बुलंदशहर में एक दिन दो प्रदर्शन: टिकैत यूनियन ने तहसील घेरकर ₹600 मांगा, अराजनैतिक ने कलक्ट्रेट पर ₹500 की गूंज लगाई

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में गन्ने के भाव को लेकर किसान आंदोलन अब हर जिले में दस्तक दे रहा है। ताजा घटनाक्रम बुलंदशहर से है, जहां एक ही जिले में दो किसान संगठनों ने दो अलग मंचों पर प्रदर्शन किया — केंद्रीय मांग एक ही: गन्ने का भाव बढ़ाओ, अंतर सिर्फ आंकड़े का। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने स्याना तहसील का घेराव कर ₹600 प्रति क्विंटल मांगा, तो भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने कलक्ट्रेट के बाहर ₹500 प्रति क्विंटल की मांग को लेकर धरना दिया।
दोनों प्रदर्शन 16 अक्टूबर को हुए। पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत बस चंद दिन दूर है और राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है — इसी वजह से गन्ना किसान की हर मांग अब एसएपी पर आकर टिकती है।
स्याना में टिकैत यूनियन का तहसील घेराव: ₹600 भाव की मांग
बुलंदशहर की स्याना तहसील में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ता सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे और तहसील परिसर का घेराव कर धरने पर बैठ गए। किसानों का आरोप था कि तहसील में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है और लेखपाल किसानों के काम नहीं कर रहे हैं। (अमर उजाला, 16 अक्टूबर 2026)
धरने पर बैठे किसानों की सबसे बड़ी मांग गन्ने की फसल का मूल्य बढ़ाना रही — संगठन ने प्रति क्विंटल ₹600 की दर तय करने की मांग की है। जिलाध्यक्ष अरब सिंह ने कहा कि गन्ने की खेती में लागत बढ़ने के कारण गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल होना चाहिए। उन्होंने आलू के करीब ₹10 लाख के बकाये का भुगतान जल्द कराने की मांग भी उठाई। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026)
स्याना के ज्ञापन में गन्ने के अलावा और भी मुद्दे रहे — आवारा गोवंश से फसलों के नुकसान का स्थायी समाधान, बिजली विभाग पर किसानों को परेशान करने का आरोप, लेखपालों द्वारा काम न करने की शिकायतें और तहसील बाजार की व्यवस्था सुधारने की मांग। एक अन्य मांग गंगा एक्सप्रेस-वे से जुड़ी थी — जेवर एयरपोर्ट लिंक एक्सप्रेस-वे में सठला गांव पर कट की मांग।
प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ता मौजूद रहे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर गन्ना भुगतान सहित सभी लंबित मुद्दों के निस्तारण की मांग की गई। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026)
कलक्ट्रेट पर अराजनैतिक का प्रदर्शन: ₹500 और छह सूत्री मांगें
उधर जिला मुख्यालय बुलंदशहर में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले किसान राजेबाबू पार्क में एकत्रित हुए और सभा के बाद जुलूस निकालकर कलक्ट्रेट पहुंचे। कलक्ट्रेट का गेट बंद मिलने पर किसान वहीं धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद अधिकारियों को किसानों के बीच आकर ज्ञापन लेना पड़ा। प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मांगेराम त्यागी और जिलाध्यक्ष शैलेंद्र आर्य ने किया। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026)
ज्ञापन में छह सूत्री मांगें रखी गईं, जिनमें सबसे प्रमुख है — आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) बढ़ाकर ₹500 प्रति क्विंटल किया जाए। किसानों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवारों की आजीविका गन्ने की खेती पर निर्भर है, जबकि डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है। किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर दिलाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026)
गन्ने के अलावा ज्ञापन में आलू किसानों की परेशानी भी उठी — उद्यान विभाग से मिल रहे ₹3,600 प्रति क्विंटल के आलू बीज का मूल्य घटाकर अधिकतम ₹1,500 प्रति क्विंटल करने और कोल्ड स्टोरेज किराया सहायता योजना में शासनादेश से पहले आलू निकाल चुके किसानों को भी शामिल करने की मांग रखी गई। सैकड़ों किसान इस प्रदर्शन में शामिल रहे। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026)
₹500 या ₹600 — मांग का गणित क्या है?
मांगों में आंकड़े का अंतर है, तर्क एक जैसा है: खेती की लागत। पेराई सत्र 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती किस्म) घोषित था। यानी ₹500 की मांग का मतलब है मौजूदा एसएपी से ₹100 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी, और ₹600 की मांग का मतलब है ₹200 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी। पेराई सत्र 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — यही वजह है कि किसान संगठन प्रदर्शन करके सरकार पर दबाव बना रहे हैं। पेराई सत्र अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शुरू होने वाला है और एसएपी की घोषणा आमतौर पर पेराई शुरू होने से पहले होती है। किसानों का तर्क यह भी है कि खुदरा बाजार में चीनी महंगी बिक रही है, तो गन्ना उगाने वाले को भी लागत और मेहनत के हिसाब से लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए।
पश्चिमी यूपी में आंदोलन की लहर तेज
बुलंदशहर की ये दोनों घटनाएं अकेली नहीं हैं। इसी सप्ताह मेरठ में भी किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट का रुख किया था और गन्ने का रेट ₹500 प्रति क्विंटल करने, बारिश में बर्बाद फसलों का मुआवजा देने और एमएसपी की गारंटी की मांग रखी थी। (लाइव हिंदुस्तान, 16 अक्टूबर 2026) बिजनौर में गन्ना भाव को लेकर महापंचायत भी हो चुकी है — यानी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लगभग हर गन्ना जिले में अब भाव की मांग सड़कों पर उतर आई है।
पृष्ठभूमि में एक और कानूनी घटनाक्रम भी है। सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर के अपने आदेश में गन्ना बकाये पर 15 प्रतिशत ब्याज की अनिवार्यता को बरकरार रखा है और कहा है कि 14 दिन में भुगतान और 15 प्रतिशत ब्याज किसानों के कर्ज के जाल से बचाने के लिए अनिवार्य सुरक्षा उपाय हैं। (टाइम्स ऑफ इंडिया/चिनीमंडी, अक्टूबर 2026)
किसान के लिए आगे क्या
पेराई सत्र 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश की 122 चीनी मिलों में पेराई अक्टूबर के आखिर से शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे में अगले कुछ दिन गन्ना किसान के लिए बेहद अहम हैं:
एसएपी की घोषणा पर नजर रखें — एसएपी की घोषणा होते ही caneup.xyz पर उसकी पूरी जानकारी प्रकाशित की जाएगी।
पर्ची-कैलेंडर और बकाया तैयार रखें — पेराई शुरू होते ही गन्ना आपूर्ति पर्ची और कैलेंडर के हिसाब से होगी, इसलिए ई-गन्ना ऐप पर अपना सर्वे डेटा और कैलेंडर पहले से देख लें। अगर किसी मिल पर पुराना बकाया है, तो उसका रिकॉर्ड और पर्ची संभालकर रखें — सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बकाये पर ब्याज का दावा और मजबूत हुआ है।
आपके सवाल
बुलंदशहर में किसानों ने गन्ने का कितना भाव मांगा है? स्याना तहसील में भाकियू (टिकैत) ने ₹600 प्रति क्विंटल और जिला मुख्यालय पर भाकियू (अराजनैतिक) ने ₹500 प्रति क्विंटल की मांग रखी है। दोनों प्रदर्शन 16 अक्टूबर को हुए थे। (अमर उजाला, 16-17 अक्टूबर 2026)
पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का एसएपी घोषित हुआ है क्या? नहीं, 17 अक्टूबर तक पेराई सत्र 2026-27 के एसएपी की घोषणा नहीं हुई है। पेराई सत्र 2025-26 का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती किस्म) था।
स्याना तहसील में किसानों की और क्या मांगें थीं? आवारा गोवंश से फसलों के नुकसान का स्थायी समाधान, बिजली विभाग के कथित उत्पीड़न पर रोक, लेखपालों द्वारा काम न करने की शिकायतों का निस्तारण, आलू के ₹10 लाख के बकाये का भुगतान और गंगा एक्सप्रेस-वे के लिंक में सठला गांव पर कट की मांग। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026)
गन्ना बकाये पर ब्याज का क्या नियम है? सुप्रीम कोर्ट के 6 अक्टूबर 2026 के आदेश के मुताबिक मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान करना अनिवार्य है, देरी पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। (टाइम्स ऑफ इंडिया/चिनीमंडी)
स्रोत: अमर उजाला (बुलंदशहर संस्करण, 16-17 अक्टूबर 2026 की तीन रिपोर्टें), लाइव हिंदुस्तान (मेरठ, 16 अक्टूबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया/चिनीमंडी (सुप्रीम कोर्ट आदेश, अक्टूबर 2026)
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