ब्राजील में बारिश से चीनी उत्पादन 38 मिलियन टन से नीचे गिरने का खतरा: कीमतें 19 महीने की ऊंचाई पर, यूपी के गन्ना किसानों पर क्या असर होगा

दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश ब्राजील के गन्ना बेल्ट में लगातार हो रही भारी बारिश ने वैश्विक चीनी बाजार में हलचल मचा दी है। ब्राजील के सेंटर-साउथ क्षेत्र में गन्ने की कटाई सुस्त पड़ गई है और विश्लेषकों का अनुमान है कि इस सीजन में वहां का चीनी उत्पादन 38 मिलियन टन के स्तर तक भी नहीं पहुंच पाएगा। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दिखा है — कच्ची चीनी के वायदा भाव 19 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। हजारों किलोमीटर दूर हो रही इस उठापटक का उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान पर क्या असर पड़ेगा, यही इस खबर का केंद्र है।
ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक है। वहां की मिलें गन्ने को चीनी या एथेनॉल में कितना बांटती हैं, यही वैश्विक आपूर्ति तय करता है — और यही बंटवारा इस बार मौसम की वजह से बिगड़ गया है।
ब्राजील में क्या हो रहा है
ब्राजील के सेंटर-साउथ क्षेत्र में सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश हो रही है। साओ पाउलो विश्वविद्यालय के मुताबिक, ब्राजील के चीनी बेल्ट के कई हिस्सों में बीती सर्दियां 100 साल से भी ज्यादा गीली रहीं। इससे गन्ने की कटाई की रफ्तार थम गई और मिलों तक गन्ना पहुंचने में देरी हो रही है।
बाजार विश्लेषकों के अनुमान लगातार घटते जा रहे हैं। जुलाई के आखिर में रॉयटर्स के एक सर्वे में 40 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अब ब्रोकरेज फर्म स्टोनएक्स का मानना है कि उत्पादन 38 मिलियन टन से भी नीचे रह सकता है। कटाई का सीजन दिसंबर में खत्म होता है, इसलिए अगले कुछ हफ्तों का मौसम निर्णायक होगा।
वैश्विक चीनी बाजार में 19 महीने की रिकॉर्ड तेजी
ब्राजील की खबरों के बाद 6 अक्टूबर को आईसीई एक्सचेंज पर कच्ची चीनी का वायदा भाव 20.90 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गया — 19 महीने का उच्चतम स्तर। सफेद चीनी का भाव भी बढ़कर 551 डॉलर प्रति टन हो गया और कारोबार के दौरान 553 डॉलर तक पहुंचा।
यूरोप से भी आपूर्ति घटने की खबर है: जर्मनी में चुकंदर से चीनी का उत्पादन 2026-27 में घटकर 3.33 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले सीजन में यह 4.421 मिलियन टन था। यानी वैश्विक बाजार में आपूर्ति दोनों तरफ से सिकुड़ रही है।
मिलें चीनी छोड़ एथेनॉल क्यों बना रहीं
दिलचस्प बात यह है कि चीनी के भाव बढ़ने के बावजूद ब्राजील की मिलें गन्ने का ज्यादा हिस्सा एथेनॉल में लगा रही हैं। वजह है मौसम — ज्यादा नमी वाले गन्ने में चीनी की सांद्रता घट जाती है, लेकिन ईंधन के तौर पर उसका इस्तेमाल प्रभावित नहीं होता।
जुलाई की शुरुआत तक मिलों ने अपने गन्ने का सिर्फ 42.5 प्रतिशत हिस्सा ही चीनी बनाने में लगाया था। अगस्त में चीनी के वायदा भाव में 21 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई, जिससे चीनी बनाना एथेनॉल के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत ज्यादा मुनाफेमंद हो गया। इसके बावजूद मिलें अपना उत्पादन-मिश्रण चीनी की तरफ नहीं बढ़ा पा रही हैं — सिर्फ मौसम की वजह से।
स्टोनएक्स के विश्लेषकों के मुताबिक, फसल के आखिरी दौर में अब बाजार भाव नहीं, बल्कि मौसम तय कर रहा है कि गन्ना चीनी बनेगा या एथेनॉल। ब्राजील के उत्पादन-मिश्रण में एक प्रतिशत का बदलाव भी वैश्विक आपूर्ति में करीब 7.5 लाख टन चीनी जोड़ या घटा देता है। इसलिए पूरी दुनिया की नजर अब ब्राजील के आसमान पर टिकी है।
भारत और यूपी के गन्ना किसानों पर क्या असर
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है, इसलिए वैश्विक कीमतों में तेजी का असर यहां भी पड़ता है। केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सीजन के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है (10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर)। रिकवरी 9.5 प्रतिशत से नीचे रहने पर भी किसानों को कम से कम 338.30 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा।
उत्तर प्रदेश में इस समय 122 चीनी मिलें संचालित हैं और नया पेराई सीजन 1 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। त्योहारी मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक व्यापारियों के लिए चीनी स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 15 दिन कर दी है, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक कीमतों में तेजी से भारतीय चीनी मिलों को दो तरह से राहत मिल सकती है — ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्यात के मौके बढ़ते हैं और घरेलू बाजार में भी कीमतों को सहारा मिलता है। मिलों की आर्थिक सेहत सुधरने का सीधा फायदा किसानों को समय पर गन्ना भुगतान के रूप में मिलता है।
एक बात स्पष्ट रहे — उत्तर प्रदेश में 2026-27 सीजन के राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सीजन का एसएपी इस सीजन का भाव नहीं माना जा सकता। किसान संगठनों की ओर से ज्यादा भाव की मांग पहले से उठ रही है, और वैश्विक बाजार की यह तेजी उनकी मांग को और वजन दे सकती है।
एथेनॉल की मांग भी किसानों के पक्ष में
ब्राजील की मिलें चीनी की जगह एथेनॉल बना रही हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर जैव ईंधन की मांग मजबूत बनी हुई है। भारत में भी एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम के तहत गन्ने से एथेनॉल बनाने पर जोर है। इससे चीनी मिलों को चीनी के अलावा आमदनी का दूसरा जरिया मिलता है, जो लंबे समय में गन्ना भुगतान की क्षमता बढ़ाता है।
यह समझना जरूरी है कि वैश्विक भाव बढ़ना अपने आप किसानों की जेब में पैसा नहीं डालता। फायदा तभी मिलता है जब मिलें ज्यादा कमाएं और वह कमाई समय पर भुगतान के रूप में किसानों तक पहुंचे। इसलिए असली कसौटी यही रहेगी कि पेराई सीजन में भुगतान कितना समय पर होता है।
आगे किन बातों पर नजर रखें
पहली नजर ब्राजील के मौसम पर रहेगी — बारिश थमी तो उत्पादन अनुमान सुधर सकता है, जारी रही तो कीमतों में और तेजी संभव है। दूसरी नजर भारत सरकार के निर्यात रुख पर रहेगी, जिसमें घरेलू उपलब्धता और उपभोक्ता हित का संतुलन भी देखा जाएगा। तीसरी बात, त्योहारी सीजन की घरेलू मांग, जो अगस्त से नवंबर के बीच चीनी की खपत बढ़ाती है।
आपके सवाल
क्या ब्राजील की बारिश से यूपी में गन्ने का भाव बढ़ेगा? सीधे तौर पर नहीं। यूपी में गन्ने का भाव एफआरपी और एसएपी से तय होता है। लेकिन वैश्विक तेजी से मिलों की कमाई बढ़ती है, जिससे समय पर भुगतान की संभावना बेहतर होती है और एसएपी बढ़ाने की मांग को बल मिलता है।
2026-27 सीजन के लिए गन्ने का एफआरपी कितना तय हुआ है? केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर)। रिकवरी कम होने पर भी न्यूनतम 338.30 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा।
क्या भारत से चीनी का निर्यात बढ़ेगा? वैश्विक कीमतें 19 महीने की ऊंचाई पर हैं, पर निर्यात की अनुमति और मात्रा सरकार की नीति पर निर्भर करेगी।
ब्राजील में उत्पादन कितना घटने का अनुमान है? सीजन की शुरुआत में 40 मिलियन टन का अनुमान था, जो अब 38 मिलियन टन से नीचे जाने की आशंका है।
गन्ना किसानों को इस समय क्या करना चाहिए? पेराई सीजन शुरू हो चुका है। किसान अपनी पर्ची और कैलेंडर ई-गन्ना ऐप पर जांचते रहें, क्रय केंद्र पर तौल की पर्ची संभालकर रखें और बकाया भुगतान पर नजर रखें। भाव को लेकर अफवाहों पर नहीं, सरकारी घोषणा पर भरोसा करें।
स्रोत: चिनीमंडी, उक्रएग्रोकंसल्ट, रॉयटर्स (एग्रीइनसाइट के हवाले से), डेक्कन हेराल्ड, बिजनेस स्टैंडर्ड
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?



