 74 रुपये किलो बिक रही है, लेकिन गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) में बढ़ोतरी की घोषणा अभी बाकी है। 22 सितंबर को बिजनौर में ही हजारों किसानों ने गन्ना मूल्य बढ़ाने और बकाए पर ब्याज की मांग को लेकर महापंचायत की थी।
किसानों के लिए सलाह
- सर्वे रिकॉर्ड जांच लें: अपने गन्ने के सर्वे रिकॉर्ड में क्षेत्रफल और किस्म की जानकारी सही है या नहीं, अभी से जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या समिति से सत्यापित करा लें।
- बैंक खाता सक्रिय रखें: गन्ने का भुगतान सीधे बैंक खाते में आता है, इसलिए खाता सक्रिय और आधार से जुड़ा होना चाहिए।
- क्रय केंद्र की जानकारी: अक्टूबर के पहले सप्ताह में अपने क्षेत्र के क्रय केंद्र की सूची जरूर देखें और पर्ची/कैलेंडर की व्यवस्था पहले से समझ लें।
- गेहूं की तैयारी: गन्ना कटाई के बाद तुरंत गेहूं बुवाई की योजना बनाएं, ताकि पेराई के शुरुआती फेज का पूरा लाभ मिल सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बिजनौर में पेराई कब से शुरू होगी? रिपोर्ट के अनुसार, बिजनौर की चीनी मिलें इस बार अक्टूबर के मध्य से पेराई शुरू करेंगी — आमतौर के नवंबर के पहले सप्ताह के बजाय करीब 10 दिन पहले।
पेराई जल्दी क्यों शुरू की जा रही है? चीनी के बढ़ते दामों को नियंत्रित करने और गन्ना आयुक्त के निर्देशों के अनुसार मिलों को 15 अक्टूबर तक संचालन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
मिलों की मरम्मत कितनी पूरी हुई? अलग-अलग मिलों में 65 से 90 प्रतिशत तक मरम्मत पूरी हो चुकी है। चांगीपुर चीनी मिल में सबसे अधिक — करीब 90.75 प्रतिशत — काम पूरा हुआ है।
इस बार कितने गन्ने की पेराई का अनुमान है? 10 करोड़ क्विंटल से अधिक गन्ने की पेराई का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष करीब 9 करोड़ क्विंटल की पेराई हुई थी।
पेराई जल्दी होने से किसानों को क्या फायदा? गन्ने की कटाई जल्दी पूरी होगी, जिससे गेहूं की समय पर बुवाई संभव होगी। चारे की उपलब्धता और गन्ने के भुगतान की प्रक्रिया भी जल्दी शुरू होगी।
गन्ने के दाम (SAP) में बढ़ोतरी की घोषणा हुई? अभी तक 2026-27 सत्र के लिए राज्य परामर्शित मूल्य में बढ़ोतरी की घोषणा नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने चीनी सीजन 2026-27 के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
स्रोत: गॉन जंक्शन (23 सितंबर 2026), चीनीमंडी (दैनिक जागरण की रिपोर्ट के हवाले से, अगस्त 2026), किसान इंडिया (22 सितंबर 2026)
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