दूसरे साल भी भारत चीनी का आयात करेगा! महाराष्ट्र-कर्नाटक में सूखा, UP के गन्ना किसानों पर क्या होगा असर?

🚨 BREAKING: दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश भारत लगातार दूसरे साल विदेशों से चीनी मंगाने की तैयारी में है। The Economic Times (25 सितंबर 2026) की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र और कर्नाटक में गंभीर जल संकट से अक्टूबर में पेराई होने वाले गन्ने की चीनी रिकवरी घटने का खतरा है। ChiniMandi ने भी इस खबर की पुष्टि की है। करीब एक दशक तक सरप्लस रहने वाला भारत अब दो साल से आयातक बनता दिख रहा है — और इसका असर सीधे उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों पर पड़ेगा।
क्यों आई आयात की नौबत?
महाराष्ट्र और कर्नाटक में लंबे समय से बारिश की कमी है। हालत इतनी गंभीर है कि दोनों राज्य जलाशयों का पानी पहले पीने के लिए सुरक्षित रख रहे हैं, सिंचाई के लिए बाद में मिलेगा। कर्नाटक — देश का तीसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक — ने जलाशयों का पानी पीने के लिए आरक्षित कर दिया है, जबकि सबसे बड़े उत्पादक महाराष्ट्र में भी यही कदम विचाराधीन है।
उद्योग के अधिकारियों के मुताबिक, सिंचाई के पानी की कमी से अक्टूबर में पेराई होने वाले गन्ने की चीनी रिकवरी घट सकती है। यानी उतना ही गन्ना, लेकिन उससे कम चीनी। यह घाटा इतना गहरा हो सकता है कि घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए विदेश से चीनी मंगानी पड़े।
एक दशक में पहली बार: 2025-26 में क्या हुआ था?
2025-26 के सत्र में भी कम उत्पादन के कारण घरेलू चीनी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे, जिसके बाद भारत को लगभग एक दशक बाद चीनी का आयात करना पड़ा था। सरकार ने उसके बाद स्टॉक सीमा लगाई, आयात की अनुमति दी और मिलों को जल्दी पेराई को कहा — इन्हीं उपायों से दामों में कुछ स्थिरता आई थी। लेकिन इस बार भी हालात नहीं सुधरे हैं: अगर रिकवरी और गिरी, तो घरेलू उत्पादन खपत से पीछे रह जाएगा।
सरकार के उपाय: 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री आयात
सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है, ताकि घरेलू आपूर्ति बनी रहे और त्योहारी सीजन में खुदरा दाम नियंत्रण में रहें (NDTV Profit/Bloomberg, 18 सितंबर 2026)।
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि घरेलू दामों में कुछ गिरावट के बावजूद आयात अभी भी फायदेमंद है। सूत्रों के मुताबिक, मिलों ने अनुमत 10 लाख टन में से करीब 8 लाख टन के लिए आवेदन कर दिया है।
India.com की अगस्त 2026 की रिपोर्ट में NFCSF (नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज) के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवरे ने बताया था कि फिलहाल ब्राजील ही आयात का एकमात्र व्यावहारिक स्रोत है। ब्राजील से जहाज आने में 40-45 दिन लगते हैं, इसलिए अक्टूबर के मध्य तक कुछ खेप भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच सकती है।
इसके अलावा सरकार ने बल्क उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दी, लेकिन तय सीमा से ज्यादा स्टॉक केवल आयातित चीनी से रखा जा सकेगा।
UP के गन्ना किसानों पर क्या असर होगा?
उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन में देश का सबसे बड़ा राज्य है। आयात की खबर से जुड़े तीन असर समझना जरूरी है:
1. भुगतान पर असर: 2025-26 के सत्र में UP की चीनी मिलों ने 94.86% गन्ना मूल्य का भुगतान किया था। उद्योग के जानकारों का मानना है कि आयात से आपूर्ति बनी रहती है और मिलों की नकदी सुधरती है। Rediff (अगस्त 2026) में एक उद्योग अधिकारी ने कहा था — आयात से मिलों को गन्ना बकाया तेजी से चुकाने में मदद मिलेगी। यानी आयात भुगतान के लिए खतरा नहीं, स्थिरता का संकेत है।
2. गन्ने के दाम पर असर: आयात से गन्ने का भाव नहीं गिरेगा। UP में गन्ने का मूल्य SAP से तय होता है — 2025-26 में अगेती प्रजाति के लिए ₹400 और सामान्य प्रजाति के लिए ₹390 प्रति क्विंटल। केंद्र ने 2026-27 के लिए FRP ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है। आयात चीनी के बाजार भाव को प्रभावित करता है, गन्ने के तय मूल्य को नहीं।
3. पेराई सत्र पर असर: सरकार की सलाह पर मिलों को जल्दी पेराई को कहा गया है। महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर से पेराई के फैसले का किसान संगठन विरोध कर रहे हैं (ChiniMandi, 25 सितंबर 2026), जबकि UP में बिजनौर की मिलें अक्टूबर में करीब 10 दिन पहले पेराई की तैयारी में हैं। मकसद एक ही है — त्योहारी सीजन से पहले बाजार में नई चीनी पहुंचे।
विशेषज्ञों की राय
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर का मानना है कि चीनी के दामों में आई गिरावट के बावजूद आयात व्यावहारिक बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति तंग है। NFCSF के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवरे ने कहा था कि घबराने की कोई वजह नहीं है — बंदरगाहों पर खेप पहुंचने की प्रक्रिया चल रही है। उद्योग के एक वर्ग का अनुमान है कि आयात से घरेलू दामों में ₹500 प्रति क्विंटल तक की नरमी आ सकती है, लेकिन इसके बाद भी दाम उत्पादन लागत (₹4,200-4,300 प्रति क्विंटल) से ऊपर रहेंगे — यानी मिलों की नकदी स्थिति पर दबाव नहीं आएगा और किसानों का भुगतान सुचारू रहेगा।
किसान के लिए 3 जरूरी बातें
- SAP/FRP सुरक्षित है: आयात से चीनी के बाजार भाव प्रभावित होते हैं, गन्ने के तय मूल्य (SAP/FRP) पर कोई असर नहीं पड़ता।
- भुगतान समय पर मिलने की उम्मीद: मिलों की नकदी स्थिति सुधरने से बकाया भुगतान तेज होने की संभावना।
- पर्ची-सट्टा समय पर कराएं: पेराई अक्टूबर-नवंबर में शुरू हो सकती है, इसलिए 30 सितंबर की सट्टा-संबंधी समय-सीमाएं न चूकें।
आगे क्या होगा?
अगले 2-3 सप्ताह अहम हैं। ब्राजील से चीनी की पहली खेप अक्टूबर के मध्य तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है। उधर महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर से पेराई के फैसले का किसान संगठन विरोध कर रहे हैं — 8 अक्टूबर को पुणे में ‘आक्रोश मोर्चा’ की चेतावनी दी गई है। UP में भी मिलों की तैयारी अंतिम चरण में है।
एक बात साफ है — जल संकट अब चीनी उद्योग की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। महाराष्ट्र-कर्नाटक के खेतों में पानी की कमी का असर UP के किसानों के भुगतान, दाम और पेराई पर भी पड़ेगा। स्थिति पर हमारी नजर बनी रहेगी; हर अहम अपडेट caneup.xyz पर सबसे पहले मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या भारत पहले भी चीनी का आयात कर चुका है? हां। 2025-26 के सत्र में कम उत्पादन से घरेलू दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे थे, जिसके बाद भारत ने लगभग एक दशक बाद चीनी का आयात किया था।
चीनी आयात से UP के गन्ना किसानों को नुकसान होगा? सीधे तौर पर नहीं। UP में गन्ने का भाव SAP (₹400/₹390 प्रति क्विंटल, 2025-26) और FRP (₹365 प्रति क्विंटल, 2026-27) से तय होता है, न कि चीनी के बाजार भाव से। उद्योग का मानना है कि आयात से मिलों की तरलता सुधरती है, जिससे भुगतान तेज होता है।
सरकार ने आयात के लिए कितनी अनुमति दी है? सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। मिलों ने अब तक करीब 8 लाख टन के लिए आवेदन किया है (NDTV Profit, सितंबर 2026)।
चीनी कहां से आयात होगी? उद्योग के मुताबिक फिलहाल ब्राजील ही एकमात्र व्यावहारिक स्रोत है। ब्राजील से जहाज आने में 40-45 दिन लगते हैं (NFCSF, अगस्त 2026)।
महाराष्ट्र-कर्नाटक में पानी की कमी से UP के किसानों को क्या लेना-देना? इन दो राज्यों में रिकवरी घटने से राष्ट्रीय स्तर पर चीनी का उत्पादन घटेगा, जिससे कीमतों और आपूर्ति पर असर पड़ेगा। सरकार आयात और जल्दी पेराई जैसे कदम उठा रही है — और इनका असर UP के बाजार और भुगतान पर भी पड़ेगा।
स्रोत: The Economic Times (25 सितंबर 2026), ChiniMandi (25 सितंबर 2026), NDTV Profit/Bloomberg (18 सितंबर 2026), India.com (अगस्त 2026), Rediff (अगस्त 2026)
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