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चीनी मिलों को ₹1,500 करोड़ की बफर स्टॉक सब्सिडी स्वीकृत — किसानों के त्वरित भुगतान में मिलेगी मदद

Randhir Patil Randhir Patil Sep 3, 2026 3 min read
चीनी मिलों को ₹1,500 करोड़ की बफर स्टॉक सब्सिडी स्वीकृत — किसानों के त्वरित भुगतान में मिलेगी मदद
अंतिम अपडेट: September 3, 2026 8:15 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज 3 सितंबर को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में देश के चीनी उद्योग की वित्तीय तरलता (Liquidity) को मजबूत करने और आगामी पेराई सत्र 2026-27 से पहले गन्ना किसानों के बकाए का शत-प्रतिशत निपटान सुनिश्चित करने के लिए ₹1,500 करोड़ की बफर स्टॉक सब्सिडी जारी करने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। यह राशि 40 लाख मीट्रिक टन चीनी के बफर स्टॉक के रखरखाव, बीमा और बैंक ब्याज वहन लागत (Carrying Cost) की प्रतिपूर्ति के रूप में मिलों को सीधे आवंटित की जा रही है।

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि सरकार का यह कदम चीनी मिलों को संकट से उबारने और उनके पास किसानों को समय पर भुगतान करने के लिए नकदी प्रवाह बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सीधे किसानों के एस्क्रो खाते में जाएगी सब्सिडी राशि

मंत्रिमंडल के फैसले की सबसे बड़ी शर्त यह है कि जारी की जा रही ₹1,500 करोड़ की सब्सिडी राशि चीनी मिल प्रबंधकों के सामान्य चालू खातों में नहीं जाएगी। यह पूरी धनराशि सीधे उन विशेष गन्ना मूल्य एस्क्रो खातों (Escrow Accounts) में क्रेडिट की जाएगी, जिनका संचालन जिला गन्ना अधिकारी और मिल के अधिकृत प्रतिनिधि के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है।

खाद्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन मिलों पर किसानों का पुराना गन्ना भुगतान बकाया है, बैंक इस सब्सिडी राशि को सीधे संबंधित किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में ट्रांसफर करेंगे। इससे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार के 50 लाख से अधिक गन्ना किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा।

त्योहारी सीजन में आपूर्ति और मूल्य स्थिरता पर जोर

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बफर स्टॉक सब्सिडी जारी होने से चीनी मिलों पर अचानक कम दाम में चीनी बेचने का दबाव नहीं रहेगा और वे घरेलू बाजार में सुचारू आपूर्ति बनाए रखेंगी। इससे एक ओर जहां त्योहारी सीजन (गणेशोत्सव, दशहरा, दिवाली) के दौरान खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें ₹40 से ₹42 प्रति किलोग्राम के उचित स्तर पर स्थिर रहेंगी, वहीं दूसरी ओर मिलों की बैलेंस शीट मजबूत होगी।

भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि त्योहारी सीजन से ठीक पहले यह तरलता सहायता चीनी मिलों को अपने बॉयलरों की मरम्मत पूरी करने और 15 अक्टूबर से शुरू हो रहे पेराई सत्र में किसानों को 14 दिन के वैधानिक नियम के तहत भुगतान करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।

डिस्टिलरी और एथेनॉल ब्लेंडिंग क्षमता में सुधार

सब्सिडी के इस वित्तीय पैकेज से चीनी मिलों को अपनी कार्यशील पूंजी की किल्लत से राहत मिलेगी। इससे मिलें आगामी सीजन में अतिरिक्त गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे को सीधे एथेनॉल उत्पादन में डाइवर्ट कर सकेंगी, जिससे पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) के राष्ट्रीय लक्ष्य को समय से पहले बनाए रखने में मदद मिलेगी।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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