गन्ना ₹500 प्रति क्विंटल करो: लखनऊ में अपर मुख्य सचिव से मिले भाकियू अराजनैतिक नेता, बोले – कोल्हू पर 480 मिल रहा है

पेराई सत्र शुरू होने में अब गिने-चुने दिन बचे हैं और उससे पहले ही गन्ने के दाम की लड़ाई तेज हो गई है। लखनऊ के बापू भवन में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के प्रतिनिधिमंडल ने अपर मुख्य सचिव (गन्ना एवं चीनी उद्योग) वीना कुमारी से मुलाकात की और सत्र शुरू होने से पहले गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग रखी। प्रतिनिधिमंडल में संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक और युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह शामिल थे।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिमी यूपी के कई जिलों में किसान संगठन 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। महज एक हफ्ते पहले 16 अक्टूबर को भाकियू अराजनैतिक ने प्रदेशभर के जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन किया था। अब संगठन ने शासन के शीर्ष अधिकारियों से सीधी बातचीत का रास्ता अपनाया है।
बापू भवन में क्या बात हुई
धर्मेंद्र मलिक ने अपर मुख्य सचिव से कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और प्रदेश के करीब 48 लाख किसान परिवार इससे जुड़े हैं। डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और कृषि मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि गन्ने के मूल्य में लागत के अनुरूप वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि किसानों को लाभकारी मूल्य देना जरूरी है।
मलिक ने बैठक में एक अहम आंकड़ा भी रखा। उनके मुताबिक वर्तमान में कोल्हू और क्रेशर पर गन्ने की खरीद 480 रुपये प्रति क्विंटल तक की जा रही है। उनका दावा है कि अगर मिलों को सरकारी दर पर ही गन्ना खरीदना पड़ा तो किसान कोल्हू की ओर जाएंगे और चीनी मिलों के सामने गन्ना आपूर्ति का संकट पैदा हो सकता है। पिछले वर्ष भी कोल्हू-क्रेशरों ने एसएपी से अधिक भुगतान किया था।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि गन्ना मूल्य तय करते समय चीनी, एथेनॉल, शीरा और अन्य उप-उत्पादों से मिलों को होने वाली आय को भी ध्यान में रखा जाए। उनका तर्क है कि जब बाजार में चीनी के दाम ऊंचे हैं तो किसानों को भी लागत के अनुरूप उचित मूल्य मिलना चाहिए।
चीनी के दाम बढ़े, किसान के दाम नहीं
मांग की बुनियाद में चीनी के खुदरा मूल्यों का हवाला दिया गया है। संगठन के मुताबिक केंद्र सरकार के 21 अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई से 20 अगस्त 2026 के बीच चीनी का औसत खुदरा मूल्य 48.18 रुपये से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि चीनी, एथेनॉल, शीरा और अन्य उप-उत्पादों से होने वाली आय को ध्यान में रखकर गन्ना मूल्य का निष्पक्ष निर्धारण होना चाहिए। खुदरा बाजार में चीनी के दाम 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंचने की खबरें भी आ रही हैं।
बजाज मिलों के बकाये पर नाराजगी
बैठक में युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने बजाज समूह की चीनी मिलों पर किसानों का बकाया भुगतान लंबित होने के बावजूद गन्ने का क्षेत्रफल कम न करने पर नाराजगी जताई। उन्होंने गन्ना सुरक्षण आदेश की समीक्षा कराने और इसे तैयार करने वाले अधिकारियों की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि जलभराव, रेड रॉट और टॉप बोरर जैसे रोगों व कीटों के कारण इस वर्ष उत्पादन में गिरावट आ सकती है, और उचित मूल्य न मिलने से किसान पॉपुलर व यूकेलिप्टस जैसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव ने क्या आश्वासन दिया
बैठक के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक अपर मुख्य सचिव वीना कुमारी ने गन्ना मूल्य निर्धारण के समय किसानों की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है, साथ ही गन्ना सुरक्षण आदेश की समीक्षा की बात भी कही है। संगठन ने अभी आंदोलन का रास्ता बंद नहीं किया है — अगर पेराई सत्र शुरू होने से पहले एसएपी की घोषणा नहीं हुई तो आगे के कार्यक्रम तय होने की संभावना है।
मौजूदा हालात: 2025-26 में 400 रुपये था एसएपी
किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि मांग और मौजूदा दर में कितना अंतर है। 2025-26 पेराई सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती किस्म) घोषित किया था। भाकियू अराजनैतिक की मांग 500 रुपये प्रति क्विंटल की है — यानी मौजूदा दर से 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी। 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। आमतौर पर सरकार पेराई सत्र शुरू होने से पहले नई दरों का ऐलान करती है, और किसान संगठनों का दबाव है कि ऐलान सत्र शुरू होने से पहले हो। केंद्र की एफआरपी अलग से घोषित होती है, लेकिन यूपी में मिलों को एसएपी के हिसाब से भुगतान करना होता है — इसलिए किसानों के लिए एसएपी ही असली दर है।
पेराई सत्र की तैयारियां और किसान की चिंता
इस बीच प्रदेश में पेराई सत्र की तैयारियां भी चल रही हैं — कई चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिए हैं और कुछ में पेराई शुरू भी हो चुकी है। लेकिन किसान संगठनों का रुख साफ है — नए सत्र से पहले पुराना बकाया चुकता हो और नई दर का ऐलान हो।
किसानों के लिए इस समय सबसे जरूरी है कि वे अपने गन्ना केंद्र और पर्ची कैलेंडर पर नजर बनाए रखें। इस सत्र में कई जगह केंद्र बदले गए हैं — जैसे बरेली की केसर मिल के 40 केंद्र छीनकर दूसरी मिलों को दे दिए गए। इसलिए किसान यह जरूर जांच लें कि उनका गन्ना केंद्र इस सत्र में किस मिल से जुड़ा है।
किसान अब क्या करें
- अपना गन्ना केंद्र जांचें: इस सत्र में कई मिलों के केंद्र बदले गए हैं। अपने केंद्र और जुड़ी मिल की पुष्टि कर लें।
- पर्ची कैलेंडर पर नजर रखें: पेराई शुरू होते ही पर्ची जारी होगी। समय पर गन्ना केंद्र पर पहुंचाना भुगतान की देरी से बचाता है।
- बकाया भुगतान का रिकॉर्ड रखें: पिछले सत्र का बकाया हो तो रसीदें और एसएमएस संभालकर रखें — शिकायत में यही सबूत काम आएंगे।
- कोल्हू को गन्ना देने से पहले सोचें: कोल्हू पर 480 रुपये का भाव आकर्षक है, लेकिन मिल की पर्ची से जुड़ा रिकॉर्ड भविष्य के भुगतान और योजनाओं में काम आता है।
जवाब जानिए
सवाल: भाकियू अराजनैतिक ने गन्ने के दाम को लेकर क्या मांग की है? जवाब: संगठन ने बापू भवन में अपर मुख्य सचिव वीना कुमारी से मुलाकात कर पेराई सत्र 2026-27 से पहले एसएपी 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग की है।
सवाल: बैठक में धर्मेंद्र मलिक ने कौन से आंकड़े रखे? जवाब: उन्होंने कहा कि प्रदेश के करीब 48 लाख किसान परिवार गन्ने से जुड़े हैं, कोल्हू-क्रेशर पर गन्ना 480 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीदा जा रहा है, और 20 जुलाई से 20 अगस्त 2026 के बीच चीनी का औसत खुदरा मूल्य 48.18 से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हुआ है।
सवाल: 2025-26 सत्र में एसएपी कितना था? जवाब: 2025-26 सत्र में यूपी सरकार ने गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती किस्म) घोषित किया था। 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।
सवाल: अपर मुख्य सचिव ने क्या आश्वासन दिया? जवाब: वीना कुमारी ने गन्ना मूल्य निर्धारण के समय किसानों की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और गन्ना सुरक्षण आदेश की समीक्षा कराने का आश्वासन दिया है।
स्रोत: फ्रेंड्स रिपोर्टर (23 अक्टूबर 2026), हिंदुस्तान सिटी न्यूज (22 अक्टूबर 2026)
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