बिजनौर कलेक्ट्रेट में हजारों किसानों की महापंचायत: बकाये पर ब्याज और लागत के हिसाब से गन्ना भाव की मांग तेज

बिजनौर (CaneUp विशेष ब्यूरो — 30 सितंबर 2026 सुबह 9:55 बजे): गन्ना किसानों के दो सबसे पुराने दर्द — देरी से मिलने वाला बकाया और लागत से नीचे का भाव — एक बार फिर सड़क पर उतर आए हैं। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के आह्वान पर 22 सितंबर को बिजनौर कलेक्ट्रेट परिसर में हुई महापंचायत में हजारों किसान सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे। मांगें सीधी थीं: बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज दिया जाए, गन्ने का भाव उत्पादन लागत के हिसाब से तय हो, और गंगा एक्सप्रेसवे में चिह्नित भूमि का सर्किल रेट मौजूदा स्थिति के अनुसार निर्धारित किया जाए। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह खुद महापंचायत में मौजूद थे।
खास बात यह है कि यह आंदोलन सिर्फ बिजनौर तक सीमित नहीं रहा। पीलीभीत, मुरादाबाद समेत पश्चिमी यूपी के कई जिलों में कलेक्ट्रेट और गन्ना आयुक्त कार्यालयों के सामने किसानों के धरने कई दिनों से चल रहे हैं — पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले किसान अपनी शर्तें साफ करना चाहते हैं।
कलेक्ट्रेट के बाहर क्या हुआ?
22 सितंबर को बिजनौर कलेक्ट्रेट परिसर में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले हुई महापंचायत में पश्चिमी यूपी के लगभग सभी जिलों से किसान सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे। ट्रैक्टर मार्च निकाला गया, नारेबाजी हुई और किसानों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मांगों को लेकर बातचीत भी हुई।
किसान संगठनों का कहना है कि इन मुद्दों का सीधा असर किसानों की आय, जमीन के मूल्य और ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा पर पड़ता है।
किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?
महापंचायत से निकली मांगों की सूची पांच बिंदुओं पर केंद्रित है:
1. बकाया भुगतान पर ब्याज: यह सबसे अहम मांग है। किसानों का कहना है कि जब चीनी मिलें महीनों तक गन्ना मूल्य का भुगतान रोकती हैं, तो किसान को जरूरतें पूरी करने के लिए महंगे कर्ज पर पैसा उठाना पड़ता है। इसलिए देरी की अवधि का ब्याज भी किसानों को मिलना चाहिए।
2. लागत के अनुसार गन्ना भाव: गन्ने का मूल्य उत्पादन लागत के हिसाब से तय किया जाए। किसानों का तर्क है कि डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक और मजदूरी की लागत हर साल बढ़ रही है, लेकिन भाव उसी अनुपात में नहीं बढ़ता।
3. 2026-27 का SAP अभी तक घोषित नहीं: पेराई सत्र 2026-27 सिर पर है, लेकिन अब तक गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) घोषित नहीं हुआ है। किसानों का दबाव है कि मिलें चलने से पहले ही भाव घोषित किया जाए। साफ रहे कि पिछले पेराई सत्र 2025-26 का SAP अगेती किस्मों के लिए ₹400 प्रति क्विंटल था — 2026-27 की दर की घोषणा अभी बाकी है।
4. गंगा एक्सप्रेसवे की जमीन का सर्किल रेट: बिजनौर में एक्सप्रेसवे के लिए चिह्नित भूमि का सर्किल रेट मौजूदा कीमतों के अनुसार संशोधित करने की मांग उठी है। किसानों का कहना है कि पुराने सर्किल रेट पर अधिग्रहण से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है।
5. गुलदार की समस्या से राहत: गन्ने के खेतों में गुलदार की बढ़ती आमद से किसान डर रहे हैं। संगठन ने इस समस्या से राहत की भी मांग की है।
ब्याज की मांग क्यों उठ रही है अब?
यह कोई नई मांग नहीं है, लेकिन इस बार इसे सबसे आगे रखा गया है। पिछले कुछ सत्रों में कई चीनी मिलों पर गन्ना मूल्य बकाया रहना आम हो गया है। ऐसे में किसानों का तर्क सीधा है — बैंक भी कर्ज पर ब्याज लेता है, तो देरी के लिए मिलों से ब्याज क्यों नहीं? अब कई जिलों के किसान संगठन इस मांग को एक साथ उठा रहे हैं, जिससे इसका दबाव बढ़ गया है।
पेराई सत्र 2026-27: मिलें जल्दी चलने की तैयारी में
महापंचायत की दूसरी बड़ी मांग मिलों के जल्दी खुलने से जुड़ी है। इस बीच पश्चिमी यूपी की चीनी मिलें भी 2026-27 पेराई सत्र को करीब 10 दिन पहले शुरू करने की तैयारी कर रही हैं।
प्रकाशित खबरों के अनुसार, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलों में बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरे करने की योजना है, ताकि संचालन अक्टूबर के तीसरे सप्ताह तक शुरू हो सके। उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से 71 से अधिक पश्चिमी यूपी में ही हैं। लेकिन प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार यूपी में गन्ने का रकबा करीब 47,000 हेक्टेयर घटकर 28.87 लाख हेक्टेयर से 28.4 लाख हेक्टेयर रह गया है — लागत, देरी से भुगतान और लंबे फसल चक्र को इसकी वजह माना जा रहा है।
किसानों के लिए अभी क्या करना जरूरी है?
पेराई सत्र शुरू होने से पहले हर गन्ना किसान को कुछ काम निपटा लेने चाहिए:
1. सर्वे रिकॉर्ड की जांच करें: अपने गन्ने के रकबे, किस्म और सट्टे का रिकॉर्ड caneup.in पोर्टल या सट्टा प्रदर्शन मेले में जांच लें। रिकॉर्ड में गलती होने पर भुगतान अटक सकता है।
2. बैंक खाता सक्रिय रखें: बैंक खाता सक्रिय और आधार से लिंक होना चाहिए, ताकि DBT के जरिए भुगतान में कोई रुकावट न आए।
3. गन्ना समिति की सदस्यता: जो किसान अभी तक गन्ना समिति के सदस्य नहीं हैं, वे सदस्यता की प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि 2026-27 सत्र में गन्ना आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
4. शिकायत के लिए हेल्पलाइन: किसी भी समस्या के लिए गन्ना विकास विभाग का टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 चालू है। यह नंबर विभाग के आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित है।
क्या होगा आगे?
किसान संगठनों का स्पष्ट संदेश है कि 2026-27 का SAP पेराई सत्र शुरू होने से पहले घोषित हो और बकाये पर ब्याज की मांग पर ठोस जवाब आए। अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो पश्चिमी यूपी के और जिलों में आंदोलन तेज होने की संभावना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: बिजनौर महापंचायत कब और क्यों हुई थी? उत्तर: 22 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के आह्वान पर बिजनौर कलेक्ट्रेट परिसर में महापंचायत हुई थी। मुख्य मांगें थीं — बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज, लागत के अनुसार गन्ना भाव, गंगा एक्सप्रेसवे की जमीन का मौजूदा सर्किल रेट और गुलदार समस्या से राहत। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह स्वयं इसमें शामिल हुए थे।
प्रश्न: 2026-27 का गन्ना भाव (SAP) घोषित हुआ या नहीं? उत्तर: नहीं। 30 सितंबर 2026 तक गन्ने का SAP 2026-27 सत्र के लिए घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र 2025-26 का SAP अगेती किस्मों के लिए ₹400 प्रति क्विंटल था। 2026-27 की दर की घोषणा अभी बाकी है।
प्रश्न: बकाये पर ब्याज की मांग का आधार क्या है? उत्तर: किसान संगठनों का कहना है कि जब चीनी मिलें महीनों तक गन्ना मूल्य का भुगतान रोकती हैं, तो किसानों को महंगे कर्ज पर पैसा उठाना पड़ता है। इसलिए देरी की अवधि का ब्याज भी किसानों को मिलना चाहिए।
प्रश्न: पेराई सत्र 2026-27 कब शुरू होगा? उत्तर: पश्चिमी यूपी की मिलें करीब 10 दिन पहले यानी अक्टूबर के तीसरे सप्ताह तक पेराई शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरे होने की योजना है।
प्रश्न: गन्ना किसान शिकायत कहां दर्ज करा सकते हैं? उत्तर: गन्ना विकास विभाग का टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 चौबीसों घंटे चालू है। इसके अलावा जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या गन्ना समिति से भी संपर्क किया जा सकता है।
स्रोत: अमर उजाला (22 सितंबर 2026), किसान इंडिया (22 सितंबर 2026), द टाइम्स ऑफ इंडिया (28 सितंबर 2026)।
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