छाता चीनी मिल पर किसानों का धरना तेज: हरियाणा से भी पहुंचे किसान, एथेनॉल प्लांट नहीं, चीनी मिल चाहिए

🚨 मथुरा। 18 साल से बंद पड़ी छाता चीनी मिल को दोबारा शुरू कराने की मांग पर किसानों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। 13 अगस्त से मिल के गेट पर चल रहा धरना अब राज्य की सीमा लांघ चुका है — हरियाणा के पलवल-होडल और हाथरस के किसान भी धरनास्थल पर पहुंचने लगे हैं। सरकार ने 15 सितंबर को कैबिनेट में एथेनॉल प्लांट को मंजूरी जरूर दे दी, लेकिन किसानों की एक ही मांग है: “हमें एथेनॉल प्लांट नहीं, चीनी मिल चाहिए।”
🔴 लाइव अपडेट — 29 सितंबर 2026
धरना 47वें दिन भी जारी, अलवाई ग्रामीणों ने शुरू की भंडारे की सेवा: 13 अगस्त से चल रहा धरना 29 सितंबर को भी जारी रहा। सोमवार को गांव अलवाई से बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर धरनास्थल पहुंचे और घोषणा की कि मंगलवार (29 सितंबर) से आंदोलनकारियों के लिए सामूहिक भंडारे की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। ततारपुर, बढ़ा और आजनौख के ग्रामीण भी सोमवार को धरने में समर्थन देने पहुंचे। (स्रोत: दैनिक जागरण, 28 सितंबर 2026; Live Hindustan, 28 सितंबर 2026)
“यह 36 बिरादरियों के हक की लड़ाई”: धरने पर पहुंचे वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक गांव की नहीं, पूरे किसान समाज के हक की है। आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। किसानों ने दोहराया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। (स्रोत: Live Hindustan, 28 सितंबर 2026; दैनिक जागरण, 28 सितंबर 2026)
21 सितंबर रात पुलिस ने हटाया था, अगले दिन लौट आए किसान: धरना दे रहे लोगों का कहना है कि 21 सितंबर की रात पुलिस ने जबरन धरना हटवाया था, लेकिन अगले ही दिन आसपास के दर्जनों गांवों से किसान और महिलाएं दोबारा मिल परिसर में जुट गईं। किसानों की मांग साफ है — एथेनॉल प्लांट बाद में, पहले चीनी मिल चाहिए। (स्रोत: दैनिक जागरण, 26 सितंबर 2026; न्यूज ट्रैक, 23 सितंबर 2026)
18 साल से बंद पड़ी है छाता चीनी मिल
छाता में चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1978 में हुई थी। लेकिन वर्ष 2008 में बसपा सरकार ने घाटा होने का हवाला देकर मिल में पेराई सत्र बंद करा दिया। उसके बाद से यह मिल कभी शुरू नहीं हो सकी और समय के साथ मशीनें कंडम हो गईं। पिछले 18 वर्षों में हर चुनाव में छाता चीनी मिल मुद्दा बनती रही, लेकिन असलियत यही रही कि मिल कभी शुरू नहीं हो पाई।
2022 में जब भाजपा सरकार दोबारा सत्ता में आई और इसी क्षेत्र के विधायक चौधरी लक्ष्मी नारायण को गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री बनाया गया, तो किसानों की उम्मीदें एक बार फिर जाग गईं। वर्ष 2023 में चीनी मिल शुरू कराने के लिए सरकार ने 550 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी। अब तक तीन बजट में 235 करोड़ रुपये का प्रविधान भी हुआ। लेकिन राज्य चीनी निगम लखनऊ ने टेंडर प्रक्रिया निकाली तो दरें अधिक होने पर किसी कंपनी ने सहभागिता नहीं की। अक्टूबर 2024 में शासन के निर्देश पर नई डीपीआर अलग-अलग बनाई गई, जिसकी लागत करीब 700 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई। एक वर्ष से इस दिशा में कुछ नहीं हो सका था।
13 अगस्त से धरना, गांव-गांव से जुड़ रहे लोग
चीनी मिल की मांग को लेकर 13 अगस्त को मिल के गेट पर धरना शुरू हुआ था। धीरे-धीरे भीड़ बढ़ती गई और अब धरने को 46 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। आंदोलन की अगुवाई भूतपूर्व सैनिक परिषद के बैनर तले पूर्व सैनिक सूबेदार ललित कर्मयोगी कर रहे हैं।
धरने के दौरान सूबेदार ललित कर्मयोगी ने प्रदर्शनकारियों से हाथ आगे बढ़वाकर संकल्प दिलाया कि जब तक चीनी मिल को दोबारा शुरू नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि किसान अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे — प्रशासन या सरकार की ओर से मुकदमा दर्ज करने, लाठीचार्ज करने अथवा अन्य कार्रवाई की स्थिति में भी आंदोलन जारी रहेगा। उनके इस आह्वान के बाद धरनास्थल पर मौजूद किसानों और महिलाओं ने मिल चालू होने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
सरकार ने एथेनॉल प्लांट को दी मंजूरी, किसान नाखुश
15 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में छाता चीनी मिल परिसर में एथेनॉल प्लांट की स्थापना को मंजूरी मिल गई। गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कहा कि चीनी मिल तीन स्तर पर बनेगी। उनके अनुसार, यह प्रदेश का पहला प्लांट होगा जिसमें एथेनॉल का उत्पादन होगा, चीनी का उत्पादन होगा और बायोमास से बिजली का भी उत्पादन होगा। पहले चरण में एथेनॉल प्लांट बनेगा, इसके बाद गन्ने की उपलब्धता होने पर चीनी मिल चालू की जाएगी। डुअल मोड आधारित इस प्लांट में मक्का, धान और गन्ना — तीनों से एथेनॉल बनाया जा सकेगा। स्थापना होने के बाद उत्पादन शुरू होने में करीब दो वर्ष लगेंगे।
लेकिन किसानों को यह फैसला मंजूर नहीं है। धरने में बैठे छाता के वीरेंद्र चौधरी का कहना है कि यहां सभी को चीनी मिल चाहिए — एथेनॉल प्लांट की बात कहकर हमें बरगलाया जा रहा है। शेरगढ़ के वीरकुमार शर्मा कहते हैं कि वर्षों से उनकी मांग चीनी मिल की है, लेकिन गन्ना मंत्री चीनी मिल बाद में शुरू करने की बात कह रहे हैं, जो उन्हें मंजूर नहीं। किसानों का तर्क है कि चीनी मिल के संचालन से क्षेत्र के गन्ना किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
हरियाणा के किसान भी पहुंचे, ग्रामीण करेंगे भंडारे की सेवा
धरने की आंच अब हरियाणा के पलवल-होडल और हाथरस तक पहुंच गई है। यहां के किसान भी धरने में समर्थन देने पहुंच रहे हैं। आंदोलन को गांव-गांव का समर्थन मिल रहा है। छाता क्षेत्र के गांव अलवाई के ग्रामीण सोमवार को धरनास्थल पर पहुंचे और घोषणा की कि मंगलवार से धरनास्थल पर आंदोलनकारियों के लिए ग्रामीण भंडारा की सेवा करेंगे। बढ़ती भीड़ के कारण क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल भी बढ़ गई है।
2027 चुनाव में भी गूंजेगी मांग
किसानों ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक दलों के सामने अपनी मांग स्पष्ट कर दी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि पिछले 17-18 वर्षों का हिसाब और चीनी मिल को चालू कराने की ठोस पहल किए बिना राजनीतिक दलों को किसानों के समर्थन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह साफ संदेश है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में भी चर्चा के केंद्र में रहेगा।
गन्ने की खेती की स्थिति भी चुनौती
यह भी सच है कि गन्ने की खेती की मौजूदा स्थिति चीनी मिल के अनुकूल नहीं है। जिले में वर्तमान में केवल 428 हेक्टेअर में गन्ने की खेती हो रही है, जबकि पूरे साल मिल के संचालन के लिए चार हजार हेक्टेअर से ज्यादा गन्ने की खेती की जरूरत होगी। अगर चीनी मिल शुरू होती है, तो क्षेत्र में गन्ने की खेती को भी बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
क्या है किसानों के लिए सीख?
किसानों के लिए इस आंदोलन का सबसे बड़ा संदेश यही है कि संगठित होकर अपनी मांग रखना कितना जरूरी है। चाहे एथेनॉल प्लांट हो या चीनी मिल — क्षेत्र में गन्ने की खेती बढ़ाने पर सरकार का ध्यान जाएगा तो SAP और गन्ना भुगतान जैसे मुद्दों पर भी किसानों की आवाज मजबूत होगी। धरने के अगले कदम की जानकारी पर हमारी नजर बनी रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
छाता चीनी मिल कब से बंद है?
छाता चीनी मिल वर्ष 2008 से बंद है। बसपा सरकार ने घाटा होने का हवाला देकर मिल में पेराई सत्र बंद करा दिया था। तब से मिल करीब 18 वर्षों से बंद पड़ी है।
छाता चीनी मिल को लेकर किसानों का धरना कब से चल रहा है?
13 अगस्त को मिल के गेट पर धरना शुरू हुआ था। आंदोलन की अगुवाई भूतपूर्व सैनिक परिषद के बैनर तले पूर्व सैनिक सूबेदार ललित कर्मयोगी कर रहे हैं।
सरकार ने छाता चीनी मिल को लेकर क्या फैसला लिया है?
15 सितंबर को कैबिनेट ने छाता चीनी मिल परिसर में पहले चरण में एथेनॉल प्लांट की स्थापना को मंजूरी दी है। गन्ना मंत्री के अनुसार, यह प्रदेश का पहला तीन-स्तरीय प्लांट होगा जिसमें एथेनॉल, चीनी और बायोमास बिजली का उत्पादन होगा।
किसान एथेनॉल प्लांट क्यों नहीं चाहते?
किसानों का कहना है कि क्षेत्र में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के बजाय बंद पड़ी मूल चीनी मिल को ही दोबारा संचालित किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि चीनी मिल से क्षेत्र के गन्ना किसानों को सीधा लाभ और स्थानीय रोजगार मिलेगा।
स्रोत: दैनिक जागरण (28 सितंबर 2026), न्यूज ट्रैक (23 सितंबर 2026)
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