छत्तीसगढ़ में गन्ना भाव 425 रुपये: 31 हजार किसानों को 51 करोड़ बोनस का ऐलान, यूपी के 400 से आगे कैसे?

उत्तर प्रदेश का गन्ना किसान जब अपने भाव की बात करता है तो निगाह पड़ोसी राज्यों पर भी जाती है। इस बार खबर छत्तीसगढ़ से आई है — वहां सरकार ने गन्ने की खरीद दर 355 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। यानी सीधे 70 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी। सबसे बड़ी बात यह कि बढ़ी हुई दर पेराई सत्र 2025-26 से ही लागू होगी — यानी जो किसान पहले गन्ना बेच चुके हैं, उन्हें भी अंतर का भुगतान मिलेगा। उत्तर प्रदेश में अगैती गन्ने की एसएपी सत्र 2025-26 के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल थी, लेकिन छत्तीसगढ़ की दर अब उससे भी आगे निकल गई है। (डेक्कन क्रॉनिकल, 10 अक्टूबर 2026; एशियानेट न्यूज हिंदी)
रायपुर की बैठक में हुआ बड़ा ऐलान
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 10 अक्टूबर 2026 को रायपुर में किसान प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया। बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा भी मौजूद रहे — यानी यह कोई मामूली प्रशासनिक बदलाव नहीं, सरकार के स्तर का राजनीतिक निर्णय था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्नदाता की खुशहाली ही समृद्ध छत्तीसगढ़ का आधार है। राज्य सरकार ने चारों सहकारी चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि वे किसानों से 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना खरीदें। छत्तीसगढ़ में सीधी इनपुट सब्सिडी की जगह सरकार किसानों को इन्हीं बढ़ी हुई खरीद दरों के जरिए समर्थन देती है। (डेक्कन क्रॉनिकल; नेशन प्रेस)
31,022 किसानों को 51.09 करोड़ रुपये का बोनस
इस फैसले का सबसे ठोस असर बोनस के रूप में दिखेगा। द वर्ल्ड ओपिनियन के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार ने बोनस की गणना का आधार भी 355 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। इस नई दर पर राज्य की चार सहकारी चीनी मिलों से जुड़े 31,022 गन्ना किसानों को पेराई सत्र 2025-26 के लिए कुल मिलाकर लगभग 51.09 करोड़ रुपये का बोनस मिलेगा। (द वर्ल्ड ओपिनियन, 12 अक्टूबर 2026; एशियानेट न्यूज हिंदी)
छत्तीसगढ़ में चार सहकारी चीनी मिलें — छोटा कद, बड़ा रेट
यह फैसला समझने के लिए छत्तीसगढ़ के गन्ना क्षेत्र का आकार जानना जरूरी है। डेक्कन क्रॉनिकल के अनुसार, राज्य में सालाना करीब 18.6 लाख से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन होता है और खेती लगभग 31,000 से 35,000 हेक्टेयर में होती है। राज्य में केवल चार सहकारी चीनी मिलें चल रही हैं:
- भोरमदेव सहकारी चीनी मिल — कवर्धा
- महामाया सहकारी चीनी मिल — सूरजपुर
- सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी चीनी मिल — पंडरिया (कबीरधाम)
- मां दंतेश्वरी मैय्या सहकारी चीनी मिल — बालोद
(एशियानेट न्यूज हिंदी)
यही छत्तीसगढ़ मॉडल की खासियत है — छोटा पैमाना और सहकारी मिलों पर सरकार का सीधा नियंत्रण। चारों मिलें सहकारी व्यवस्था में चलती हैं, इसलिए खरीद दर बढ़ाने का फैसला तुरंत लागू हो जाता है। किसानों को इसके अलावा कल्याणकारी लाभ भी मिलते हैं, जैसे शेयरहोल्डर किसानों को 50 किलो चीनी की बोरी 30 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर दी जाती है। (डेक्कन क्रॉनिकल)
राज्यों की तुलना: यूपी 400, हरियाणा 415, पंजाब 416 — अब छत्तीसगढ़ 425
इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की दर देश के कई प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों से अधिक हो गई है। एशियानेट न्यूज हिंदी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अगैती प्रजाति के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 400 रुपये प्रति क्विंटल, हरियाणा में 415 रुपये और पंजाब में 416 रुपये प्रति क्विंटल है। केंद्र सरकार का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) सत्र 2025-26 के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल तय था। हालांकि यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अलग-अलग राज्यों में भुगतान की व्यवस्था और शर्तें अलग होती हैं — महाराष्ट्र और कर्नाटक में भुगतान एफआरपी, रिकवरी और मिलों की व्यवस्था के आधार पर तय होता है, जबकि यूपी में एसएपी एक अलग व्यवस्था है।
यूपी के गन्ना किसान के लिए इसका मतलब क्या है?
छत्तीसगढ़ की खबर सीधे यूपी के खाते में कुछ नहीं डालती — यहां 122 चीनी मिलें हैं और भुगतान की अपनी व्यवस्था है। लेकिन यह खबर उस बहस को जरूर धार देती है जो यूपी में चल रही है। चीनीमंडी की रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर को लखनऊ में हुई उपसमिति की बैठक में किसान प्रतिनिधियों ने गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी थी, और सितंबर में बिजनौर की महापंचायत में भी एसएपी बढ़ाने की मांग उठी थी। (चीनीमंडी, 9 अक्टूबर 2026; एग्रिइंसाइट)
पश्चिमी यूपी की मिलें अक्टूबर के तीसरे हफ्ते से पेराई शुरू करने की योजना बना रही हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ का 425 वाला फैसला यूपी के किसान संगठनों को अपनी मांग रखने का नया तर्क देगा — जब छत्तीसगढ़ जैसा छोटा उत्पादक राज्य 425 रुपये दे सकता है, तो देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य में किसान को 400 पर ही क्यों संतोष करना चाहिए?
किसान अब क्या करें
छत्तीसगढ़ का फैसला यूपी के किसानों के लिए तुरंत कोई अधिकार नहीं बनाता, लेकिन यह समय किसान संगठनों के साथ जुड़ने और अपनी मांगों को संगठित रूप से उठाने का है। कुछ व्यावहारिक कदम:
- अपनी मांग दर्ज कराएं — अपने क्षेत्र के गन्ना विकास समिति और किसान संगठनों की बैठकों में शामिल हों, ताकि एसएपी को लेकर सरकार पर दबाव बने।
- पेराई शुरू होने से पहले सर्वे रिकॉर्ड जांच लें — छत्तीसगढ़ में भी बस्ती जैसी सर्वे गड़बड़ियों के अनुभव से साफ है कि किस्म और रकबे का गलत दर्ज होना सीधे भुगतान घटाता है।
- बैंक खाता और कृषक कोड सक्रिय रखें — भुगतान में देरी से बचने के लिए खाता आधार से जुड़ा और सक्रिय होना चाहिए।
- राज्यों की खबरों पर नजर रखें — अन्य राज्यों के फैसले एसएपी की बहस में किसान पक्ष को मजबूत तर्क देते हैं।
जवाब जानिए
सवाल: क्या छत्तीसगढ़ का 425 रुपये का भाव उत्तर प्रदेश में भी लागू होगा? जवाब: नहीं। यह फैसला सिर्फ छत्तीसगढ़ की चार सहकारी चीनी मिलों पर लागू है। उत्तर प्रदेश में गन्ने का भाव एसएपी से तय होता है, जो राज्य सरकार की घोषणा पर निर्भर करता है। लेकिन छत्तीसगढ़ का फैसला यूपी में एसएपी बढ़ाने की मांग को मजबूती देता है।
सवाल: क्या पहले गन्ना बेच चुके किसानों को भी नई दर का लाभ मिलेगा? जवाब: छत्तीसगढ़ में हां — सरकार ने स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई दर पेराई सत्र 2025-26 से लागू होगी, इसलिए पुराने किसानों को अंतर का भुगतान मिलेगा। यह व्यवस्था सिर्फ छत्तीसगढ़ पर लागू है।
सवाल: उत्तर प्रदेश में अभी गन्ने का भाव कितना है? जवाब: सत्र 2025-26 के लिए यूपी में अगैती गन्ने की एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल थी। 2026-27 की एसएपी की घोषणा अभी बाकी है और किसान संगठन इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।
सवाल: 51.09 करोड़ का बोनस किसे मिलेगा? जवाब: छत्तीसगढ़ की चार सहकारी चीनी मिलों से जुड़े 31,022 किसानों को यह बोनस पेराई सत्र 2025-26 के लिए मिलेगा। बोनस की गणना नई 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर होगी।
सवाल: छत्तीसगढ़ इतनी बड़ी बढ़ोतरी कैसे कर पाया? जवाब: राज्य में केवल चार सहकारी चीनी मिलें हैं जिन पर सरकार का सीधा नियंत्रण है, और उत्पादन का पैमाना छोटा है। इसी वजह से दर बढ़ाने का फैसला तुरंत और पूरे राज्य में लागू हो सका।
स्रोत: डेक्कन क्रॉनिकल (10 अक्टूबर 2026), द वर्ल्ड ओपिनियन (12 अक्टूबर 2026), एशियानेट न्यूज हिंदी, नेशन प्रेस, चीनीमंडी (9 अक्टूबर 2026), एग्रिइंसाइट।
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