21 अक्टूबर को बिजनौर में राकेश टिकैत की महापंचायत: गन्ना भाव ₹600 प्रति क्विंटल की मांग, नुमाइश मैदान में जुटेंगे हजारों किसान

बिजनौर के किसानों के लिए बड़ी खबर है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) 21 अक्टूबर को शहर के नुमाइश मैदान में बड़ी महापंचायत करने जा रही है। इस महापंचायत में संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत खुद शामिल होंगे। महापंचायत की सबसे बड़ी मांग है गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करना। बकाया गन्ना भुगतान, अधिग्रहित जमीन का मुआवजा और घरों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर जैसे मुद्दे भी महापंचायत में उठाए जाएंगे।
19 अक्टूबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान
भाकियू के जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान ने सोमवार, 19 अक्टूबर को गन्ना समिति सभागार में पत्रकार वार्ता करके महापंचायत की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए किसानों को उनकी फसल का सही भाव मिलना जरूरी है। महापंचायत में गन्ने का भाव बढ़ाने के साथ-साथ बकाया गन्ना भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। जिलाध्यक्ष ने पूरे जिले के किसानों से 21 अक्टूबर को नुमाइश मैदान में बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है।
गन्ना भाव 600 रुपये: किसानों का तर्क क्या है
किसान संगठनों का कहना है कि खाद, बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन गन्ने का भाव उस रफ्तार से नहीं बढ़ा। उत्तर प्रदेश में गन्ने की मौजूदा एसएपी 2025-26 सीजन के लिए अगेती किस्म पर 400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित है। 2026-27 सीजन के लिए नई एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। भाकियू की मांग है कि इस बार भाव सीधे 600 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए, ताकि किसानों की लागत और मेहनत का पूरा हिसाब मिले।
किसानों का तर्क है कि जब बाजार में हर चीज के दाम बढ़ रहे हैं, तो गन्ने का भाव भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए। उनका कहना है कि गन्ना अकेली ऐसी फसल है जिस पर किसान को साल भर इंतजार करना पड़ता है और कई बार भुगतान में भी देरी होती है। ऐसे में सम्मानजनक भाव उनकी बुनियादी मांग है।
बकाया भुगतान और जमीन मुआवजे का मुद्दा
महापंचायत में सिर्फ भाव की मांग नहीं होगी। जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान ने बताया कि जिन किसानों का गन्ना भुगतान अभी तक बकाया है, उसका मुद्दा भी उठाया जाएगा। किसानों की शिकायत है कि पिछला बकाया चुकाए बिना नया पेराई सत्र शुरू करना अन्याय होगा।
इसके अलावा राजमार्ग और औद्योगिक गलियारे के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजे की दर का मुद्दा भी महापंचायत में उठेगा। किसान संगठनों का कहना है कि अधिग्रहण में किसानों को उनका हक नहीं मिल रहा। फसल नुकसान का मुआवजा भी महापंचायत की एजेंडा सूची में है।
स्मार्ट मीटर को लेकर भी विरोध
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक और मुद्दा जोरदार तरीके से उठा — गांवों में घरों पर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर। भाकियू पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बिजनौर में प्रशासन पुलिस बल के जरिए किसानों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने का प्रयास कर रहा है। संगठन ने कहा कि वह दबाव के जरिए मीटर लगाने का विरोध करेगा और यह मुद्दा भी 21 अक्टूबर की महापंचायत में प्रमुखता से उठाया जाएगा। भाकियू का कहना है कि किसानों से जुड़े इस मुद्दे का समाधान बातचीत और सही प्रक्रिया से होना चाहिए, जबरदस्ती से नहीं।
धान खरीद केंद्र की भी मांग
महापंचायत में धान खरीद केंद्रों से जुड़ी समस्याएं भी रखी जाएंगी। किसानों की शिकायत है कि कई जगह खरीद केंद्र सही तरीके से काम नहीं कर रहे, जिससे उन्हें अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ती है। इस मुद्दे को भी महापंचायत में उठाया जाएगा।
क्यों अहम है यह महापंचायत
बिजनौर उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक जिला माना जाता है। यहां की किसी भी किसान महापंचायत का असर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों पर पड़ता है। खास बात यह है कि यह महापंचायत उसी हफ्ते हो रही है जब पश्चिमी यूपी की कई मिलों में नया पेराई सत्र शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। पेराई शुरू होने से ठीक पहले 600 रुपये भाव की मांग का दबाव सीधे सरकार और मिल प्रबंधनों पर पड़ेगा।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि 23 अक्टूबर को लखनऊ में भाकियू की एक और महापंचायत प्रस्तावित है, जिसमें भी गन्ना मूल्य का मुद्दा मुख्य होगा। बिजनौर की महापंचायत को उसकी तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
राकेश टिकैत की मौजूदगी का मतलब
राकेश टिकैत की किसी भी किसान आंदोलन में मौजूदगी उसे राज्यस्तर की खबर बना देती है। भाकियू ने उम्मीद जताई है कि उनकी मौजूदगी से महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान जुटेंगे और मांगों पर प्रशासन का ध्यान जाएगा। पिछले वर्षों में भी बिजनौर में टिकैत के कार्यक्रमों में भारी भीड़ उमड़ी है।
क्या होगा आगे
महापंचायत में पास होने वाले प्रस्तावों के बाद भाकियू आगे की रणनीति तय करेगा। संगठन ने पहले ही कहा है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा। किसानों की नजर अब 21 अक्टूबर की इस महापंचायत और उसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया पर है। पेराई सत्र की शुरुआत के समय में हो रही यह महापंचायत यूपी के गन्ना किसानों के लिए इस साल की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक हो सकती है।
जवाब जानिए
महापंचायत कब और कहां होगी? 21 अक्टूबर को बिजनौर के नुमाइश मैदान में भाकियू की महापंचायत होगी। इसमें राकेश टिकैत भी शामिल होंगे।
महापंचायत की मुख्य मांग क्या है? गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करना मुख्य मांग है। इसके साथ बकाया भुगतान, जमीन का मुआवजा और स्मार्ट मीटर का विरोध भी मुद्दे हैं।
गन्ने का मौजूदा सरकारी भाव क्या है? उत्तर प्रदेश में गन्ने की एसएपी 2025-26 सीजन के लिए अगेती किस्म पर 400 रुपये प्रति क्विंटल है। 2026-27 सीजन के लिए नई एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।
स्मार्ट मीटर का मुद्दा क्या है? भाकियू का आरोप है कि बिजनौर में प्रशासन पुलिस बल के जरिए किसानों के घरों में स्मार्ट मीटर लगा रहा है। संगठन दबाव से मीटर लगाने का विरोध कर रहा है।
क्या पेराई सत्र पर इसका असर पड़ेगा? पश्चिमी यूपी में अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में पेराई सत्र शुरू होने की संभावना है। महापंचायत से मिल प्रबंधनों और सरकार पर भाव बढ़ाने का दबाव बनेगा।
स्रोत: अमर उजाला (19 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (20 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (19 अक्टूबर 2026)
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