दो महीने में 40% बढ़े चीनी के थोक दाम: पैकेज्ड फूड कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन 4 साल के निचले स्तर पर

दो महीने में 40% बढ़े चीनी के थोक दाम: पैकेज्ड फूड कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन 4 साल के निचले स्तर पर
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Aamir Raza - August 28, 2026
मुंबई/नई दिल्ली : त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले देश के थोक और खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतों में आई 36 से 40 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी ने एफएमसीजी (FMCG) और पैकेज्ड फूड निर्माण कंपनियों के वित्तीय गणित को बिगाड़ कर रख दिया है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय रेटिंग एजेंसी ICRA और ‘मिंट’ के नवीनतम कॉरपोरेट विश्लेषण के अनुसार, चीनी से जुड़े उत्पादों (बिस्कुट, कन्फेक्शनरी, सॉफ्ट ड्रिंक्स और डेरी) में बड़ा कारोबार रखने वाली 7 प्रमुख निफ्टी एफएमसीजी कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन घटकर चार वर्षों के निचले स्तर 22.2 प्रतिशत पर आ गया है। यह स्तर 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के चरम संकट के समय दर्ज मार्जिन से भी कम है।
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी से FMCG कंपनियां क्यों चिंतित हैं?
जून 2026 की तिमाही के वित्तीय परिणामों के मुताबिक, पैकेज्ड फूड कंपनियों के कच्चे माल की कुल लागत (Raw Material Cost) में 20% से अधिक का उछाल आया है। ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, नेस्ले इंडिया, वरुण बेवरेजेज, आईटीसी, डाबर और अमूल जैसी दिग्गज कंपनियां पहले से ही पाम ऑयल, कोको और प्लास्टिक पैकेजिंग लागत में 30-40% की बढ़ोतरी का सामना कर रही थीं। ऐसे में चीनी के थोक दामों का ₹4,100 प्रति क्विंटल के पार पहुंचना कंपनियों के EBITDA Margin के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है।
चीनी बाजार में उछाल के 4 मुख्य कारण
- चीनी उत्पादन में 11% की गिरावट: वर्ष 2025-26 में भारत का कुल चीनी उत्पादन घटकर 3.06 करोड़ टन (306 LMT) रहने का अनुमान है, जो शुरुआती अनुमान 3.43 करोड़ टन से 37 लाख टन कम है।
- Buffer Stock में भारी कमी: ICRA के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक देश का चीनी बफर स्टॉक घटकर 43 लाख टन रह जाएगा, जो पिछले साल के 53 लाख टन की तुलना में 19% कम है।
- Red Rot रोग व अत्यधिक बारिश: उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र और महाराष्ट्र के कोल्हापुर-सांगली में गन्ने की फसल लाल सड़न (Red Rot) बीमारी से प्रभावित हुई है।
- एथेनॉल निर्माण में गन्ने का इस्तेमाल: यद्यपि मक्का का इस्तेमाल बढ़ा है, फिर भी गन्ने का एक हिस्सा एथेनॉल निर्माण में इस्तेमाल हुआ है।
FMCG कंपनियों के वित्तीय आंकड़ों का तुलनात्मक चार्ट
| कंपनी / सूचकांक | जून तिमाही मार्जिन (Current) | 4 साल का औसत मार्जिन | लागत वृद्धि असर |
|---|---|---|---|
| Nifty FMCG Index | 22.2% (4 साल का निचला स्तर) | 25.8% | -360 Bps दबाव |
| बिस्कुट व कन्फेक्शनरी | 18.5% | 22.0% | +20% कच्चा माल |
| सॉफ्ट ड्रिंक्स (Beverages) | 21.0% | 24.5% | +18% चीनी लागत |
| थोक चीनी भाव (Sugar) | ₹4,100 / क्विंटल | ₹3,200 / क्विंटल | +40% का उछाल |
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर? क्या उत्पाद महंगे होंगे?
सैमको सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर तुरंत नहीं डाल सकतीं, क्योंकि बाजार में पहले से ही मंदी का असर है। कंपनियां लागत कम करने के लिए 3 रणनीतियों पर काम कर रही हैं:
- Shrinkflation (ग्रामेज घटाना): ₹5 और ₹10 वाले पैकेट का वजन 5 से 10 ग्राम कम करना।
- Selective Price Hike: बड़े पैकेटों की MRP में 5 से 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी।
- Ad Spend Control: विज्ञापन और प्रमोशन खर्च में कटौती।
गन्ना किसानों और चीनी मिलों के लिए अच्छी खबर
दूसरी ओर, चीनी के थोक भाव मजबूत रहने से देश की चीनी मिलों का मुनाफा (Profitability) बढ़ा है। इससे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की चीनी मिलें गन्ने का ganna bhugtan status 14 दिनों के भीतर चुकाने की स्थिति में आ गई हैं, और आगामी सत्र 2026-27 में गन्ने का SAP भाव बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है।
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