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गन्ना ₹700 नहीं तो 2027 में वोट नहीं: मुजफ्फरनगर में भाकियू वर्मा की चेतावनी, लागत ₹550 पार, एसएपी बाकी

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 5, 2026 • 6 min read
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गन्ना ₹700 नहीं तो 2027 में वोट नहीं: मुजफ्फरनगर में भाकियू वर्मा की चेतावनी, लागत ₹550 पार, एसएपी बाकी
अंतिम अपडेट: November 5, 2026 3:32 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुजफ्फरनगर में बुधवार को हुई भारतीय किसान यूनियन वर्मा की बैठक में गन्ने के दाम को लेकर अब तक की सबसे सख्त चेतावनी सामने आई है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि अगर सरकार ने गन्ने का लाभकारी मूल्य 700 रुपये प्रति क्विंटल घोषित नहीं किया तो 2027 के विधानसभा चुनाव में किसान भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देंगे। बैठक महावीर चौक स्थित संगठन के जिला कार्यालय पर हुई, जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान अपनी मांगों के लिए आंदोलन की तैयारी पर सहमत हुए।

यह चेतावनी तब आई है जब पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है और 9 मिलों में पेराई चल रही है, लेकिन एसएपी (राज्य परामर्श मूल्य) की घोषणा अभी बाकी है। किसान नहीं जानते कि इस सत्र का गन्ना किस दर पर बिकेगा।

मुजफ्फरनगर बैठक में क्या-क्या कहा गया

बैठक को संबोधित करते हुए भगत सिंह वर्मा ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान अब अपने हक की लड़ाई के लिए पूरी तरह संगठित हो रहे हैं। गांव-गांव पंचायतों और जनजागरण अभियान के माध्यम से आंदोलन की पुख्ता तैयारी की जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि मांग पूरी न होने पर पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी से तत्काल निर्णय लेने की अपील की। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राकेश कुमार ने की और संचालन प्रदेश प्रवक्ता रोहित गौतम ने किया।

लागत 550 रुपये पार, सीएसीपी के 173 रुपये पर सवाल

वर्मा ने बैठक में बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि 2017 से प्रदेश के गन्ना किसानों का लगातार शोषण किया जा रहा है। चीनी मिलों को लाभ मिल रहा है, जबकि किसान कर्ज के बोझ में दब रहे हैं। खाद, बीज, कीटनाशक दवाइयां, कृषि यंत्र और मजदूरी लगातार महंगी होती जा रही हैं, इसलिए गन्ने की उत्पादन लागत अब 550 रुपये प्रति कुंतल से भी अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद किसानों को लागत के अनुरूप उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

किसान नेता ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की ओर से गन्ने की उत्पादन लागत 173 रुपये प्रति कुंतल बताए जाने पर भी कड़ा सवाल उठाया और इसका नया आकलन कराने की मांग की। उन्होंने डॉ. एमएस स्वामीनाथन की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा कि सभी लागतों पर 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर ही फसलों का मूल्य तय होना चाहिए।

19 हजार करोड़ ब्याज और 10 हजार करोड़ सीधे खाते में

वर्मा ने दावा किया कि गन्ना भुगतान में देरी के कारण करीब 19 हजार करोड़ रुपये का ब्याज बकाया है। उन्होंने मांग की कि बकाया भुगतान और देरी पर देय ब्याज किसानों को तत्काल दिलाया जाए, क्योंकि देरी से किसान खेती के लिए कर्ज लेने पर मजबूर होते हैं।

वर्मा ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में गन्ना क्षेत्र से जुड़े राजस्व के रूप में 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त की है और इसमें से 10 हजार करोड़ रुपये सीधे गन्ना किसानों के बैंक खातों में भेजे जाने चाहिए। पंजाब में 2025-26 के सीजन में किसानों को 67 रुपये 50 पैसे प्रति कुंतल का अतिरिक्त भुगतान किया गया है।

पेराई शुरू, पर एसएपी 2026-27 की घोषणा अभी बाकी

गन्ना विकास विभाग के अनुसार पेराई सत्र 2026-27 में प्रदेश की 9 चीनी मिलों में व्यावसायिक रूप से पेराई शुरू हो चुकी है। इनमें सहकारी क्षेत्र की एक और निजी क्षेत्र की आठ चीनी मिलें शामिल हैं। सहारनपुर की तीन, मेरठ की एक, मुरादाबाद की दो और लखनऊ की तीन मिलों ने पेराई शुरू कर दी है।

कुल 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी किया है, जिनमें से 24 की पेराई दिवाली से पहले शुरू होनी है। प्रदेश में 47 लाख से अधिक किसान मिलों को गन्ना बेचते हैं और इस सत्र में 28.14 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई है।

लेकिन 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती का भाव 400 रुपये, सामान्य का 390 रुपये और अनुपयुक्त का 355 रुपये प्रति क्विंटल था। किसान संगठनों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण पिछला भाव इस सत्र के लिए काफी नहीं होगा।

700 रुपये की मांग अकेली नहीं — बुलंदशहर से बागपत तक

700 रुपये की मांग सिर्फ मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं है। 31 अक्टूबर को बुलंदशहर में भाकियू महाशक्ति ने गन्ना रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और यही मांग रखी थी।

इससे पहले 19 अक्टूबर को बागपत के दाहा क्षेत्र में हुई बैठक में भी भगत सिंह वर्मा ने 700 रुपये से कम गन्ना मूल्य स्वीकार न करने का एलान किया था। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने दाम में कम से कम 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की मांग की है और भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने को कहा है। भाकियू तोमर ने भी 4 नवंबर को लखनऊ कूच के दौरान 600 रुपये प्रति क्विंटल भाव और भुगतान में देरी पर ब्याज की मांग उठाई थी।

किसानों के लिए इसका क्या मतलब है

जिन किसानों के पास पर्ची और इंडेंट आ गया है, वे गन्ने की आपूर्ति निर्धारित तारीख पर कर सकते हैं। भाव का फैसला अभी बाकी है, इसलिए पर्ची, तौल पर्ची और भुगतान की स्थिति पर नजर रखें। गन्ना विकास विभाग की ई-गन्ना व्यवस्था और caneup.in पोर्टल पर पर्ची कैलेंडर, तौल और भुगतान की जानकारी देखी जा सकती है।

अगर भुगतान में देरी होती है तो किसान अपनी समिति और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 उपलब्ध हैं, जबकि एसएमएस के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 है। आने वाले दिनों में सरकार के एसएपी फैसले पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि भाव बढ़ने पर लाखों किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: भाकियू वर्मा ने गन्ने का क्या भाव मांगा है?

भाकियू वर्मा ने गन्ने का लाभकारी मूल्य 700 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग की है, क्योंकि उत्पादन लागत 550 रुपये प्रति कुंतल से अधिक हो चुकी है।

प्रश्न 2: 2026-27 सत्र के लिए एसएपी की घोषणा हुई है या नहीं?

नहीं, 5 नवंबर 2026 तक 2026-27 सत्र के लिए एसएपी की घोषणा नहीं हुई है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए अगेती का भाव 400 रुपये, सामान्य का 390 रुपये और अनुपयुक्त प्रजाति का 355 रुपये प्रति क्विंटल तय था।

प्रश्न 3: इस समय यूपी में कितनी चीनी मिलों में पेराई चल रही है?

9 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है। कुल 33 मिलों ने इंडेंट जारी किया है और 24 मिलों की पेराई दिवाली से पहले शुरू होनी है।

प्रश्न 4: किसानों ने 2027 चुनाव को लेकर क्या चेतावनी दी है?

वर्मा ने कहा है कि भाव 700 रुपये घोषित न हुआ और बकाया ब्याज न मिला तो 2027 के विधानसभा चुनाव में किसान भाजपा को वोट नहीं देंगे। पूरे प्रदेश में बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

प्रश्न 5: गन्ना भुगतान में देरी पर किसान कहां शिकायत करें?

गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर जानकारी मिलती है; एसएमएस शॉर्टकोड 51969 है।

स्रोत: रॉयल बुलेटिन (5 नवंबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (5 नवंबर 2026), ईटीवी भारत (31 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (19 अक्टूबर और 4 नवंबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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