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सिक्कों से तौले गए राकेश टिकैत: बिजनौर की किसान महापंचायत में गन्ना भाव 600 रुपये और बकाया भुगतान की जोरदार मांग

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 21, 2026 • 6 min read
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सिक्कों से तौले गए राकेश टिकैत: बिजनौर की किसान महापंचायत में गन्ना भाव 600 रुपये और बकाया भुगतान की जोरदार मांग
अंतिम अपडेट: October 21, 2026 4:46 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बिजनौर। 21 अक्टूबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी और किसान हलचल का केंद्र बना रहा बिजनौर का नुमाइश ग्राउंड, जहां भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने किसान महापंचायत का आयोजन किया। पंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत पहुंचे और उनका स्वागत जिस अंदाज में हुआ, उसने पंचायत का मिजाज पहले ही बयान कर दिया — कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने उन्हें सिक्कों से तौला। महापंचायत में गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित कराने, बकाया गन्ना भुगतान, हाईवे निर्माण में जा रही जमीन के सर्किल रेट और मुआवजे, औद्योगिक गलियारे तथा फसलों के मुआवजे जैसे मुद्दे जोरदार तरीके से उठाए गए।

टिकैत के पहुंचने से पहले ही उठी मांगों की गूंज

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, राकेश टिकैत के पंचायत में पहुंचने से पहले ही जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान, वीरेंद्र सिंह समेत अन्य वक्ताओं ने मंच से किसानों की मांगें रखनी शुरू कर दी थीं। बढ़ती महंगाई का हवाला देते हुए वक्ताओं ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है — खाद, बीज, डीजल और मजदूरी पर किसानों का खर्च पहले से कहीं ज्यादा हो गया है — ऐसे में गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित कराना जरूरी है।

पंचायत में कहा गया कि गन्ना मिलें चालू होने की तैयारी में हैं, लेकिन अभी तक गन्ने के नए मूल्य की घोषणा नहीं हुई है। चीनी मिलों के प्रतिनिधियों की ओर से भी इस मांग पर सहमति जताए जाने की बात पंचायत में दोहराई गई। वक्ताओं ने साफ कहा कि जब तक भाव तय नहीं होता, किसान आंदोलन की राह नहीं छोड़ेगा।

बकाया भुगतान का मुद्दा फिर केंद्र में

गन्ने के बकाया भुगतान का मुद्दा भी महापंचायत में प्रमुखता से उठा। वक्ताओं ने कहा कि किसानों को समय पर भुगतान मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। जिले में बिलाई चीनी मिल जैसे मामले, जहां किसानों के लंबे बकाये हैं, पंचायत की चर्चा में बार-बार आए। भाकियू नेताओं ने कहा कि पेराई सत्र शुरू होने से पहले बकाया भुगतान का निपटारा होना चाहिए, ताकि किसान नए सत्र में आर्थिक राहत के साथ गन्ना दे सकें।

गौरतलब है कि जिले की नौ में से आठ चीनी मिलों का भुगतान रिकॉर्ड बेहतर रहा है, लेकिन बिलाई मिल का बकाया लंबे समय से किसानों के लिए परेशानी बना हुआ है। इसी सिलसिले में पहले भी किसानों ने शपथ पत्र देकर बिलाई मिल को गन्ना न देने का फैसला किया था।

हाईवे और औद्योगिक गलियारे में जमीन का मुआवजा

महापंचायत में हाईवे निर्माण के लिए ली जाने वाली जमीन के सर्किल रेट का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा। किसान नेताओं ने कहा कि जिले में बन रहे दो हाईवे के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन का सर्किल रेट कई स्थानों पर तीन से चार लाख रुपये प्रति बीघा बताया जा रहा है, जबकि वास्तविक बाजार मूल्य 10 से 15 लाख रुपये प्रति बीघा तक है। यूनियन ने मांग की कि प्रशासन संबंधित तहसीलों के माध्यम से जमीनों का सर्वे कराए और वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए किसानों को चार गुना मुआवजा दिलाने की व्यवस्था करे।

इसके अलावा औद्योगिक गलियारे के लिए ली जा रही जमीन का सही मूल्य दिलाने और स्मार्ट मीटर लगाने जैसे मुद्दे भी पंचायत में उठे। फसलों के मुआवजे की मांग भी किसानों ने रखी।

महापंचायत की पृष्ठभूमि: दो दिन पहले की प्रेस वार्ता

इस महापंचायत की घोषणा 19 अक्टूबर को गन्ना समिति सभागार में हुई पत्रकार वार्ता में की गई थी। भाकियू के जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान ने बताया था कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलना जरूरी है और पंचायत में गन्ने का भाव बढ़ाने के साथ बकाया भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठेगा। उन्होंने जिले के किसानों से बड़ी संख्या में नुमाइश मैदान पहुंचने की अपील की थी।

महापंचायत की तारीख इसलिए भी अहम है, क्योंकि पश्चिमी यूपी में चीनी मिलों के 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारियां चल रही थीं। यानी मांगें ठीक उस समय उठीं जब पेराई सत्र शुरू होने वाला है — यही वजह है कि पंचायत का संदेश मिलों और सरकार दोनों के लिए था।

एसएपी की स्थिति: 2026-27 का भाव अभी घोषित नहीं

फैक्ट के तौर पर यह जानना जरूरी है कि आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) अभी घोषित नहीं हुआ है। 9 अक्टूबर को योगी कैबिनेट की बैठक में भी गन्ने के दाम बढ़ाने का कोई फैसला घोषित नहीं किया गया था। पिछले पेराई सत्र 2025-26 में अगेती गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल था।

वहीं 7 अक्टूबर को लखनऊ स्थित गन्ना आयुक्त कार्यालय में हुई उपसमिति की बैठक में बलरामपुर सहकारी गन्ना विकास समिति के अध्यक्ष प्रतिनिधि रणवीर सिंह रन्नू ने गन्ना मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी थी। रन्नू ने कहा था कि बढ़ती लागत और महंगाई को देखते हुए यह वृद्धि जरूरी है और सही मूल्यांकन किया जाए तो 600 रुपये का रेट भी कम है। बैठक में चीनी मिलों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

किसानों के लिए क्या मतलब है

किसान महापंचायत का सबसे बड़ा संदेश यह है कि इस पेराई सत्र में भाव की मांग सबसे ज्यादा मुखर है। 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग अब जिले के हर मंच पर एक स्वर में उठ रही है।

किसानों के लिए व्यावहारिक कदम यह है कि वे ई-गन्ना ऐप और अपने गन्ना समिति कार्यालय से पर्ची-कैलेंडर की जानकारी पर नजर रखें, अपने सर्वेक्षण रिकॉर्ड और बैंक खाते की केवाईसी जांच लें, ताकि पेराई शुरू होते ही आपूर्ति और भुगतान में देरी न हो।

आपके सवाल

प्रश्न 1: बिजनौर की किसान महापंचायत में क्या-क्या मांगें उठीं?

गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित कराने, बकाया गन्ना भुगतान, हाईवे और औद्योगिक गलियारे के लिए जा रही जमीन का उचित सर्किल रेट और चार गुना मुआवजा, फसलों का मुआवजा तथा स्मार्ट मीटर का मुद्दा। पंचायत 21 अक्टूबर को नुमाइश ग्राउंड, बिजनौर में आयोजित हुई।

प्रश्न 2: राकेश टिकैत का स्वागत कैसे किया गया?

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत जब नुमाइश ग्राउंड पहुंचे, तो संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया और उन्हें सिक्कों से तौला।

प्रश्न 3: क्या 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का नया भाव घोषित हो गया है?

नहीं, 21 अक्टूबर तक पेराई सत्र 2026-27 के लिए राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) घोषित नहीं हुआ था। 7 अक्टूबर को गन्ना आयुक्त कार्यालय की बैठक में 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग पर चर्चा हुई थी, और किसानों की यही मांग महापंचायत में भी उठी।

प्रश्न 4: क्या महापंचायत में बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठा?

हां। वक्ताओं ने गन्ने के बकाया भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग रखी। जिले की बिलाई चीनी मिल का बकाया लंबे समय से चर्चा में है।

प्रश्न 5: पंचायत में जमीन के मुआवजे पर क्या कहा गया?

किसान नेताओं ने कहा कि हाईवे निर्माण के लिए ली जा रही जमीन का सर्किल रेट तीन-चार लाख रुपये प्रति बीघा बताया जा रहा है, जबकि बाजार मूल्य 10-15 लाख रुपये प्रति बीघा तक है। मांग है कि तहसील स्तर पर सर्वे कराकर चार गुना मुआवजा दिया जाए।

स्रोत: अमर उजाला (21 अक्टूबर 2026), चिनिमंडी (19 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन, गांव जंक्शन (9 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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