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नेपाल की बाढ़ से यूपी के तराई गन्ना बेल्ट में हाहाकार — गंडक-शारदा के उफान से 40,000 हेक्टेयर फसल डूबी, रेड रॉट का हाई अलर्ट!

Aamir Raza Aamir Raza • Aug 29, 2026 • 4 min read
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नेपाल की बाढ़ से यूपी के तराई गन्ना बेल्ट में हाहाकार — गंडक-शारदा के उफान से 40,000 हेक्टेयर फसल डूबी, रेड रॉट का हाई अलर्ट!
अंतिम अपडेट: August 29, 2026 10:30 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

नेपाल की बाढ़ से यूपी के तराई गन्ना बेल्ट में हाहाकार — गंडक-शारदा के उफान से 40,000 हेक्टेयर फसल डूबी, रेड रॉट का हाई अलर्ट!

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Aamir Raza - August 29, 2026

लखनऊ/लखीमपुर खीरी/महराजगंज : नेपाल के पहाड़ी इलाकों में पिछले 48 घंटों से जारी भीषण बारिश और बादल फटने के बाद उत्तर प्रदेश का तराई गन्ना क्षेत्र गंभीर बाढ़ संकट की चपेट में आ गया है। गंडक, शारदा, घाघरा और राप्ती नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण महराजगंज, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, बहराइच और पीलीभीत के निचले मैदानी इलाकों में 40,000 हेक्टेयर से अधिक गन्ने की खड़ी फसल में 3 से 5 फीट तक बाढ़ का पानी भर गया है।

राज्य के राहत आयुक्त कार्यालय और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल सीमा से सटे बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर में और बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इस बीच, उत्तर प्रदेश कृषि एवं गन्ना विकास विभाग ने गन्ने की फसल को फंगल इन्फेक्शन और ‘लाल सड़न’ (Red Rot) की महामारी से बचाने के लिए फील्ड अफसरों को 24 घंटे निगरानी के सख्त निर्देश जारी किए हैं।


4 जिलों में गन्ने के रकबे पर सबसे ज्यादा असर

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में शुरू होने वाले पेराई सत्र से ठीक डेढ़ महीना पहले आई इस बाढ़ ने काश्तकारों की नींद उड़ा दी है:

  1. लखीमपुर खीरी व गोला गोकर्णनाथ बेल्ट: शारदा नदी का कटान पलिया, निघासन और धौरहरा तहसीलों के गन्ना बेल्ट में तबाही मचा रहा है। लखीमपुर खीरी चीनी मिल क्षेत्र के सैकड़ों गांवों का संपर्क टूट चुका है।
  2. महराजगंज और कुशीनगर: रोहिन और गंडक नदी के बैकवाटर से खड्डा, तमकुहीराज और सेवरही क्षेत्रों के खेतों में भारी जलभराव हो गया है। कुशीनगर चीनी मिल क्षेत्र के अगेती किस्म वाले गन्ने पूरी तरह पानी में डूब गए हैं।
  3. बहराइच व सीतापुर: घाघरा नदी के उफान से महसी और मिहींपुरवा ब्लॉक के हजारों एकड़ गन्ने के पौधे तने तक पानी में समा गए हैं।

जलभराव से सबसे बड़ा खतरा: ‘रेड रॉट’ (गन्ने का कैंसर)

कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि गन्ने के खेत में 72 घंटे से अधिक समय तक स्थिर पानी रहने और अगस्त की उमस भरी गर्मी मिलने पर गन्ने की जड़ों में श्वसन प्रक्रिया रुक जाती है। इससे गन्ने में लाल सड़न (Red Rot) रोग तेजी से पनपता है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • यूपी में सबसे बड़े रकबे पर बोई गई किस्म Co 0238 पर फफूंद का हमला सबसे जल्दी होता है।
  • अत्यधिक पानी से पौधे की गांठों से अवांछित जड़ें निकलने लगती हैं, जिससे तने में सुक्रोज (शर्करा) की मात्रा 15% से 25% तक गिर जाती है।
  • बाढ़ का बहाव थमते ही गन्ने के गिरने (Lodging) की संभावना बढ़ जाती है, जिससे चूहों और कीटों का प्रकोप हो जाता है।

जलभराव के बाद तुरंत किए जाने वाले सुरक्षात्मक उपायों के लिए पढ़ें: रेड रॉट से गन्ने को कैसे बचाएं — 7 अचूक उपाय और अगस्त-सितंबर में गन्ने की फसल के 5 जरूरी काम।


कृषि विभाग की इमरजेंसी एडवाइजरी: किसान तुरंत करें ये 4 काम

उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त कार्यालय ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के किसानों के लिए ग्राउंड एक्शन प्लान जारी किया है:

क्रमजरूरी कदम (Action Point)वैज्ञानिक तरीका व दवा
1खेत से पानी की त्वरित निकासीमेड़ काटकर या पंप सेट लगाकर खेतों में रुके गंदे पानी को तुरंत बाहर निकालें।
2फफूंदनाशक का छिड़कावपानी उतरते ही कार्बेन्डाजिम 50% WP (2 ग्राम प्रति लीटर) या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का तनों पर स्प्रे करें।
3जड़ों के पास मिट्टी चढ़ानातेज हवा से गन्ने को गिरने से बचाने के लिए 4-5 गन्नों के झुंड को आपस में बांधें (Propping)।
4यूरिया का तुरंत इस्तेमाल न करेंजलभराव के तुरंत बाद यूरिया डालने से बचें; पहले पोटाश और जिंक सल्फेट का हल्का छिड़काव करें।

72 घंटे में फसल बीमा का दावा (Claim) करना जरूरी

बाढ़ से 33% से अधिक फसल नष्ट होने की स्थिति में किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजे के हकदार हैं। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने निर्देश दिया है कि किसान टोल फ्री नंबर अथवा ऐप के माध्यम से पानी भरने के 72 घंटे के भीतर इंटिमेशन (सूचना) अवश्य दर्ज कराएं।


निष्कर्ष (Newsroom Verdict)

पेराई सत्र 2026-27 के मुहाने पर आई यह प्राकृतिक आपदा तराई के गन्ना उत्पादकों के लिए दोहरा झटका है। एक ओर किसान जहां ₹600 प्रति क्विंटल के लाभकारी समर्थन मूल्य की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जलभराव से उत्पादन और चीनी परता घटने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। राज्य सरकार को प्रभावित जिलों में तत्काल विशेष राजस्व टीमें भेजकर फसल नुकसान का सर्वे कराना चाहिए और किसानों को प्रति हेक्टेयर उचित मुआवजा सुनिश्चित करना चाहिए।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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