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छाता चीनी मिल धरने में बड़ा उलटफेर: मुकदमा कराने वाले गिर्राज वाल्मीकि खुद धरनास्थल पर, रिपोर्ट वापस लेने की घोषणा

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 30, 2026 • 6 min read
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छाता चीनी मिल धरने में बड़ा उलटफेर: मुकदमा कराने वाले गिर्राज वाल्मीकि खुद धरनास्थल पर, रिपोर्ट वापस लेने की घोषणा
अंतिम अपडेट: September 30, 2026 4:55 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मथुरा जिले की छाता चीनी मिल को दोबारा शुरू कराने के लिए चल रहे किसानों के धरने में मंगलवार को ऐसा मोड़ आया, जिसकी उम्मीद आंदोलनकारियों ने भी नहीं की थी। उन्हीं किसानों पर मुकदमा दर्ज कराने वाले गिर्राज वाल्मीकि खुद धरनास्थल पर पहुंच गए। मंच से उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए माफी मांगी, मुकदमा वापस लेने की घोषणा की और फिर गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण पर खुला निशाना साधा। यह वही धरना है जो मंगलवार को अपने 50वें दिन भी जारी रहा।

मंच से क्या-क्या कहा गिर्राज वाल्मीकि ने

धरनास्थल पर पहुंचे गिर्राज वाल्मीकि ने मंच से साफ कहा कि मैं मुकदमा दर्ज कराने के लिए माफी मांगता हूं और अब अपना मुकदमा वापस ले लूंगा। उन्होंने भावुक होकर कहा, “मैं हनुमान जी का भक्त हूं। जब से मैंने रिपोर्ट लिखाई, मेरी अंतरात्मा गवाही नहीं दे रही थी। मुझे महसूस हुआ कि मुझसे बहुत बड़ा अपराध हो गया है, जिसके कारण मुझे दिन-रात चैन नहीं मिल रहा था। अपने समाज का सिर गर्व से ऊंचा रखने के लिए बिना किसी दबाव के धरने पर आया हूं।”

उन्होंने आगे कहा कि उनका समाज एक स्वाभिमानी समाज है, जिसे कोई खरीद नहीं सकता। धरना स्थल पर मौजूद किसानों और मजदूरों ने उनका स्नेहपूर्वक स्वागत किया, जिससे वे काफी भावुक नजर आए।

गन्ना मंत्री पर सीधा हमला, भतीजे का खुला समर्थन

मंच से गिर्राज वाल्मीकि ने इसके बाद गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण को निशाने पर लिया। उन्होंने मंत्री का नाम लेकर कहा, “माननीय मंत्री जी, आज के बाद मैं आपको सदा के लिए अलविदा कहता हूं।” इसके बाद उन्होंने मंत्री के प्रतिनिधि और भतीजे नरदेव चौधरी का समर्थन करते हुए कहा कि नरदेव बड़ी मेहनत और ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जनता नरदेव को मंत्री और विधायक के रूप में देखना चाहती है, लेकिन नरदेव आपके ही मंत्री आपको विधायक नहीं बनने देंगे। उन्होंने नरदेव चौधरी से अपील की कि आप भी धरने पर आ जाओ, अपनी जनता के बीच आओ, यह भोली-भाली जनता आपको विधायक बना देगी। मंच पर उस समय पूर्व प्रधान जबर सिंह, विक्रम सिंह एडवोकेट, राजपाल सिंह और रामपाल सिंह भी मौजूद रहे।

भाजपा हाईकमान के फोन आने का दावा

अपने संबोधन में गिर्राज वाल्मीकि ने खुलासा किया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भाजपा हाईकमान के वरिष्ठ लोगों के लगातार फोन आ रहे थे और उनसे कहा जा रहा था कि “गिर्राज, तुमने यह बहुत गलत काम कर दिया है।”

20 सितंबर से 29 सितंबर तक का पूरा घटनाक्रम

इस विवाद की जड़ 20 सितंबर को हुई, जब धरनास्थल पर एक महिला नुन्ना द्वारा गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण को निशाने पर लेते हुए वाल्मीकि समाज पर अमर्यादित टिप्पणी की गई। इसके बाद सफाई मजदूर संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष और कोसीकलां निवासी गिर्राज वाल्मीकि ने नुन्ना व अन्य चार आंदोलनकारियों के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट लिखाते हुए 150 अज्ञात पर भी मुकदमा लिखा दिया। रिपोर्टों के मुताबिक यह मुकदमा एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज कराया गया था।

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने बलपूर्वक आंदोलनकारियों को धरनास्थल से हटा दिया, लेकिन अगले ही दिन ग्रामीण दोगुनी संख्या में फिर डट गए। तब गिर्राज वाल्मीकि ने कहा था कि अमर्यादित टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई न हुई तो वह आत्मदाह कर लेंगे। मंगलवार दोपहर वे अचानक धरनास्थल पर पहुंचे और पूरे मामले में पलट गए।

18 साल से बंद छाता चीनी मिल की कहानी

छाता चीनी मिल 18 वर्षों से बंद है। हर चुनाव में चीनी मिल मुद्दा बनती है, लेकिन कभी शुरू नहीं हो पाई। 13 अगस्त को चीनी मिल को दोबारा चलाने की मांग फिर तेज हुई और मिल के गेट पर ही किसानों ने धरना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी और यह आंदोलन पश्चिमी यूपी की सीमा से बाहर हरियाणा तक फैल गया।

धरने की अगुवाई सेना के पूर्व सूबेदार ललित कर्मयोगी कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमें चीनी मिल चाहिए, जब तक चीनी मिल शुरू नहीं होगी, धरना खत्म नहीं होगा। धरने की आंच हरियाणा के पलवल, होडल और मितरौली के साथ ही हाथरस के सादाबाद तक पहुंच गई है।

सोमवार को गांवों की बड़ी भागीदारी, भंडारे की घोषणा

सोमवार को छाता क्षेत्र के आजनौख, अलवाई और तातरपुर के बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं धरने पर पहुंचे। जय जवान-जय किसान के नारों के बीच अलवाई के ग्रामीणों ने मंगलवार से आंदोलनकारियों के लिए भंडारे की सेवा की घोषणा की।

एथेनाल प्लांट को मंजूरी, लेकिन किसान मांग रहे चीनी मिल

15 सितंबर को कैबिनेट ने छाता में बनने वाली तीन-स्तरीय परियोजना के पहले चरण में एथेनाल प्लांट को मंजूरी दे दी। गन्ना मंत्री ने कहा कि यह प्रदेश का पहला प्लांट होगा जिसमें एथेनाल बनेगा, चीनी का उत्पादन होगा और बायोमास बिजली का भी उत्पादन होगा। अक्टूबर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों शिलान्यास की घोषणा भी हो चुकी है।

लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें चीनी मिल चाहिए, एथेनाल प्लांट नहीं। धरने पर डटे किसानों का साफ कहना है कि जब तक चीनी मिल शुरू नहीं होगी, धरना नहीं हटेगा। गौर करने वाली बात यह भी है कि गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण खुद इसी क्षेत्र के विधायक हैं, इसलिए विपक्षी राजनीतिक दलों ने उन पर सीधा निशाना साधा है।

अब आगे क्या होगा

गिर्राज वाल्मीकि के मुकदमा वापसी की घोषणा के बाद आंदोलनकारियों का हौसला और बढ़ गया है। एक तरफ मुकदमे के डर का माहौल खत्म होता दिख रहा है, वहीं मंत्री के खिलाफ खुला मोर्चा इस आंदोलन को राजनीतिक रंग भी दे रहा है। किसानों की मांग साफ है: शिलान्यास एथेनाल प्लांट का हो या चीनी मिल का, धरना तभी खत्म होगा जब मिल की चिमनियों से धुआं निकलेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छाता चीनी मिल का धरना कितने दिनों से चल रहा है?

छाता चीनी मिल को दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर किसानों का धरना 13 अगस्त 2026 से मिल के गेट पर चल रहा है और 29 सितंबर को यह अपने 50वें दिन भी जारी रहा।

गिर्राज वाल्मीकि ने मुकदमा क्यों कराया था और अब क्यों वापस लिया?

20 सितंबर को धरनास्थल पर एक महिला आंदोलनकारी द्वारा वाल्मीकि समाज पर अमर्यादित टिप्पणी करने पर उन्होंने नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 29 सितंबर को वे धरनास्थल पर पहुंचे, माफी मांगी और कहा कि रिपोर्ट लिखाने के बाद उनकी अंतरात्मा गवाही नहीं दे रही थी, इसलिए वे मुकदमा वापस ले रहे हैं।

छाता चीनी मिल कितने साल से बंद है?

छाता चीनी मिल पिछले 18 वर्षों से बंद है। हर चुनाव में यह मुद्दा बनता है, लेकिन मिल कभी शुरू नहीं हो पाई।

सरकार ने छाता चीनी मिल के लिए क्या फैसला लिया है?

15 सितंबर को कैबिनेट ने छाता में बनने वाली तीन-स्तरीय परियोजना के पहले चरण में एथेनाल प्लांट को मंजूरी दी है। मंत्री ने अक्टूबर में मुख्यमंत्री के हाथों शिलान्यास की घोषणा की है, लेकिन किसान चीनी मिल की मांग पर अड़े हैं।

क्या मुकदमा वापसी के बाद धरना खत्म हो जाएगा?

नहीं। धरने की अगुवाई कर रहे पूर्व सूबेदार ललित कर्मयोगी साफ कह चुके हैं कि जब तक चीनी मिल शुरू नहीं होगी, धरना खत्म नहीं होगा। मुकदमा वापसी से आंदोलनकारियों का हौसला और बढ़ा है।

स्रोत: दैनिक जागरण (29 सितंबर 2026 और 28 सितंबर 2026 की रिपोर्ट), न्यूज इंडिया टीवी की वीडियो रिपोर्ट।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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