₹58 करोड़ बकाया: बिलाई चीनी मिल को किसान बोले 'गन्ना नहीं' — 5,000 शपथ पत्र, पेराई सीजन से पहले बिजनौर में बड़ा ऐलान

बिजनौर के गन्ना किसानों ने नया पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही बिलाई चीनी मिल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मिल पर पिछले पेराई सत्र का करीब ₹58.15 करोड़ गन्ना भुगतान बकाया है, और इसे लेकर भाकियू अराजनैतिक ने गांव-गांव में “भुगतान नहीं तो गन्ना नहीं” अभियान शुरू कर दिया है। संगठन का दावा है कि करीब 5,000 किसानों से शपथ पत्र भरवाए जाएंगे, जिनमें वे बिलाई चीनी मिल को अपना गन्ना न देने का फैसला लिखेंगे।
जिला प्रशासन से मांग की गई है कि जो किसान बिलाई मिल को गन्ना नहीं देना चाहते, उनके गन्ने का आवंटन समय पर भुगतान करने वाली दूसरी चीनी मिलों को किया जाए।
58 करोड़ का हिसाब — बकाया की पूरी कहानी
हिंदुस्तान और चीनीमंडी की रिपोर्ट के अनुसार, बिलाई चीनी मिल ने अभी तक किसानों को पिछले पेराई सत्र (2025-26) का पूरा गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है। मिल पर किसानों का करीब 58 करोड़ 15 लाख रुपये बकाया बताया जा रहा है। समय पर भुगतान न होने से किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है — घर के खर्च से लेकर बच्चों की स्कूल फीस और बीमारी के इलाज तक, हर जगह परेशानी खड़ी हो रही है।
बिजनौर जिले में कुल 10 चीनी मिलें संचालित हैं, और इनमें बिलाई चीनी मिल पर सबसे बड़ा बकाया है। किसान संगठनों का कहना है कि बकाया भुगतान के लिए लगातार धरने-प्रदर्शन हुए, जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन इसके बावजूद किसानों को अब तक शत-प्रतिशत बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं मिल सका।
जिला गन्ना अधिकारी का कहना है कि किसानों को बकाया भुगतान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन किसानों का सवाल सीधा है — जब नया पेराई सत्र दरवाजे पर है, तो पुराना हिसाब कब साफ होगा?
‘भुगतान नहीं तो गन्ना नहीं’ — अभियान कैसे चलेगा
भाकियू अराजनैतिक ने बिलाई चीनी मिल के खिलाफ किसानों की एकता को मजबूत करने के लिए आंदोलन की शुरुआत कर दी है। किसान नेता दिगंबर सिंह ने बताया कि लगभग 5,000 किसानों से शपथ पत्र भरवाए जाएंगे। ये शपथ पत्र एक तरह की लिखित प्रतिबद्धता होगी — बकाया भुगतान न होने की स्थिति में किसान बिलाई मिल को गन्ना नहीं देंगे।
संगठन के जिलाध्यक्ष नितिन कुमार सिरोही ने शुक्रवार को छाछरी, मंडोरा जट और मंडावली समेत कई गांवों में किसानों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में किसानों ने बिलाई शुगर मिल को गन्ना न देने की इच्छा जताई। बैठकों के बाद अभियान का स्वरूप और तेज हो गया है, और अब गांव-गांव जाकर शपथ पत्र भरवाने की योजना पर काम चल रहा है।
यह कोई पहली बार नहीं है कि बिलाई मिल का नाम बकाया को लेकर सुर्खियों में आया है। किसान संगठनों के लगातार दबाव के बावजूद मिल प्रबंधन पूरी राशि का भुगतान नहीं कर पाया, और यही वजह है कि अब किसान सीधे आपूर्ति रोकने की राह पर हैं।
डीएम से क्या मांग की गई
किसान नेता दिगंबर सिंह ने कहा है कि जिला प्रशासन से अनुरोध किया जाएगा कि इच्छुक किसानों के गन्ने का आवंटन समय पर भुगतान करने वाली चीनी मिलों को कराया जाए। इसका सीधा मतलब है — जिन किसानों को बिलाई मिल से भुगतान पर भरोसा नहीं, वे अपना गन्ना दूसरी मिल के क्रय केंद्रों पर बेचना चाहते हैं।
गन्ना आपूर्ति में क्रय केंद्र और सट्टा व्यवस्था अहम भूमिका निभाते हैं। अगर प्रशासन किसानों के गन्ने का आवंटन दूसरी मिलों को करता है, तो बिलाई मिल को इस सीजन में गन्ने की कमी का सामना करना पड़ सकता है। यह दबाव मिल प्रबंधन पर बकाया भुगतान जल्दी चुकाने के लिए असर डाल सकता है।
अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में पेराई की उम्मीद
अक्टूबर में नया गन्ना पेराई सत्र शुरू होने की तैयारी है। बिलाई चीनी मिल के अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में चलने की उम्मीद जताई जा रही है। माना जा रहा है कि सितंबर के अंत में मिल अपने क्रय केंद्रों पर गन्ना तौल के लिए कांटे भेजना शुरू करेगी, और आगामी पेराई सत्र की तैयारी तेज होगी।
यहां एक विरोधाभास साफ दिख रहा है — एक तरफ मिल नई पेराई की तैयारी में है, दूसरी तरफ किसानों को पुराने भुगतान का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। किसानों की मांग है कि नया सीजन शुरू होने से पहले उन्हें पिछली बकाया राशि का भुगतान करा दिया जाए, ताकि उनकी आर्थिक परेशानियां कुछ कम हो सकें।
दूसरी ओर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें इस बार सामान्य समय से करीब 10 दिन पहले पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 20 अक्टूबर के आसपास मिलें चलने लग सकती हैं। प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं।
देर से भुगतान पर किसान के अधिकार
गन्ना मूल्य भुगतान में देरी पर किसानों के पास कानूनी अधिकार हैं। गन्ना (नियंत्रण) आदेश के तहत मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। देरी होने पर बकाया राशि पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज का प्रावधान है। यानी बिलाई मिल का जो बकाया है, उस पर ब्याज की मांग भी किसान संगठनों के एजेंडे में है।
अगर आपकी मिल भी भुगतान में देरी कर रही है, तो ये काम करें — जिला गन्ना अधिकारी को लिखित शिकायत दें, टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर अपनी समस्या दर्ज कराएं, और caneup.in पोर्टल पर अपने सट्टे और भुगतान की स्थिति ऑनलाइन जांचते रहें। शिकायत का रिकॉर्ड रखना इसलिए जरूरी है, क्योंकि बाद में बकाया और ब्याज की मांग में यही रिकॉर्ड काम आता है।
किसानों के लिए अब 4 जरूरी सलाह
पहली — अपने सट्टा और सर्वे रिकॉर्ड की जांच कर लें। नाम, रकबा और किस्म का विवरण सही होना चाहिए, वरना पर्ची और भुगतान दोनों अटक सकते हैं। दूसरी — बैंक खाता सक्रिय रखें और उसे आधार से जोड़कर रखें, ताकि भुगतान में तकनीकी रुकावट न आए। तीसरी — इस सीजन में किस मिल को गन्ना देना है, इसका फैसला बकाया भुगतान के रिकॉर्ड देखकर करें। और चौथी — पर्ची कैलेंडर caneup.in पर नियमित देखते रहें, ताकि क्रय केंद्र और तौल की जानकारी समय पर मिले।
आपके सवाल
बिलाई चीनी मिल पर कितना बकाया है? मिल पर किसानों का पिछले पेराई सत्र का करीब 58 करोड़ 15 लाख रुपये (₹58.15 करोड़) गन्ना भुगतान बकाया है। जिले की 10 मिलों में यह सबसे बड़ा बकाया बताया जा रहा है।
‘भुगतान नहीं तो गन्ना नहीं’ अभियान क्या है? भाकियू अराजनैतिक का अभियान है, जिसमें करीब 5,000 किसानों से शपथ पत्र भरवाए जा रहे हैं। बकाया भुगतान न होने पर ये किसान बिलाई चीनी मिल को गन्ना न देने का फैसला ले रहे हैं।
क्या किसान अपना गन्ना दूसरी मिल को दे सकते हैं? किसान नेता दिगंबर सिंह ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इच्छुक किसानों के गन्ने का आवंटन समय पर भुगतान करने वाली दूसरी चीनी मिलों को कराया जाए। फैसला प्रशासन के स्तर पर होगा।
बिलाई मिल में पेराई कब शुरू होगी? अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बिलाई चीनी मिल के चलने की उम्मीद जताई जा रही है। सितंबर के अंत में मिल क्रय केंद्रों पर कांटे भेजना शुरू कर सकती है।
बकाया भुगतान के लिए कहां शिकायत करें? जिला गन्ना अधिकारी को लिखित शिकायत दें, टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराएं, और caneup.in पोर्टल पर भुगतान की स्थिति ऑनलाइन जांचें।
स्रोत: हिंदुस्तान (बिजनौर), चीनीमंडी (ChiniMandi)
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