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आज लखनऊ में भाकियू (तोमर) की महापंचायत: गन्ना ₹600 प्रति क्विंटल समेत 36 मांगों का ज्ञापन सौंपने की तैयारी

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 4, 2026 • 6 min read
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आज लखनऊ में भाकियू (तोमर) की महापंचायत: गन्ना ₹600 प्रति क्विंटल समेत 36 मांगों का ज्ञापन सौंपने की तैयारी
अंतिम अपडेट: November 4, 2026 6:31 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुज़फ़्फ़रनगर से किसान 3 नवंबर की शाम नौचंदी एक्सप्रेस से लखनऊ के लिए रवाना हुए, और 4 नवंबर को राजधानी में भारतीय किसान यूनियन (तोमर) की महापंचायत का एलान किया गया है। संगठन की सबसे बड़ी मांग गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करना है। इसके साथ ही बकाया गन्ना भुगतान ब्याज सहित दिलाने, किसानों पर दर्ज कथित फ़र्ज़ी मुकदमे वापस लेने और कृषि नलकूपों के लिए मुफ़्त बिजली देने समेत कुल 36 मांगों का ज्ञापन रखने की योजना है। स्थल लखनऊ के 17 महाराणा प्रताप मार्ग स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय बताया गया है।

एक बात साफ़ रहे: 600 रुपये प्रति क्विंटल संगठन की मांग है, सरकार की घोषित दर नहीं। पेराई सत्र 2026-27 के लिए यूपी के राज्य परामर्शी मूल्य यानी एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। इसलिए यह महापंचायत दाम बढ़ाने की मांग के लिए दबाव बनाने की कोशिश है, न कि कोई सरकारी घोषणा।

मुज़फ़्फ़रनगर से लखनऊ कूच कैसे हुआ

संगठन ने पहले ही 3 नवंबर को लखनऊ कूच का कार्यक्रम घोषित कर दिया था। शाह टाइम्स के मुताबिक, मुज़फ़्फ़रनगर से भाकियू (तोमर) के कार्यकर्ता नौचंदी एक्सप्रेस से रवाना हुए। इससे पहले छपार क्षेत्र के गांव सिमरथी में जिला सचिव भीम सिंह के आवास पर बैठक हुई, जिसमें लखनऊ पंचायत की तैयारी पर चर्चा की गई। अमर उजाला के मुताबिक, इस बैठक में संगठन के अध्यक्ष संजीव तोमर ने कहा कि चार नवंबर को किसानों पर फ़र्ज़ी मुकदमे के विरोध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक के कार्यालय पर पंचायत की जाएगी, और जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, पंचायत जारी रहेगी। देहरादून से भी युवा प्रदेश अध्यक्ष अंकित चौहान के नेतृत्व में किसानों का जत्था 3 नवंबर को लखनऊ के लिए रवाना होना था।

36 सूत्रीय मांगपत्र में क्या-क्या शामिल है

संगठन ने राज्य सरकार के सामने 36 सूत्रीय मांगपत्र रखने की घोषणा की है। सार्वजनिक रिपोर्टों में इनमें से कुछ प्रमुख मांगों का उल्लेख है, जबकि पूरे ज्ञापन की प्रमाणित प्रति अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हुई है। इसलिए यहां सिर्फ़ वही मांगें दी जा रही हैं, जिनका विभिन्न रिपोर्टों में स्पष्ट उल्लेख है।

पहली मांग गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की है। संगठन का तर्क है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। दूसरी मांग बकाया गन्ना भुगतान जल्द से जल्द और ब्याज सहित कराने की है, जो उन किसानों के लिए सबसे अहम है जिनकी पिछली पेराई की रकम अटकी है। तीसरी मांग किसानों पर दर्ज कथित फ़र्ज़ी मुकदमों को वापस लेने की है। इसके अलावा कृषि नलकूपों के लिए मुफ़्त बिजली, किसानों का संपूर्ण कर्ज़ माफ़ करने और युवाओं को रोज़गार देने की मांग भी शामिल है।

गन्ने का दाम अभी कहां अटका है

पेराई सत्र 2026-27 उत्तर प्रदेश में शुरू हो चुका है। गन्ना विकास विभाग के मुताबिक, प्रदेश की 9 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो गई है, जबकि 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया है। इनमें से 24 मिलों में दीपावली से पहले पेराई शुरू होने की तैयारी है, और बाकी मिलें दीपावली के बाद शुरू होंगी। यानी किसान का गन्ना अब मिलों की ओर बढ़ रहा है, लेकिन जिस दाम पर वह खरीदा जाएगा, उसकी राज्य स्तरीय घोषणा अभी नहीं हुई है।

केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी एफ़आरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी पर लागू होता है। यह केंद्र का न्यूनतम मूल्य है। राज्य सरकारें इससे ऊपर अपना एसएपी घोषित करती हैं। किसानों की निगाह अब इसी घोषणा पर टिकी है। इस स्थिति में व्यावहारिक सलाह यही है कि पुराने सत्र की दर को इस सत्र की दर समझकर गन्ना न बेचें, और अपनी मिल का इंडेंट, पर्ची और तौल पर्ची संभालकर रखें।

बकाया भुगतान की मांग क्यों सबसे ज़्यादा असर रखती है

गन्ने के दाम की मांग सुर्ख़ियों में रहती है, लेकिन किसान परिवारों की रोज़मर्रा की परेशानी अक्सर बकाया भुगतान से जुड़ी होती है। जब पिछली पेराई की रकम महीनों तक नहीं मिलती, तो किसान को अगली फसल के लिए खाद, बीज और डीज़ल उधार लेना पड़ता है। ब्याज पर लिया गया कर्ज़ फिर अगली फसल की कमाई खा जाता है। इसलिए बकाया भुगतान ब्याज सहित कराने की मांग उस नुकसान की भरपाई की मांग है, जो देरी से किसान को उठाना पड़ता है।

राज्य सरकार की ओर से भी बकाया भुगतान को लेकर सख़्ती के संकेत मिले हैं। 4 नवंबर को ही ट्रैक्टर जंक्शन की रिपोर्ट के मुताबिक, समय पर भुगतान नहीं करने वाली 6 चीनी मिलों के ख़िलाफ़ वसूली प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं, जिनमें बरखेड़ा, मकसूदापुर, बहेड़ी, नवाबगंज, कुंदुरखी और मलकपुर की मिलें शामिल हैं। वसूली प्रमाण-पत्र के ज़रिए ज़िला प्रशासन को निर्देश दिया जाता है कि वह बकाया राशि को भू-राजस्व की तरह वसूलकर किसानों को भुगतान सुनिश्चित करे। अगर आपकी मिल का भुगतान अटका है, तो गन्ना समिति के सचिव और ज़िला गन्ना अधिकारी से लिखित में जानकारी मांगें। टोल-फ़्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 तथा एसएमएस शॉर्टकोड 51969 पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

आज की महापंचायत से क्या उम्मीद करें और क्या नहीं

इस ख़बर को लिखे जाने तक महापंचायत के अंतिम नतीजे, ज्ञापन की प्राप्ति की आधिकारिक पुष्टि और प्रशासन की प्रतिक्रिया का स्वतंत्र सत्यापन नहीं हो सका है। यानी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि सरकार ने कोई मांग मान ली है। पाठकों को सलाह है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाले ऐसे दावों पर भरोसा न करें, जिनमें बिना किसी आधिकारिक स्रोत के नतीजे की घोषणा कर दी गई हो। जो तय है, वह यह है कि मांगें सार्वजनिक हो चुकी हैं और लखनऊ कूच हो चुका है। अब निगाह ज्ञापन और प्रशासन के जवाब पर रहेगी। किसान अपनी पेराई, पर्ची और भुगतान पर ध्यान रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या गन्ने का दाम 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित हो गया है? नहीं। 600 रुपये प्रति क्विंटल भाकियू (तोमर) की मांग है। पेराई सत्र 2026-27 के लिए यूपी के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।

4 नवंबर की महापंचायत कहां और किस संगठन की है? यह महापंचायत भारतीय किसान यूनियन (तोमर) की है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर हैं। स्थल लखनऊ के 17 महाराणा प्रताप मार्ग स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय बताया गया है।

36 सूत्रीय मांगपत्र में कौन-कौन सी प्रमुख मांगें हैं? गन्ना 600 रुपये प्रति क्विंटल, बकाया भुगतान ब्याज सहित, कथित फ़र्ज़ी मुकदमे वापस लेना, कृषि नलकूपों के लिए मुफ़्त बिजली, संपूर्ण कर्ज़ माफ़ी और युवाओं को रोज़गार। पूरे ज्ञापन की प्रमाणित प्रति अभी उपलब्ध नहीं हुई है।

महापंचायत का कोई नतीजा सामने आया है? ख़बर लिखे जाने तक अंतिम नतीजे और प्रशासन की प्रतिक्रिया का स्वतंत्र सत्यापन नहीं हो सका है। आधिकारिक बयान या आदेश आने पर ही किसी नतीजे की पुष्टि होगी।

2026-27 के लिए केंद्र का एफ़आरपी कितना है? केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए एफ़आरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी पर लागू होता है। राज्य का एसएपी अलग से घोषित होता है।

बकाया भुगतान के लिए किसान कहां शिकायत करें? अपनी गन्ना समिति और ज़िला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। टोल-फ़्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 तथा एसएमएस शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध हैं।

स्रोत: शाह टाइम्स, 4 नवंबर 2026; अमर उजाला, 30 अक्टूबर 2026; गूंज केसरी, 1 नवंबर 2026; ट्रैक्टर जंक्शन, 4 नवंबर 2026।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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