विजयादशमी पर छाता चीनी मिल धरने में बवाल: पुलिस ने मंत्री-विधायकों के पुतले छीने, किसानों से तीखी धक्का-मुक्की

विजयादशमी का दिन मथुरा के छाता में गन्ना किसानों के लिए उत्सव नहीं, टकराव का दिन बन गया। छाता स्थित बंद चीनी मिल को दोबारा चालू कराने की मांग को लेकर १३ अगस्त से चल रहे धरने में मंगलवार को उस वक्त बवाल खड़ा हो गया, जब पहले से घोषित कार्यक्रम के तहत आंदोलनकारी गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री, चारों विधायकों और सांसद के पुतले लेकर दहन करने निकले। दहन से पहले ही पुलिस ने पुतले कब्जे में ले लिए, और देखते ही देखते धरनास्थल पर पुलिस और किसानों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। सुबह से ही धरनास्थल पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
शाम चार बजे का घटनाक्रम — पुतले छीने, खींचतान हुई
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार शाम चार बजे आंदोलनकारी पुतले लेकर धरनास्थल से बाहर निकले तो पुलिस ने पुतले छीन लिए। इसको लेकर आंदोलनकारियों से तीखी नोकझोंक हुई और दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई। आंदोलन में शामिल महिलाएं भी पुलिस से भिड़ गईं, लेकिन पुतले नहीं बचा पाईं।
किसान और भूतपूर्व सैनिक परिषद ने विजयादशमी पर धरनास्थल पर जिले के चार विधायकों, सांसद और गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री के पुतले दहन करने की घोषणा की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार सुबह से ही पुलिस प्रशासन सतर्क था और धरनास्थल पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था।
पुलिस यहीं नहीं रुकी — आंदोलनकारियों ने जब एक और पुतला निकालने की कोशिश की तो पुलिस ने उसे भी छीन लिया। धरनास्थल पर तीसरा पुतला भी रखा था, पुलिस ने उसे बरामद कर लिया। छिपाकर रखे गए पुतलों को भी पुलिस उठा ले गई। करीब एक घंटे तक एडीएम प्रशासन अमरेश कुमार, एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह और एसपी देहात आलोक राज नारायण ने आंदोलनकारियों को समझाया और शांतिपूर्ण धरना देने की अपील की। मुख्य संचालक पूर्व सूबेदार ललित कर्मयोगी ने पुतला दहन स्थगित कर दिया।
धरनास्थल से दूर खेत में पुतला दहन का दावा
सबसे दिलचस्प मोड़ इसके बाद आया। धरनास्थल से दूर एक खेत में किसी ने जनप्रतिनिधियों का मुखौटा लगा पुतला दहन कर दिया। आंदोलनकारियों ने इस घटना का वीडियो प्रसारित किया और पुतला दहन का दावा किया — यह वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
घटना के बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा — “किसान भाइयों ने अपना फर्ज निभाया है और प्रशासन ने अपनी ड्यूटी पूरी की है।” किसानों का आरोप है कि प्रशासन उनके विरोध प्रदर्शन में बाधा डालने का प्रयास करता है, लेकिन अपनी मांगों को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा।
१८ साल से बंद है छाता चीनी मिल
इस आंदोलन की जड़ पुरानी है। छाता चीनी मिल २००८ से बंद पड़ी है — करीब १८ साल से। मिल बंद होने से इलाके के गन्ना किसानों को अपना गन्ना दूर की मिलों में ढोना पड़ता है, जिससे ढुलाई की लागत बढ़ती है और भुगतान में भी देरी होती है। किसानों की मांग साफ है — मिल दोबारा चालू हो।
धरने की अगुवाई पूर्व सैनिक परिषद कर रहा है। सरकार की ओर से घोषणा की जा चुकी है कि छाता चीनी मिल तीन चरणों में शुरू होगी और पहले चरण में एथेनॉल प्लांट लगेगा। लेकिन किसान इस शर्त से नाराज हैं — उनका कहना है कि उन्हें एथेनॉल प्लांट नहीं, पहले चीनी मिल चाहिए, क्योंकि मिल चालू होने से गन्ना किसानों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलेगी और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
पुलिस-प्रशासन की भारी मौजूदगी
प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात रहा — एडीएम अमरेश सिंह, एसडीएम अखिलेश सिंह, तहसीलदार नितिन, नायब तहसीलदार अनमोल गर्ग, सीओ छाता भूषण वर्मा और सीओ गोवर्धन अनिल कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। रिपोर्ट के अनुसार, आसपास के गांवों में भी कुछ स्थानों पर पुतले रखे गए थे। यानी आंदोलन का दायरा धरनास्थल तक सीमित नहीं रहा — गांवों में भी समर्थन की तैयारी थी।
आंदोलन का इतिहास — अब तक की स्थिति
१३ अगस्त से शुरू हुआ यह धरना अब अपने लगभग ७०वें दिन में पहुंच चुका है। इतने लंबे समय तक लगातार धरना चलना अपने आप में इस बात का संकेत है कि किसानों के लिए छाता चीनी मिल कोई छोटा मुद्दा नहीं है — और विजयादशमी की घटना इस आंदोलन की अब तक की सबसे तीखी घड़ी रही। किसानों की सबसे बड़ी मांग आज भी वही है — १८ साल से बंद मिल दोबारा चले।
गन्ना किसानों के लिए इसका मतलब क्या है
छाता मिल का मामला सिर्फ मथुरा का नहीं है। प्रदेश में १२२ चीनी मिलों में से कई पुरानी मिलें बंद पड़ी हैं, और जहां मिल बंद है वहां के किसानों को दोहरी मार पड़ती है — एक तो गन्ने की ढुलाई दूर तक करनी पड़ती है, दूसरे भुगतान में भी देरी होती है। छाता के किसान यही चाहते हैं कि मिल दोबारा चालू हो ताकि उनका गन्ना स्थानीय स्तर पर ही बिक सके।
एथेनॉल प्लांट बनाम चीनी मिल का विवाद भी नीतिगत स्तर पर अहम है — किसानों का कहना है कि पहले उनके गन्ने की खपत सुनिश्चित हो, यानी चीनी मिल चले। इस मुद्दे पर सरकार और किसानों के बीच रस्साकशी अभी लंबी खिंच सकती है।
आगे क्या होगा
फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी जगह अड़े हैं। किसानों ने पुतला दहन स्थगित कर दिया है, लेकिन आंदोलन जारी रखने का एलान दोहराया है। प्रशासन ने शांतिपूर्ण धरने की अपील की है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि सरकार की ओर से तीन चरणों की योजना पर कोई ठोस कदम उठता है या आंदोलन और तेज होता है।
गन्ना किसानों को सलाह है कि अपने गन्ने का सर्वे रिकॉर्ड और बैंक खाता अपडेट रखें, और किसी भी भुगतान संबंधी दिक्कत की शिकायत गन्ना विकास विभाग के टोल-फ्री नंबर १८००-१२१-३२०३ पर दर्ज कराएं।
आपके सवाल
छाता चीनी मिल कितने समय से बंद है? छाता चीनी मिल २००८ से बंद पड़ी है — करीब १८ साल से। इसी मिल को दोबारा चालू कराने की मांग को लेकर १३ अगस्त से धरना चल रहा है।
विजयादशमी पर छाता धरने में क्या हुआ था? आंदोलनकारियों ने गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री, चारों विधायकों और सांसद के पुतले दहन की घोषणा की थी। पुलिस ने धरनास्थल को छावनी में तब्दील कर दिया और शाम चार बजे पुतले छीन लिए, जिससे तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई।
किसान एथेनॉल प्लांट क्यों नहीं चाहते? किसानों का कहना है कि उन्हें एथेनॉल प्लांट नहीं, पहले चीनी मिल चाहिए ताकि उनका गन्ना स्थानीय स्तर पर बिक सके। सरकार की योजना तीन चरणों में है, जिसमें पहले चरण में एथेनॉल प्लांट लगना प्रस्तावित है।
धरने की अगुवाई कौन कर रहा है? धरने की अगुवाई पूर्व सैनिक परिषद कर रहा है, और मुख्य संचालक पूर्व सूबेदार ललित कर्मयोगी हैं। धरने में किसान और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हैं।
पुलिस ने कितने पुतले बरामद किए? जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने धरनास्थल से तीन पुतले बरामद किए — एक दहन की कोशिश के दौरान छीना गया और दो छिपाकर रखे गए थे। धरनास्थल से दूर एक खेत में आंदोलनकारियों ने पुतला दहन का दावा किया है।
स्रोत: दैनिक जागरण — “छाता चीनी मिल आंदोलन: मथुरा में पुतला दहन रोकने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प” (२० अक्टूबर २०२६), “मथुरा के छाता चीनी मिल आंदोलन के दौरान पुतला दहन को लेकर पुलिस और किसानों में तीखी झड़प” (२१ अक्टूबर २०२६); यूट्यूब न्यूज रिपोर्ट (२० अक्टूबर २०२६)
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